Stubble Burning: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार ने पराली जलाने पर जुर्माना राशि 30,000 रुपए तक कर दी है। प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों को पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और CAQM की ओर से नियंत्रित किया जाएगा। जिसमें जांच करने और शिकायतों के समाधान के लिए साफ दिशा निर्देश होंगे।
Stubble Burning: दिल्ली और एनसीआर के साथ ही देश के तमाम हिस्से में प्रदूषण से लोग परेशान हैं। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की सख्ती के बाद केंद्र सरकार (Central Government) ने भी पराली जलाने (Stubble Burning) वाले किसानों पर जुर्माना दोगुना कर दिया है। इस बारे में पर्यावरण मंत्रालय (Environment Ministry) ने गुरुवार को एक नोटिफिकेशन (Notification) जारी करके पराली जलाने पर जुर्माना 30 हजार रुपये तक करने की जानकारी दी।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की सख्ती पर पर्यावरण मंत्रालय ने जो नोटिफिकेशन जारी किया गया है। केंद्र सरकार ने अब 2 एकड़ से कम जमीन पर 5000 रुपए का जुर्माना वसूली जाएगा। इसके साथ ही दो से पांच एकड़ तक जमीन में पराली जलाने पर 10,000 रुपए और पांच एकड़ से ज्यादा जमीन वालों से 30,000 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और केंद्र सरकार के आदेश से अब उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सरकारों को इन नियमों को लागू करने होंगे।

पंजाब-हरियाणा 14 नवंबर तक जवाब दाखिल करें (Punjab-Haryana should file their reply )
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में 4 नवंबर को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट में पराली पर पंजाब-हरियाणा से 14 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा था। इससे पहले 23 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को लेकर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA) के तहत नियम बनाने और जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति करने के लिए केंद्र सरकार को दो हफ्ते का समय दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सख्त आदेश के लिए मजबूर ना करें (Supreme Court said that do not force for strict orders)
बता दें कि 23 अक्टूबर 2024 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार की कार्रवाई में संतुष्ट नहीं था। कोर्ट ने कहा कि हमें सख्त आदेश देने के लिए मजबूर ना करें। जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस ए अमानुल्लाह और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने पंजाब और हरियाणा सरकार की खेतों में पराली जलाने से रोकने की कोशिशें महज दिखावा हो रही हैं।
नागरिकों का मौलिक अधिकार स्वच्छ वातावरण (Clean environment is the fundamental right of citizens)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर ये सरकारें वास्तव में कानून लागू करने में रुचि रखती हैं। कम से कम एक केस तो चलना ही चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकारों को याद दिलाया जाए। जो प्रदूषण हो रहा है। उस ओर ध्यान दें। क्योंकि, प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। प्रदूषण में रहना अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। इसलिए, इस ओर ध्यान दें। सख्ती बरत कर पराली जलाने पर रोक लगाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को 2 बातें कहीं थीं (upreme Court had said 2 things to the Haryana government)
- हरियाणा में फसल जलाने की 400 घटनाएं हुई हैं और राज्य ने 32 FIR दर्ज की हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव से कहा कि प्रदेश में पराली जलाने के आंकड़े हर मिनट बदल रहे हैं। सरकार पिक एंड चूज कर रही है। कुछ ही लोगों से जुर्माना लिया जा रहा है। FIR दर्ज करने और कुछ पर मामूली जुर्माना लगाने को सख्मी बरतें।
- सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव से पूछा था कि पराली को लेकर क्या किया जा रहा है और क्या किसानों को कुछ दिया गया? इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि पराली निस्तारण के लिए करीब 1 लाख मशीनें दी गई हैं, जिससे पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं।
सुप्रीम कोर्ट की पंजाब सरकार को कही 4 अहम बातें (4 important things said by the Supreme Court to the Punjab government)
- प्रदेश में पराली जलाने की 1,080 FIR दर्ज हैं, लेकिन केवल 473 लोगों से नाममात्र जुर्माना वसूला है। आपने 600 या अधिक लोगों को क्यों बख्शा है।
- सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट जनरल से पूछा कि बताएं कि किस अधिकारी के कहने पर उन्होंने केंद्र से मशीनें और फंड मांगने का झूठा बयान दिया था। मुख्य सचिव बताएं कि एडवोकेट जनरल को ऐसा किस अधिकारी ने करने के लिए कहा। हम उसे अवमानना का नोटिस जारी करेंगे।
- सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि एफिडेविट में गांव स्तर पर निगरानी कमेटी की बात कही गई है। सरकार ने कब आदेश दिया। कमेटी कब बनी। इसका नोडल अफसर कौन है? इस पर एडवोकेट सिंघवी ने कहा कि 9 हजार कमेटियां बनी हैं। हम पूरे ब्योरे के साथ एफिडेविट दाखिल करेंगे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 9 हजार लोगों ने सिर्फ 9 घटनाएं ढूंढ़ीं?
- सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई, कहा कि ISRO की सैटेलाइट रिपोर्ट तक झुठला देते हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के वकील ने कहा कि अमृतसर में 400 घटनाएं हुई हैं। कोर्ट ने पूछा कि हाल के दिनों में कितनी घटनाएं हुई हैं। इस पर एडवोकेट सिंघवी ने कहा कि 1510 घटनाएं हुईं और 1,080 केस दर्ज किए गए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें भी आपने 400 लोगों को छोड़ दिया।
पराली जलाने से रोकने को हरियाणा और पंजाब सरकार ने क्या कार्रवाई की (What action did Haryana and Punjab government take to stop stubble burning)
हरियाणा सरकार के 3 बड़े दावे (3 big claims of Haryana government)
- हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा है कि राज्य में करीब 150 किसानों के खिलाफ अब तक FIR दर्ज हो चुकी है। इसमें 29 लोगों को गिरफ्तार और 380 को रेड लिस्ट किया गया है। पिछले 24 घंटे की बात करें तो कुरुक्षेत्र में 46, जींद में 10, सिरसा में 3, फतेहाबाद में 2 किसानों पर FIR दर्ज की गई है। वहीं सिरसा में 3 महिला किसानों पर केस दर्ज किया है।
- हरियाणा सरकार ने कृषि विभाग के 24 अधिकारी और कर्मचारी सस्पेंड किए एक दिन पहले कृषि विभाग ने 24 अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्पेंड किया। इन अधिकारियों में एग्रीकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर (ADO) से लेकर एग्रीकल्चर सुपरवाइजर के अलावा कर्मचारी भी शामिल हैं। कृषि विभाग के डायरेक्टर राज नारायण कौशिक की तरफ से 9 जिलों के अधिकारियों पर एक्शन लिया गया है।
- हरियाणा में 3 साल में आधे से भी कम मामले हो गए हैं। 2021 में प्रदेश में 15 सितंबर से अभी तक पराली जलाने के 1,508 के मामले दर्ज किए गए थे। उसके बाद 2022 में 893 और 2023 में 714 मामले दर्ज हुए थे। मगर अब 2024 में यह आंकड़ा 665 पर रुका है। सरकार की तरफ से इस आंकड़े को कम करने के लिए लगातार छापे भी मारे जा रहे हैं।
पंजाब सरकार का दावा (Claim of Punjab Government)
पंजाब पुलिस के स्पेशल DGP (कानून एवं व्यवस्था) अर्पित शुक्ला का कहना है कि पराली जलाने के मामलों में पुलिस की तरफ से अब तक 874 केस दर्ज किए गए हैं। 10.55 लाख का जुर्माना लगाया गया है। 394 किसानों के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। लोगों पर केवल कार्रवाई नहीं की जा रही, बल्कि उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है, ताकि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
Leave a comment