Rabi Crops: एडवाइजरी और हेल्पलाइन नंबर जारी, फोटो भेजकर पाएं कीट-रोग से बचाव का उपाय #Kisan

Share This Article
Rabi Crops: मौसम में बदलाव से किसान परेशान हैं। किसानों की रबी सीजन में खेतों खड़ी गेहूं, आलू, राई, सरसों, चना, मटर, मसूर, मक्का एवं गन्ना की फसल
में कीटों और रोगों का प्रकोप बढने की संभावना है। कृषि विभाग की कृषि रक्षा इकाई ने आगरा मंडल के किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की हैं। जिस पर किसान अपनी फसल में लगे रोग या कीट के प्रकोप का फाटो भेजेंगे तो उन्हें बीमारी और कीटों से
बचाव के उचाव के टिप्स और ट्रिक्स विशेषज्ञ बताएंगे।
आगरा, उत्तर प्रदेश.
Rabi Crops: भारत के करोड़ों किसान हर साल रबी फसलों की खेती करते हैं। अभी रबी की फसल खेतों में खड़ी है। मौसम का बदलाव से किसानों के मांथे पर चिंता की लकीरें हैं। इस मौसम में खेतों खड़ी (Rabi Crops) गेहूँ, आलू, राई/सरसों, चना, मटर, मसूर, मक्का एवं गन्ना की देखभाल बेहद जरूरी है। मौसम (changes in the weather) में बदलाव यानी बूंदाबांदी, बारिश, तापमान में गिरावट और आर्द्रता में वृद्धि से फसलों में कीटों और रोगों का प्रकोप बढ सकता है। यह देखकर आगरा में कृषि विभाग (Agriculture Department in Agra) के उपनिदेशक (Deputy Director Agricultural Protection) श्री देव शर्मा (shri Dev Sharma) ने गाइडलाइन (Guideline) और हेल्प लाइन नंबर्स (Helpline Numbers) जारी किए हैं। जिसमें किसानों से इस मौसम में (Rabi Crops)फसलों की देखभाल की अपील करने के साथ ही कीट या रोगों को लेकर निकटतम विकास खण्ड स्तर पर प्रभारी राजकीय कृषि रक्षा इकाई या जनपद स्तर पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय से करें संपर्क करने की अपील की है।
रबी फसलों में आम रोग और कीट
नीचे कुछ प्रमुख रोगों और कीटों की सूची दी गई है, जो रबी फसलों को प्रभावित करते हैं।
| रोग/कीट | लक्षण | प्रभाव | रोकथाम के उपाय |
|---|---|---|---|
| गेहूं जंग (Wheat Rust) | पत्तियों पर लाल/नारंगी धब्बे | पत्तियाँ खराब होना, उत्पादन में कमी | रोग प्रतिरोधी किस्में, सही समय पर फंगसाइड का छिड़काव |
| एफिड (Aphids) | पत्तियों और तनों पर छोटे कीड़े | पौधों का सकुचन | प्राकृतिक शिकारी कीट, कीटनाशक छिड़काव |
| पाउडरी मिल्ड्यू | पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसा कवक | पत्तियों का विकृत होना | उचित दूरी पर रोपण, फंगसाइड का प्रयोग |
| स्टेम बोरर (मक्का) | तनों में छेद, पौधे की मृत पत्तियाँ | पौधे कमजोर होना, गिरना | फेरोमोन ट्रैप, फसल चक्रीकरण |
(Note: अगर आपको किसी नए लक्षण का सामना हो रहा है, तो तुरंत हेल्पलाइन पर संपर्क करें। इन समस्याओं को नजरअंदाज करने पर उत्पादन में 30% तक की गिरावट संभव है।)
🧪आम कीट व रोग से रोकथाम के उपाय
बीज उपचार: बोआई से पहले बीज का उपचार करना रोग से बचाता है।
फसल चक्र: एक ही फसल लगातार न बोएं।
समय पर दवा छिड़काव: देरी से कीट फैलते हैं और नियंत्रण कठिन हो जाता है।
जैविक विकल्प अपनाएं: नीम आधारित कीटनाशक और ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक उत्पाद फायदेमंद हैं।
🧴 कीट और रोग नियंत्रण के प्रमुख उपाय
-
बायोलॉजिकल कीटनाशकों का उपयोग करें जैसे नीम तेल।
-
समय पर छिड़काव करें – देरी से असर कम हो सकता है।
-
फसल चक्र अपनाएं – बार-बार एक ही फसल से कीटों की संख्या बढ़ती है।
-
बीज शोधन करें – बीज बोने से पहले उपचार करें।
मौसम के बदलाव से कीट और रोग का प्रकोप बढेगा (Infestation of pests and diseases will increase due to change in weather)
