Potato Farming: 'कहावत है कि आलू किसानों को राजा बनाता है या रंक। फसल की अच्छी पैदावार और उसका अच्छा भाव बहुत जरूरी है। भले ही भाव थोड़ा कम हो, लेकिन फसल की अच्छी पैदावार है तो किसान रंक होने से बच सकते हैं। इसलिए किसान बीज का चयन जल्दबाजी या किसी के बहकावे में आकर न करें। उद्यान विभाग अच्छी पैदावार देने वाली वैरायटी किसानों को देता है। सरकार तय करती है कि प्रदेश के किस जिले में आलू की कौन सी वैरायटी किसानों को दी जाएं, जिससे उन्हें अच्छी पैदावार मिल सके।
आगरा, उत्तर प्रदेश
Potato Farming: सब्जियों के राजा आलू की फसल (Potato Crop) रबी सीजन (Rabi Season) में सबसे महंगी और रिस्क वाली मानी जाती है। किसान आलू की फसल की तैयारी में जुटे हैं। 20 से 25 अक्टूबर के आसपास किसान आलू की बुवाई शुरू कर देंगे। किसानों का खाद और बीज (fertilizers and seeds) पर पूरा ध्यान है। जहां एक तरफ कुछ किसानों ने आलू का बीज कोल्डस्टोर से निकलना शुरू कर दिया है तो वहीं दूसरी तरफ उद्यान विभाग (Horticulture Department) ने किसानों (Farmers) को आलू का बीज (Potato Seeds) बांटना शुरू कर दिया है।
बात करें आगरा जनपद (Agra district) की तो यहां अभी आलू की पांच वैरायटी आईं हैं, जिनमें कुफरी बहार (Kufri Bahar), कुफरी ख्याति (Kufri Khyati), कुफरी सूर्या (Kufri Surya) , कुफरी नीलकंठ (Kufri Neelkanth) और कुफरी गंगा (Kufri Ganga) शामिल हैं। आलू की ये वैरायटी बंपर पैदावार देती हैं। किसानों को कम लागत में ज्यादा पैदावार मिलती है। किसानों को सब्सिडी के साथ आलू का बीज दिया जा रहा है। आलू की ये वैरायटी F-1, F-2 बीज के रूप में हैं।

उद्यान विभाग (Horticulture Department) में बीज वितरण का कार्य देख रहे संजीव यादव (Sanjeev Yadav) का कहना है कि अभी लगभग 1500 पैकेट आलू का बीज आया है। बाकी बीज भी आने वाला है। किसानों को आवेदन के अनुसार सूचीबद्ध किया गया है। शासन के निर्देश और नियम के अनुसार किसानों को आलू का बीज वितरण किया जा रहा है। मौके परी किसानों को वैरायटी से जुड़ी जानकारियां भी दी जा रही हैं। अभी पहले खेप में आगरा को कुफरी बहार, कुफरी ख्याति, कुफरी नीलकंठ, कुफरी सूर्या और कुफरी गंगा आलू का बीज मिला है।

आईसीएआर-सीपीआरआई, शिमला द्वारा विकसित आलू की वैरायटी (Potato variety developed by ICAR-CPRI, Shimla)
रिलीज का वर्ष: 1980
उपज: 30-35 टन/हेक्टेयर
अनुकूलता: उत्तर भारतीय मैदान
परिपक्वता: मध्यम
विशेष गुण: पिछेती झुलसा रोग के प्रति संवेदनशील।
कुफरी नीलकंठ (Kufri Neelkanth)
रिलीज का वर्ष: 2018
उपज: 35-40 टन/हेक्टेयर
अनुकूलता: उत्तर भारतीय मैदान
उद्देश्य: भोजन योग्य
परिपक्वता: मध्यम
विशेष गुण: पिछेती झुलसा प्रतिरोधी, एंटीऑक्सीडेंट (एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड) से भरपूर, उत्कृष्ट स्वाद और विशेष आलू है।
रिलीज का वर्ष: 2018
उपज: 35-40 टन/हेक्टेयर
अनुकूलता: उत्तर भारतीय मैदान
उद्देश्य: भोजन के रूप में खाने योग्य
परिपक्वता: मध्यम
विशेष गुण: पिछेती झुलसा रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोधी और मध्यम से मध्यम सूखे की स्थिति के प्रति सहनशील।
कुफरी ख्याति (Kufri Khyaati)
रिलीज का वर्ष: 2008
उपज: 25-30 टन/हेक्टेयर
अनुकूलता: उत्तर भारतीय मैदान
उद्देश्य: भोजन योग
परिपक्वता: जल्दी
विशेष गुण: पिछेती झुलसा और अगेती झुलसा के लिए प्रतिरोधी। अगेती झुलसा और अधिक के लिए उपयुक्त फसल की सघनता।
कुफरी सूर्या (Kufri Surya)
रिलीज का वर्ष: 2006
उपज: 25-30 टन/हेक्टेयर
अनुकूलनशीलता: उत्तर भारतीय मैदान और पठार
उद्देश्य: प्रसंस्करण
परिपक्वता: जल्दी
विशेष गुण: पिछेती झुलसा के प्रति संवेदनशील, गर्मी और हॉपर की जलन के प्रति सहनशील और उपयुक्त शीघ्र रोपण।

