Seed Producing Park: यूपी के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। यूपी की योगी सरकार की ओर से प्रदेश में उच्च गुणवत्ता के बीज तैयार किए जाएंगे। अभी यूपी सरकार हर साल दूसरे राज्यों से करीब 3000 हजार करोड़ रुपये के हाइब्रिड बीजों की खरीद करती है। ये बीज खास तौर से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से मंगवाए जाते हैं। यूपी में करीब 22% गेहूं, 51% धान, 74% मक्का, 95% जौ, 50% दालें और 52% तिलहन के बीज दूसरे राज्यों से मंगवाए जाते हैं। योगी सरकार ने पांच बीज पार्क (Seed Producing Park) खोलने की प्लानिंग की है। आइए, चलिए सरकार की किसानों को दी जा रही बड़ी सौगात के बारे में जानते हैं।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Seed Producing Park: केंद्र सरकार की तरह ही किसानों की आय दोगुनी करने और फसल की लागत कम करने की दिशा में यूपी की योगी सरकार (yogi government) लगातार काम कर रही है। योगी सरकार अब किसानों के हित में एक अहम कदम उठाने जा रही है। जो किसानों के साथ ही सरकार के लिए भी फायदे का सौदा साबित होगा। यूपी में सरकार अभी किसानों को दूसरे राज्यों से उत्पादित बीज उपलब्ध कराती है, लेकिन सरकार की प्लानिंग यूपी में ही अच्छे उन्नतशील बीज तैयार करके किसानों को उपलब्ध कराने की है। पांच बीज पार्क (Seed Producing Park) स्थापित किये जाएंगे। जिससे यूपी की राज्यों पर बीज की निर्भरता खत्म होगी। इसके साथ ही फसल की अच्छी पैदावार होने के साथ ही लागत भी कम आएगी। इसका सीधा लाभ सरकार और किसानों को मिलेगा। प्रदेश की प्रमुख फसलों के लिए करीब 50 फीसद बीज दक्षिण भारत के राज्यों से आता है। किसानों को प्रदेश के कृषि जलवायु के अनुकूल गुणवत्ता के बीज मिले, इसके लिए योगी सरकार ने बड़े पैमाने पर उत्तर प्रदेश में ही बीज उत्पादन की रणनीति तैयार की है।
बाहर से आते हैं 3000 करोड़ के बीज (Seeds worth Rs 3000 crore come from outside)
बता दें कि यूपी सरकार हर साल करीब तीन हजार करोड़ का बीज देश के दूसरें राज्यों से मंगवाती है। जब ये दूसरे राज्यों से बीज आता है तो प्रदेश में जिलेवार भेजा जाता है। यूपी सरकार सभी फसलों के हाइब्रिड बीज तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से मंगवाती है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक गेहूं (wheat seeds) के 22%, धान (paddy seeds) के 51%, मक्का के 74%, जौं के 95%, दलहन (pulses seeds के 50% और तिलहन के 52% बीज गैर राज्यों से आते हैं।

यूपी में बनाए जाएंगे 5 पार्क (5 parks will be built in UP)
योगी सरकार ने प्रदेश में ही बीज उत्पादन करने की एक विशेष योजना तैयार की है। इसके जिसके मुताबिक प्रदेश के नौ कृषि जलवायु क्षेत्रों में होने वाली फसलों के मद्देनजर पांच बीज पार्क बनाए जाएंगे। जो वेस्टर्न जोन, तराई जोन, सेंट्रल जोन, बुंदेलखंड और ईस्टर्न जोन में बनेंगे। ये बीज पार्क पीपीपी मॉडल पर बनाए जाएंगे। हर पार्क का रकबा न्यूनतम 200 हेक्टेयर का होगा। अभी कृषि विभाग के पास बुनियादी सुविधाओं के साथ ऐसे छह फार्म उपलब्ध हैं। इसमें से दो फार्म 200 हेक्टेयर, दो फार्म 200 से 300 और दो फार्म 400 हेक्टेयर से अधिक के हैं। अब योगी सरकार ने इसको लेकर इच्छुक पार्टियों को लीज पर देने के लिए आवेदन मांग सकती है।
सीड पार्क से मिलेगा ये लाभ (These benefits will be available from the seed park)
यूपी सरकार की मंशा सालाना करीब तीन हजार करोड़ रुपये की बचत करने की है। सरकार की योजना है कि प्लांटवार अतिरिक्त निवेश आएगा। प्लांट से लेकर लॉजिस्टिक लोडिंग, अनलोडिंग, परिवहन में स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इसमें सीड रिप्लेसमेंट दर (एसएसआर) में सुधार आएगा। इसका सीधा असर उपज पर पड़ेगा। यूपी में सबसे उर्वरा भूमि, सर्वाधिक सिंचित रकबे के बावजूद प्रति हेक्टेयर प्रति कुंतल उपज के मामले में यूपी पीछे है। सीड पार्क बनाए जाने से कई और लाभ भी मिलेंगे।
गेंहू और सरसों के उत्पादन में दूसरे राज्यों से पीछे यूपी (UP lags behind other states in wheat and mustard production)
यूपी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक गेहूं का प्रति हेक्टेयर प्रति कुंतल उत्पादन 26.75 कुंतल है, जबकि पंजाब में गेंहू का सर्वोच्च उत्पादन 40.35 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। ऐसे ही धान का उत्पादन 37.35 कुंतल प्रति हेक्टेयर है, जबकि हरियाणा में गेंहू का उत्पादन 45.33 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। ऐसे ही अन्य राज्यों की तुलना में इसी तरह से चना और सरसों के उत्पादन में भी यूपी बहुत पीछे है। उन्नतशील और उच्च गुणवत्ता के बीज से इस अंतर को 15 से 20 फीसद तक कम किया जा सकता है।
पीपीपी मॉडल पर कम 200 हेक्टेयर में बनेगा पार्क (Park will be built in at least 200 hectares on PPP model)
यूपी में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत सीड पार्क बनाए जाएंगे। एक सीड पार्क के लिए कम से कम 200 हेक्टेयर क्षेत्र होना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए बेसिक फैसिलिटीज से लैस 6 सरकारी फार्म निर्धारित किए गए हैं। जो फार्मों को इच्छुक लोगों को पट्टे पर दिया जाएगा। जिनमें से दो 200 से 300 हेक्टेयर के बीच होंगे। दो बड़े फार्म 400 हेक्टेयर से अधिक के होंगे। इस पहल से अन्य राज्यों से बीजों पर निर्भरता कम होने होने के साथ ही फसल की पैदावार में सुधार होगा।
सबसे ज्यादा खेती योग्य जमीन (Most cultivable land)
यूपी सरकार के कृषि विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में भारत में सबसे ज्यादा खेती योग्य जमीन है। प्रदेश में करीब 166 लाख हेक्टेयर है। जिसमें से 80 प्रतिशत से ज़्यादा जमीन सिंचित है। राज्य में लगभग तीन करोड़ परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत कृषि ही है।
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