Mustard Seeds: देश में अनुसंधान संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अपनी लगन और मेहनत से नई-नई रिसर्च से उन्नतशील बीज की प्रजातियां विकसित
कर रहे हैं। जिससे ही किसानों के खेत सोना उगल रहे हैं। यूपी सरकार भी किसानों को सरसों का उन्नत बीज मुफ्त में दे रही है। कृषि विभाग की इकाईयों पर
किसानों को सरसों की पीएम-32 प्रजाति की मिनी किट (पैकेट) दी जा रही हैं। किसानों को न्यूनतम दो किलोग्राम और अधिकतम चार किलोग्राम सरसों का बीज दिया
जाएगा या जा रहा है।'
आगरा, उत्तर प्रदेश
Mustard Seeds: यूपी में सरकार (Yogi Sarkar) किसानों को सरसों की अच्छी प्रजाति का बीज फ्री (Free Seeds) में दे रही है। बीज विकास निगम ने हर जिले में कृषि विभाग को सरसों के बीज की मिनी किट (पैकेट) डिमांड के हिसाब से प्रदान की हैं। प्रदेश में तहसील और ब्लाक मुख्यालय पर किसानों को सरसों के बीज का वितरण होना है। यूपी में इस बार अधिकतर जिलों में सरसों की प्रजाति पीएम-32 (PM-32) की मिनी किट वितरित की जा रही हैं। जो अच्छी क्वालिटी की सरसों की वैरायटी है। जिसकी पैदावार ही अच्छी होती है। आइए, जानते हैं सरसों की वैरायटी पीएम-32 (Mustard Variety PM-32) की बुवाई के फायदे क्या हैं ?
🌾 PM-32 सरसों की किस्म की विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| किस्म का नाम | पूसा मस्टर्ड-32 (PM-32) |
| पकने की अवधि | 140–150 दिन |
| तेल की मात्रा | लगभग 38% |
| इरुसिक एसिड की मात्रा | 1.32% (अन्य किस्मों में 40% तक) |
| औसत उपज | 25.10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर |
| रोग प्रतिरोधक क्षमता | सफेद रतुआ रोग के प्रति सहनशील |
बता दें कि बारिश की वजह से यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पंजाब में सरसों की बुवाई में देरी हो रही है। सरकार की ओर से तिलहन की खेती (oilseed cultivation) को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सरसों का फ्री बीज दिया जा रहा है। यूपी सरकार की ओर से इस बार किसानों को सरसों की पीएम-32 वैरायटी की मिनी किट दी जा रही हैं। इसके लिए बीज विकास निगम की ओर से हर जिले में डिमांड के हिसाब से सरसों की वैरायटी की मिनी किट (पैकेट) भेजी हैं।
दो और चार किलोग्राम की मिनी किट (Mini kits of two and four kg)
आगरा के जिला कृषि अधिकारी ने विनोद कुमार सिंह ने बताया कि जिले में सरसों की बीज पीएम-32 की 36800 मिनी किट आईं हैं। जिन्हें वितरित किया जा रहा है। सरसों बीज पीएम-32 की दो किलोग्राम और चार किलोग्राम की मिनी किट दी जा रही हैं। ये मिनी किट बीज विकास बोर्ड ने जिले में प्रदान की हैं। मुजफ्फरनगर के जिला कृषि अधिकारी राहुल सिंह तेवतिया ने बताया कि सरसों बीज की मिनी किट का वितरण सोमवार से शुरू होगा। गोदामों से केवल उन्हीं किसानों को बीज दिया जाएगा। जिनका विभाग में पंजीकरण हुआ हैं। ऐसे में किसान तत्काल अपना पंजीकरण करा लें। सरसों के बीज का वितरण पॉश मशीन से होगा। इसलिए, किसान अपना आधार कार्ड, रजिस्ट्रेशन नंबर और जिस मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन किया है। उसे जरूर लेकर आएं।
आगरा रीजन की जलवायु में सरसों PM-32 की होगी बंपर पैदावार (In the climate of Agra region, mustard PM-32 will have bumper yield)
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी (आगरा) के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि आगरा में लगभग 50 हजार हेक्टेयर रकबा में सरसों की फसल की बुवाई होती है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा, नई दिल्ली (Indian Agricultural Research Institute Pusa) की सरसों की वैरायटी PM-32 यहां की जलवायु के लिए उपयोगी है। सरकार की ओर से इसलिए सरसों की PM-32 वैरायटी के बीज की मिनी किट फ्री में किसानों को दी जा रही है। सरसों की PM-32 प्रजाति 140-150 दिनों की है। इसमें 38 प्रतिशत तक तेल की मात्रा पाई जाती है। PM-32 प्रजाति में सबसे कम इरुसिक एसिड पाया जाता है। इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ये प्रजाति बहुत अच्छी है।