कृषि विभाग के उप निदेशक (Deputy Director (Agriculture Protection) श्री देव शर्मा ने बताया कि मौसम में बदलाव हो रहा है. अभी किसानों के खेतों में रबी सीजन की प्रमुख रूप से गेहूँ, आलू, राई, सरसों, चना, मटर, मसूर, मक्का एवं गन्ना की फसलें खडी हैं. मौसम में बदलाव से आगरा मंडल में कहीं पर बूंदाबांदी या कहीं पर तेज बारिश हो रही है. जिससे तापमान गिरा है और आर्द्रता में वृद्धि हुई है. इस मौमस से रबी सीजन की फसलों में सामयिक कीट और कई रोग के प्रकोप की सम्भावना अधिक है। किसानों से अपील है कि अपनी फसलों की सही से निगरानी करें। यदि फसल में कोई सामयिक कीट या रोग दिखाई दे रहा है तो तत्काल विशेषज्ञ से बात करें।
🌾 रबी फसलें कौन-कौन सी होती हैं?
रबी फसलें सर्दी के मौसम में बोई जाती हैं और गर्मियों के शुरू में कटाई होती है। मुख्य रबी फसलें हैं ।
-
गेहूं
-
चना
-
मटर
-
मसूर
-
सरसों
-
जौ
- मक्का
- गन्ना
गेंहू की फसल में पीली गेरूई रोग और नियंत्रण (Yellow rust disease and control in wheat crop)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि इस मौसम में गेंहू की फसल में पीली गेरूई रोग लग सकता है। इससे किसान घबराए नहीं। गेंहू में लगने वाले पीली गेरूई रोग के नियंत्रण के लिए प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिडकाव करें। गेंहू की फसल में यदि पत्ती धब्बा रोग लगा है तो इसके लिए थायोफीनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्लूपी 700 ग्राम अथवा मेन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी 2.0 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें। इस बारे में आगरा जिले की फतेहाबाद तहसील के किसान रवि परिहार ने बताया कि मेरे गेंहू की फसल में पीली गेरूई रोग लग गया है। मैंने कृषि रक्षा विशेषज्ञ के बताने पर गेंहू में पीली गेरूई रोग के नियंत्रण के लिए प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिडकाव किया तो रोग का नियंत्रण हुआ है।
मक्का की फसल में तना भेदक से बचाव (Yellow rust disease and control in wheat crop)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि इस मौसम में मक्का की फसल में तना भेदक कीट लगने की अधिक संभावना है। मक्का की फसल में लगने वाले तना भेदक कीट के लिए किसान 10 प्रतिशत मृतगोभ का आर्थिक क्षति स्तर का प्रकोप दिखाई देने पर डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी अथवा क्लोरेन्ट्रनिलिप्रोल 200 मिली० अथवा इन्डोक्साकार्ब 500 प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें।
फॉल आर्मी वर्ग कीट के प्रकोप से बचाव (Protection from fall armyworm infestation)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि फॉल आर्मी वर्ग कीट के प्रकोप से बचाव के लिए 20-25 पक्षी आश्रय (बर्ड पर्चर) तथा 3-4 को संख्या में लाइट ट्रैप लगाकर आसानी से प्रबन्धन किया जा सकता हैं। फेरोमोन टैप 35-40 प्रति हेक्टेयर की दर से लगा कर भी इसका नियंत्रण किया जा सकते हैं। 10-20 प्रतिशत क्षति लक्षित होने पर रासायनिक नियंत्रण का प्रयोग करना चाहिए। इसके लिए किसानों को क्लोरेन्ट्रानिलीपोल 18.5 प्रतिशत ईसी 0.4 मिलीलीटर अथवा इमामेक्टिन बेजोडट 0.4 ग्राम अथवा थायामेथेक्साम 12.6 ग्राम प्रतिशत लैम्ब्डा-साईहेलोथिन 9.5 प्रतिशत 0.5 प्रति लीटर पानी से घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए।
राई और सरसों में वालदार सूड़ी रोग और बचाव (Walled larva disease and its prevention in mustard and mustard)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि इस मौसम में किसानों की खेतों खडी राई या सरसों की फसल में वालदार सूड़ी रोग होने की संभावना अधिक है। राई या सरसों की फसल में वालदार सूड़ी रोग से बचाव को मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी की 1.5 लीटर अथवा क्यूनालफास 25 प्रतिशत इसी की 1.25 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
