Mustard Crops: सरसों की पहली सिंचाई कब करें ? और कौन सी खाद दें ? किसान जानें टिप्स-ट्रिक्स

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Mustard Crops: रबी सीजन में सरसों की बुवाई के बाद निराई और सिंचाई समय पर करनी चाहिए। सरसों की निराई करें और कब सरसों में पहला पानी दें। आइए, वरिष्ठ कृषि विज्ञान इस बारे में क्या बात रहे हैं, ये जानते हैं।
जयपुर, आगरा, लखनऊ
Mustard Crops: देश में रबी सीजन (Rabi Season Crops) की फसलों की बुवाई अभी तेजी से हो रही है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार समेत दूसरे प्रदेशों में रबी सीजन की फसल सरसों (Mustard) की बुवाई पूरी हो गई है। जिससे खेतों में सरसों (Mustard Crops)जमी खड़ी है। सरसों की अच्छी फसल के लिए देखभाल, निराई, सिंचाई बेहद जरूरी है। सरसों की फसल में पहला पानी सबसे अहम होता है। सरसों की पहली सिंचाई का समय मिट्टी, तापमान, जलवायु समेत अन्य बातें भी हर प्रदेश के लिए अलग हैं। आइए, सरसों (Mustard Crops)की पहली सिंचाई कब करें सिंचाई से पहले या सिंचाई के साथ कौन-कौन सी खाद का उपयोग करें। ये आगरा के बिचपुरी कृषि विज्ञान केंद्र ( (Bichpuri Krishi Vigyan Kendra, Agra) के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान से जानते हैं।
🔬 मिट्टी परीक्षण क्यों जरूरी है?
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बिना मिट्टी परीक्षण के उर्वरकों का प्रयोग अक्सर या तो कम होता है या अधिक।
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मिट्टी की pH, जैविक कार्बन, NPK स्तर को जानकर ही उर्वरकों का सही अनुपात तय किया जा सकता है।
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हर 2-3 साल में मिट्टी की जांच अवश्य कराएं।
बता दें कि सरसों की फसल (Mustard Crops) में निराई, सिंचाई के साथ ही खाद का चयन करना बेहद जरूरी है। ज्यादातर किसान सरसों की पहली सिंचाई, सिंचाई के बाद खाद के चयन, खाद की मात्रा के बारे में नहीं जानते हैं। जिससे फसल अच्छी नहीं होती है।
🚿 सरसों की फसल में पहली सिंचाई का सही समय
✅ पहली सिंचाई कब करें?
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सरसों की पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद करनी चाहिए।
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यह समय पौधों की शाखा निकलने की अवस्था (branching stage) होती है, और इस समय नमी की जरूरत सबसे अधिक होती है।
✅ पहली सिंचाई क्यों जरूरी है?
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पहली सिंचाई से पौधे का शाखाओं का विकास बेहतर होता है।
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फलियों की संख्या बढ़ती है जिससे उत्पादन अधिक होता है।
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जल-तनाव (water stress) से पौधे की वृद्धि रुक सकती है, जिससे उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
सरसों की निराई जरूरी (Weeding of mustard is very important)
आगरा के बिचपुरी कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि सरसों के खेतों में खरतपतवार हैं तो उनका प्रबंधन करें। खरपतवार के लिए निराई करें। जिससे खरपतवार खत्म होंगे तो खेत की जमीन में मौजूद सभी पोषक तत्व सरसों के पौधों को मिलेंगे। जिससे पौधे सही ग्रोथ होगी। निराई में सरसों के पौधों के बीच की दूरी बेहद कम होने पर घनी सरसों के पौधे हटा दें। जिससे पौधों की बढ़त में कोई समस्या नहीं आएगी।
💧 सिंचाई विधियाँ
| विधि | लाभ |
|---|---|
| फव्वारा विधि (Sprinkler) | जल की बचत, समान रूप से नमी वितरण |
| धार सिंचाई (Check Basin) | पारंपरिक विधि, किफायती लेकिन जल अधिक लगता है |
(💡 Note: जलभराव न होने दें, इससे जड़ सड़न व पत्तों का पीला पड़ना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।)
सरसों की पहली सिंचाई 20 से 25 दिन में करें (Do the first irrigation of mustard in 25 to 25 days)
केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप सिंह बताते हैं कि सरसों की पहली सिंचाई सरसों बिजाई के एक माह बाद ही करनी चाहिए। 20 से 25 दिन तक फसल की अवस्था (condition) को देखकर सिंचाई करनी चाहिए। फसल अगर सही वृद्वि (growth) हो रही है तो सिंचाई थोड़ी लेट कर सकते हैं। पौधे मुरझा रहे हैं तो थोड़ी जल्दी सिंचाई करें। लेकिन किसान सरसों की पहली सिंचाई जरूर करें। सही समय पर सरसों की सिंचाई करने से पौधों का तना मजबूत और मोटा होगा। जिससे पौधों की शाखाएं भी मजबूत बनेंगी। जिसमें ही सरसों की फलियों बनेंगी। जिससे ही अच्छी पैदावार होगी। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि रेतीली मिट्टी में सरसों की फसल में नमी अधिक देर तक नहीं रहती है। जिससे बुवाई के 15, 20 या 25 दिन से पहले ही सरसों की फसल सूखने लगती है। पहले पानी में देरी होने से सरसों के पौधे मुरझाने लगते हैं। किसान यह भी ध्यान रखें कि सरसों के पौधे का रंग हरा होने के बजाय नीला दिखाई देने पर पौधे का तना फूलने की बजाए, सूखेगा और पतला होता जाएगा। जिससे सरसों के उत्पादन पर असर होता है।
सरसों के पौधों यदि पास-पास होने बीमारियां अधिक होंगी (more diseases)
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि यदि खेत में सरसों के पौधे पास-पास हैं। जो पौधों में वाइट रस्ट जैसी बीमारियां लगने की संभावना बढ़ती है। जो एक फंगस रोग है। जिससे पौधों के तने प्रभावित होते हैं। सघन पौधों में ओस और कोहरे के कारण नमी अधिक समय तक ठहरती है। जिससे पौधों के गलने का खतरा बढ़ता है। इसलिए, पहली सिंचाई से पहले निराई करके अधिक घने पौधों को हटाएं। पौधों के बीच लगभग 1 फीट की दूरी रखने से उनकी ब्रांचिंग बेहतर आएंगी। जिससे अधिक फली और उच्च गुणवत्ता का उत्पादन संभव हो पाता है।
🧪 Mustard Crops (सरसों) में उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Management)
✅ आवश्यक मुख्य पोषक तत्व:
नाइट्रोजन (N)
- मात्रा: 80-100 किग्रा/हेक्टेयर
विभाजन
- आधा बुवाई के समय
आधा पहली सिंचाई के साथ
फास्फोरस (P)
- मात्रा: 40-50 किग्रा/हेक्टेयर
बुवाई के समय मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं।
जड़ विकास और फूल आने में मदद करता है।
पोटाश (K)
- मात्रा: 30-40 किग्रा/हेक्टेयर
बुवाई के समय ही प्रयोग करें।
फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
सल्फर (S)
- मात्रा: 20-40 किग्रा/हेक्टेयर
यह तेल की गुणवत्ता बढ़ाता है और उत्पादन में सुधार करता है।
सिंचाई के साथ ये खाद करें उपयोग (Use these fertilizers with irrigation)
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि सरसों की फसल में पहली सिंचाई के बाद सरसों के पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए उसमें खाद भी दें। यदि मृदा की जांच के बाद सरसों की बुवाई में उर्वरक का उपयोग किया है तो भी सरसों की पहली सिंचाई के बाद खाद का उपयोग करें। यदि पहली सिंचाई के बाद पौधों के आसपास सफेद जड़ें उभर रही होती हैं। ये नई जड़ें पौधे के चारों ओर फैल जाती हैं, जो उनकी वृद्धि को प्रोत्साहित करती हैं। इस समय पर उर्वरक का उपयोग करने से पौधों की जड़ों मजबूत होंगी और पौधों की वृद्धि अच्छी होगी। सरसों की बुवाई के दौरान डीएपी, सिंगल सुपर फास्फेट, सल्फर समेत अन्य खाद का उपयोग नहीं किया है तो उन्हें सिंचाई से साथ ये उर्वरक उपयोग करने चाहिए। सिंचाई के समय ये खादें सीधे पौधों की जड़ों के पास पहुंचेगी। जिससे पौधों को पोषक तत्व मिलेंगे। जो इन्हें अवशोषित करके पौधों की अच्छी वृद्धि होगी।
🧬 Mustard Crops (सरसों) में सूक्ष्म पोषक तत्वों का महत्व
| तत्व | लक्षण (कमी के) | उपचार |
|---|---|---|
| जिंक (Zn) | पत्तियाँ पीली होना, विकास रुकना | 0.5% ज़िंक सल्फेट का छिड़काव |
| बोरोन (B) | फलियों का झड़ना, दाने न बनना | 0.2% बोरेक्स का छिड़काव |
| मैग्नीशियम | पत्तियों में हल्की पीलापन, निचली पत्तियों का सूखना | फोलियर स्प्रे मैग्नीशियम सल्फेट |
यूरिया और जिंक का उपयोग (Use of urea and zinc)
कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप सिंह बताते हैं कि अगर सरसों की बुवाई के समय डीएपी, सिंगल सुपर फास्फेट, पोटाश और सल्फर जैसे खाद उपयोग की है तो सिंचाई के बाद सरसों में केवल यूरिया और जिंक का उपयोग करें। यूरिया की मात्रा लगभग 50 किलो प्रति एकड़ होनी चाहिए। इसके साथ ही जिंक की मात्रा 10 से 15 किलो प्रति एकड़ रखेंगे तो अच्छी रहेगी। जिंक को सिंचाई से पहले खाद के साथ मिलाकर छिड़कने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। सिंचाई के बाद यूरिया सरसों में लगाने पर नाइट्रोजन का सही तरीके से अवशोषण होता है। जिससे पौधों को भरपूर पोषण मिलता है।
एनपीके स्प्रे का भी इस्तेमाल करें (Use NPK spray as well)
कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप सिंह बताते हैं कि सरसों की पहली सिंचाई के बाद 2-4 दिन में NPK 19:19:19 या 20:20:20 का स्प्रे करेंगे तो पौधों की वृद्धि ठीक होगी। एनपीके का स्प्रे पौधों की वृद्धि तेजी से होगी। सरसों के पौधे का आकार चौड़ा होगा। स्प्रे के परिणाम शानदार होते हैं। इसके अलावा यदि आप माइक्रो न्यूट्रिएंट भी मिलाना चाहते हैं तो आप इसे भी स्प्रे में डाल सकते हैं. जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में और अधिक सुधार होगा।
💡 अतिरिक्त सुझाव
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खरपतवार नियंत्रण: पहली सिंचाई से पहले खेत की निराई-गुड़ाई अवश्य करें।
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जैविक उर्वरकों का प्रयोग करें जैसे नीम की खली, गोबर खाद आदि।
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मल्चिंग से नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम होते हैं।
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फसल चक्र अपनाएं जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे।
✅ FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q: सरसों की फसल में पहली सिंचाई कब करनी चाहिए?
👉A: सरसों की फसल में पहली सिंचाई बुवाई के 25 से 30 दिन बाद करनी चाहिए, जब पौधे की शाखाएं विकसित होने लगती हैं। यह समय पौधे की प्रारंभिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होता है।
Q: पहली सिंचाई के साथ कौन सा उर्वरक देना चाहिए?
👉A: पहली सिंचाई के साथ टॉप ड्रेसिंग के रूप में यूरिया (नाइट्रोजन स्रोत) देना चाहिए। सामान्यतः प्रति हेक्टेयर 40-50 किलोग्राम यूरिया की सिफारिश की जाती है।
Q: उर्वरक को कैसे और कब लगाना चाहिए?
👉A: उर्वरक को पौधों के आधार से थोड़ी दूरी पर मिट्टी की सतह पर समान रूप से फैलाएं और फिर सिंचाई करें ताकि उर्वरक मिट्टी में घुल जाए और पौधों को आसानी से उपलब्ध हो सके।
Q: क्या पहली सिंचाई से पहले उर्वरक देना चाहिए?
👉A: नहीं, उर्वरक को पहली सिंचाई के समय देना चाहिए ताकि यह मिट्टी में घुलकर पौधों की जड़ों तक पहुंच सके और प्रभावी हो।
Q: सरसों की फसल में कुल कितनी सिंचाइयों की आवश्यकता होती है?
👉A: सामान्यतः सरसों की फसल में दो सिंचाइयों की आवश्यकता होती है: पहली बुवाई के 25-30 दिन बाद और दूसरी फूल आने के समय (लगभग 50-55 दिन बाद)।
Q: क्या अधिक सिंचाई से फसल को नुकसान हो सकता है?
👉A: हां, अधिक सिंचाई से जलजमाव हो सकता है, जिससे जड़ें सड़ सकती हैं और पौधे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। इसलिए आवश्यकतानुसार ही सिंचाई करें।
Q: उर्वरक का अधिक मात्रा में उपयोग करने से क्या होता है?
👉A: उर्वरक का अधिक मात्रा में उपयोग करने से पौधों को नुकसान हो सकता है, जैसे कि पत्तियों का जलना या पौधों की वृद्धि में रुकावट। इसलिए अनुशंसित मात्रा में ही उर्वरक का उपयोग करें।
Q: क्या बारिश के समय उर्वरक देना उचित है?
👉A:नहीं, बारिश के समय उर्वरक देने से यह बह सकता है और पौधों को लाभ नहीं मिलेगा। सूखे मौसम में ही उर्वरक का उपयोग करें।
Q: सरसों की फसल में कौन-कौन से पोषक तत्व महत्वपूर्ण हैं?
👉A: सरसों की फसल के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सल्फर महत्वपूर्ण पोषक तत्व हैं। इनकी उचित मात्रा में आपूर्ति से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में वृद्धि होती है।
Q: क्या जैविक उर्वरकों का उपयोग सरसों की फसल में किया जा सकता है?
👉A: हां, जैविक उर्वरकों का उपयोग सरसों की फसल में किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।