🛠️ सरकार की योजना के मुख्य बिंदु
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मुफ्त बीज वितरण: किसानों को 2 किलोग्राम और 4 किलोग्राम के मिनी किट्स में PM-32 सरसों के बीज मुफ्त में प्रदान किए जा रहे हैं।
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पंजीकरण आवश्यक: बीज प्राप्त करने के लिए किसानों को कृषि विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
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वितरण प्रक्रिया: बीज वितरण पॉश मशीन के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
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लाभार्थी वर्ग: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों को कुल बीज किट्स का 25% हिस्सा प्रदान किया जाएगा, जबकि शेष 75% अन्य किसानों को मिलेगा।
सरसों की वैरायटी पीएम-32 में तेल की मात्रा अधिक (Mustard variety PM-32 has more oil content)
जिला कृषि अधिकारी ने विनोद कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्था पूसा, नई दिल्ली की विकसित सरसों की पूसा मस्टर्ड-32 किस्म किसानों को वितरित किया है। जो आगरा रीजन के लिए सरसों की ये अच्छी किस्म है। जिसमें सफेद रतुआ रोग की संभावना कम है। सरसों की पीएम 32 किस्म की 25 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देती है। आगरा के उपनिदेशक कृषि पुरुषोत्तम कुमार मिश्रा ने बताया कि सरसों की पीएम-32 प्रजाति की फसल 140- 150 दिन में तैयार हो जाती है। इसमें 38 प्रतिशत तेल निकलता है। इसमें इरुसिक एसिड की मात्रा 1.32 प्रतिशत है, जबकि सरसों की दूसरी सामान्य प्रजातियों में इरुसिक एसिड 40 प्रतिशत से ऊपर तक होता है। इरुसिक एसिड ही शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है। ये काली सरसों में है, जो कोलेस्ट्रॉल फ्री है।
पीएम-32 किस्म की ये भी विशेषताएं (These are also the features of PM-32 variety)
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्था (IARI) पूसा ने 2021 में सरसों की पूसा मस्टर्ड-32 पीएम 32 किस्म विकसित की थी। जिसमें सफेद रतुआ रोग लगने की संभावना बेहद कम है। जिससे ही सरसों की पैदावार अच्छी है। इस किस्म में एक फली में करीब 17 से 18 सरसों के दाने पाए जाते हैं।
🌱 PM-32 किस्म के लाभ
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उच्च गुणवत्ता वाला तेल: कम इरुसिक एसिड और अधिक तेल की मात्रा के कारण यह किस्म स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।
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बढ़ी हुई पैदावार: प्रति हेक्टेयर 25.10 क्विंटल तक की उपज संभव है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता: सफेद रतुआ रोग के प्रति सहनशीलता के कारण फसल की सुरक्षा बढ़ती है।
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स्वास्थ्य के लिए लाभकारी: कम इरुसिक एसिड की मात्रा के कारण यह तेल हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।
- पूसा मस्टर्ड-32 किस्म में इरुसिक एसिड की मात्रा बहुत कम होने से इसका तेल उपयोग करने से हृदय रोग का खतरा कम रहता है।
- पीएम 32 के बीज से निकलने वाले तेल में झाग कम बनता है. जिससे ही ये तेल बेहतर क्वालिटी का होता है।
- पीएम 32 किस्म से किसान का 10 क्विंटल तक अधिक उत्पादन बढ़ेगा। जिससे किसानों का लाभ भी बढ़ जाएगा।
- पीएम 32 किस्म से किसानों को प्रति हैक्टेयर करीब 1.16 लाख रुपए की कमाई हो सकती है।