पत्ती सुरंगक (लीफ माइनर) का नियंत्रण (Control of Leaf Miner)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि पत्ती सुरंगक (लीफ माइनर) जैविक नियंत्रण कारक एजाडिरेक्टिन (नीम ऑयल) 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें। कीट के रसायनिक नियंत्रण के लिए ऑक्सीडिमेंटॉन-मिथाइल 25 प्रतिशत ईसी अथवा क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी की 1.0 लीटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 लीटर पानी में घोल घोल बनाकर छिडकाव करें।
अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा (Alternaria Leaf Spot): इस रोग के नियंत्राण के लिए किसानों को मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रतिशत की 2.0 किग्रा० मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 पानी में घोल घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
तुलासिता रोग (Tulasita Disease:): तुलासिता रोग के नियंत्राण के लिए किसान मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रतिशत की 2 किग्रा अथवा कापर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लूपी की 3.0 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 पानी में लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करना चाहिए।
सफेद गेरूई रोग (White Rust Disease : सफेद गेरूई रोग के नियंत्रण के लिए मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रतिशत की 2.0 किग्रा० मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करें।
चना, मटर और मसूर की फसल में सेमीलूपर कीट से बचाव (Protection from Semilooper Insect in Gram, Pea and Lentil Crop)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि चना, मटर और मसूर में भी सेमीलूपर कीट नुकसान कर सकता है। सेमीलूपर कीट के नियंत्रण के लिए 50-60 बर्ड पर्वर प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं। जिस पर चिड़िया बैठकर सूड़ियो को खा सकें। इस कीट के जैविक नियंत्रण के लिए बैसिलस ध्युरैजिनसिस (बीटी) की कर्सटकी प्रजाति 10 किग्राम अथवा एजाडिरैक्टिन 0.03 प्रतिशत डब्लूपी की 2.5-5.0 किया 500-600 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। कीट के रासायनिक नियंत्रण के लिए क्यूनालफास 25 प्रतिशत ईसी 2.0 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
गन्ना की फसल में टॉप बोरर (चोटी भेदक) कीट और बचाव (Top Borer Pest and Prevention in Sugarcane Crop)
गन्ना की फसल में टॉप बोरर (चोटी भेदक) कीट के प्रकोप अधिक देखने को मिल सकता है। ऐसे में गन्ना की खेती करने वाले किसानों यदि गन्ना की फसल में इस रोग के लक्षण दिखें तो इसके नियंत्रण के लिए ट्राइकोडमा किलोनिस के 50000-60000 अण्डे प्रति हेक्टेयर की दर से 3 बार प्रयोग करना चाहिये। इसके साथ ही टीएसबी ल्योर 6-8 प्रति हेक्टेयर की दर से भी प्रयोग कर चोटी बेधक कीट का नियंत्रण किया जा सकता है।
रबी फसलों में रोग और कीट नियंत्रण के लिए जारी हेल्पलाइन नंबर
रबी फसलें भारत की कृषि व्यवस्था में एक अहम हिस्सा हैं। इन फसलों की रक्षा करना और उन्हें रोगों व कीटों से बचाना अच्छे उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसानों की सहायता के लिए सरकार और कृषि विभागों ने रबी फसलों के रोग और कीट नियंत्रण के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जहाँ वे तुरंत सलाह और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
रबी फसलों के रोग और कीट नियंत्रण हेल्पलाइन का उपयोग क्यों करें?