Potato Farming: स्वस्थ एवं रोग मुक्त बीज का ही चुनाव करें (Choose only healthy and disease free seeds)
कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी, आगरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान क्या कहना है कि आलू बीज का चयन आलू की फसल का सबसे महत्वपूर्ण कदम है। स्वस्थ आलू बीज ही हमारी उच्च गुणवत्ता का उत्पादन सुनिश्चित करता है। हमारी कोई भी प्रबंधन तकनीक, विधि ऐसी नहीं है जो खराब आलू बीज की क्षतिपूर्ति कर दे। ये बात समझ लें कि गुणवत्तायुक्त फसल की शुरूआत अच्छे आलू बीज से करें। इसलिए आप शारीरिक रूप से स्वस्थ एवं रोग मुक्त बीज का ही चुनाव करें।
आलू के लिए खाद एवं उर्वरक (Manure and Fertilizer for Potato)
फसल की बुवाई के एक माह पूर्व 25 से 35 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद खेत में डालनी चाहिए। जहां तक संभव हो सके मृदा परीक्षण के आधार पर ही रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करें।आलू में रासायनिक उर्वरकों की संतुत मात्रा चार्ट अनुसार प्रयोग करनी चाहिए। इसमें नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय व शेष आधी मात्रा बुवाई के 30 से 35 दिन बाद इस्तेमाल करनी चाहिए।

आलू के कंदों की मात्रा व उपचार (Quantity and treatment of potato tubers)
बुवाई के लिए रोग प्रमाणित स्वस्थ कंद ही उपयोग में लेने चाहिए। सिकुड़े हुए या सूखे कन्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कंद कम से कम 2.5 सेन्टीमीटर व्यास के आकार का या 25 से 35 ग्राम साबूत कंद होने चाहिए। विभिन्न परिस्थितियों में एक हेक्टेयर खेत में बुवाई के लिए लगभग 25 से 30 क्विंटल आलू बीज की आवश्यकता होती है। बुवाई से पूर्व कंदों को स्ट्रेप्टोसाइकिल 0.1 प्रतिशत अथवा कार्बनडाजिम 0.1 प्रतिशत के घोल से उपचारित करना जरूरी है।

आलू की बुवाई का सही समय (Right time for sowing potatoes)
आलू की फसल अक्टूबर के अन्तिम सप्ताह तक बुवाई कर देनी चाहिए। बुवाई के समय मौसम हल्का ठण्डा होना चाहिए।
खेत की तैयारी एवं भूमि उपचार (Preparation of field and land treatment)
आलू की फसल के लिए खेत की जुताई (plowed) बहुत अच्छी तरह होनी चाहिए। एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल (cultivator) से, फिर दो-तीन बार कल्टीवेटर (cultivator) से जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी कर लेना चाहिए। प्रत्येक जुताई के बाद पाटा लगाएं, जिससे खेत में ढेले न रहें। मृदा उपचार के लिए अन्तिम जुताई के समय क्यूनॉलफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से खेत में डालें, जिससे भूमिगत कीटों से फसल की सुरक्षा हो सके।
कन्दों की तैयारी (Preparation of tubers)
भण्डारित आलू को लगभग एक सप्ताह पूर्व कोल्डस्टोर से निकाल कर सामान्य ठन्डे स्थान पर रखना चाहिए। कोल्डस्टोरेज से लाये गए आलू के बीज को धूप में न रखें। न ही तुरन्त बुवाई के लिए प्रयोग में लाएं, अन्यथा बाहरी तापमान की अधिकता की वजह से आलू के सड़ने का खतरा बना रहता है। जिन कन्दों पर अंकुरित प्रस्फुट न दिखाई दे उन्हें हटा देना चाहिए। बुवाई से पूर्व इसे 24 से 48 घंटे तक हवादार, छाया युक्त स्थान में फैलाकर रखें।
आलू की बुवाई से पहले ये बातें रखें ध्यान (Keep these things in mind before sowing potatoes)
- आलू की बुवाई से पहले खेत की अच्छे से जुताई करके भुरभुरा बना लें।
- खेत में गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद डालकर मिट्टी को उपजाऊ बनाएं।
- मिट्टी परीक्षण के आधार पर खेती में जरूरी उर्वरकों का इस्तेमाल करें।
- आलू की खेती को रोग प्रतिरोधी व अच्छी पैदावार देने वाली किस्में चुनें।
- आलू के बीजों को बुवाई से पहले दो से तीन दिन तक धूप में जरूर रखें।
- आलू के बीज की बुवाई के समय कतारों में 60-75 सेंटीमीटर की दूरी रखें।
- आलू की बुवाई में कतारों में बीजों के बीच 20-25 सेंटीमीटर की दूरी रखें।
- आलू की बुवाई के बाद जमीन में आलू बीज को 5-7 सेंटीमीटर गहराई में बोएं।
- आलू की बुवाई के बाद खेत की जरूरी और नियमित रूप से सिंचाई करें।
- आलू की कटाई तब करें जब आलू की पत्तियां पीली हो जाएं और गिरने लगें।
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