- पीएम 32 में ग्लूकोसिनोलेट की मात्रा बहुत कम है। यदि मात्रा में देखें तो 30 माइक्रोमोल से भी कम है। जबकि सामान्य सरसों में इसकी मात्रा 120 माइक्रोमोल होती है।
यूं करें सरसों की बुवाई से पहले खेत की तैयारी (prepare the field before sowing mustard)
- खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें।
- खेत की अंतिम जुताई के समय देसी खाद डालकर मिलाएं।
- खेत की जुताई और पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लें।
- खेत में पानी का जमाव न हो। इसका इंतजाम करें।
- खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिए उचित इंतजाम करें।
- दीमक की समस्या होने पर बुवाई से पहले एन्डोसल्फ़ॉन 4% या क्यूनालफ़ॉस 1.5% कीटनाशक पाउडर की 25 किलोग्राम मात्रा प्रति हैक्टेयर के हिसाब से खेत की भूमि में मिलाएं।
सरसों की बुवाई का सही समय (Right time for sowing mustard)
उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पंजाब में सरसों की बुवाई का उचित समय सरसों की किस्म के हिसाब से सितंबर मध्य से लेकर अक्टूबर अंत तक का होता है। कहें तो सरसों की बुवाई 25 सितंबर से 15 अक्टूबर और सिंचित क्षेत्रों में 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच करनी चाहिए।
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बुवाई का समय: सितंबर मध्य से अक्टूबर अंत तक।
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खेत की तैयारी:
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पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें।
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अंतिम जुताई के समय जैविक खाद मिलाएं।
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खेत में पानी का जमाव न हो, इसका ध्यान रखें।
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दीमक नियंत्रण के लिए उचित कीटनाशकों का प्रयोग करें।
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FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q: सरसों का बीज (mustard seed) कितने दिन में अंकुरित हो जाता है?
A: सरसों की बुवाई के बाद यदि मौसम सही रहता है तो सरसों के बीज 4 से 14 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं।
Q: सरसों की उन्नत किस्म पूसा मस्टर्ड-32 (PM-32) की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
A: पूसा मस्टर्ड-32 किस्म की अवधि 140-150 दिन है, इसमें लगभग 38% तेल की मात्रा होती है। सरसों की यह किस्म सफेद रतुआ रोग के प्रति सहनशील होती है।
Q: सरसों की किस किस्म में इरुसिक एसिड की मात्रा कम होती ?
A: सरसों की किस्म PM-32 में इरुसिक एसिड की मात्रा मात्र 1.32% होती है, जबकि अन्य किस्मों में यह 40% तक हो सकती है।
Q: यूपी में किसानों को पीएम-32 किस्म का बीज कहां से मिलेगा?
A: यूपी सरकार ने कृषि विभाग के माध्यम से किसानों को मुफ्त में सरसों की उन्नत किस्म पीएम 32 की मिनी किट (2 या 4 किग्रा) उपलब्ध करवा रही है। वितरण ब्लॉक व तहसील स्तर पर किया जा रहा है।
Q: PM-32 किस्म की किसन रीजन के लिए बेहतर है और औसत उपज कितनी होती है?
A: कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार आगरा जैसी जलवायु वाले रीजन में सरसों की यह किस्म अच्छी पैदावार देती है। सरसों की इस किस्म की औसत उपज 25.10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो पारंपरिक किस्मों से कहीं अधिक है।
Q: सरसों की किस्म PM-32 किस्म के तेल की गुणवत्ता कैसी है?
A: इस सरसों की किस्म में झाग कम बनता है, इरुसिक एसिड कम है। जो हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।
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Nice; information to mustard crop
किसान शिक्षको दिल सैल्यूट