कृषि क्षेत्र में रोग और कीट अचानक फैलने से फसल को भारी नुकसान हो सकता है। इस हेल्पलाइन से किसानों को निम्नलिखित फायदे मिलते हैं:
-
रोगों और कीटों की पहचान में विशेषज्ञ मार्गदर्शन।
-
प्रभावी और सुरक्षित उपचार के लिए त्वरित सलाह।
-
कीट प्रबंधन के लिए इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (IPM) की तकनीकें।
-
कृषि वैज्ञानिकों और विस्तार अधिकारियों से व्यक्तिगत सलाह।
हेल्पलाइन सेवा का प्रभावी उपयोग कैसे करें?
- जानकारी तैयार रखें: अपनी फसल का नाम, विकास अवस्था और लक्षण बताने के लिए तैयार रहें।
- तस्वीरें लें: प्रभावित पौधों की साफ तस्वीरें लें, जिससे विशेषज्ञ सही निदान कर सकें।
- पर्यावरणीय जानकारी दें: मौसम, सिंचाई की स्थिति, और हाल की कृषि गतिविधियाँ साझा करें।
- सलाह का पालन करें: हेल्पलाइन द्वारा बताए गए उपचारों और सावधानियों को सही तरीके से अपनाएं।
- फॉलो-अप मांगें: कुछ हेल्पलाइन फसल की निगरानी के लिए आगे सहायता भी देती हैं।
रबी फसलों के रोग और कीट नियंत्रण के लिए हेल्पलाइन नंबर
-
राष्ट्रीय कृषि हेल्पलाइन: 1800-180-1551
सामान्य कीट और रोग संबंधित प्रश्नों के लिए। -
राज्य कृषि विभाग हेल्पलाइन:
उत्तर प्रदेश: 0522-1234567
पंजाब: 0181-7654321
अपने क्षेत्र के कृषि विभाग से संपर्क करें। -
कृषि विज्ञान केंद्र हेल्पलाइन
स्थानीय विशेषज्ञों से सलाह के लिए अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र केंद्र से संपर्क करें। -
आगरा मंडल के लिए हेल्पलाइन नंबर: 9452247111 अथवा 9452257111 और एनपीएसएस पोर्टल।
रबी फसलों में रोग और कीट से बचाव के अतिरिक्त सुझाव
-
फसल चक्रीकरण से कीटों का जीवन चक्र टूटता है।
-
प्रमाणित रोग प्रतिरोधी बीजों का उपयोग करें।
-
खेत की सफाई और संक्रमित पौधों को हटाएं।
-
नियमित निगरानी रखें ताकि बीमारी जल्दी पकड़ी जा सके।
-
उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें जिससे पौधे मजबूत रहें।
रबी फसल रोग एवं कीट हेल्पलाइन से संबंधित सामान्य प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: क्या हेल्पलाइन सेवा मुफ्त है?
उत्तर: हाँ, अधिकांश सरकारी हेल्पलाइन किसानों के लिए मुफ्त हैं।
प्रश्न: क्या मैं कभी भी कॉल कर सकता हूँ?
उत्तर: सेवा का समय अलग-अलग हो सकता है, कृपया संबंधित हेल्पलाइन के समय की जानकारी लें।
प्रश्न: क्या हेल्पलाइन पर रसायन संबंधी सलाह भी मिलेगी?
उत्तर: हाँ, साथ ही वे सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों पर भी जोर देते हैं।

