Potato Farming:सीपीआरआई की प्रजाति कुफरी ख्याति अगेती फसल की बुवाई के लिए बेतहरीन है। जो आलू की पैदावार में कई अन्य प्रजातियों की तुलना में अच्छी है।
जिससे किसानों की आमदनी बढ़ी है। उत्तर प्रदेश में दूसरे प्रदेशों के मुकाबले सबसे ज्यादा कुफरी ख्याति आलू की बुवाई होती है। जिससे रकबा हर साल बढ़ रहा है।
लखनऊ/आगरा, उत्तर प्रदेश Potato Farming: आलू की प्रजाति कुफरी ख्याति (Kufri Khyati) ज्यादा पैदावार देने वाली और जल्दी पकने वाली है। जो एक सफेद कंद वाली आलू की किस्म है, जो देर से होने वाले तुषार (पाला) के प्रति मध्यम प्रतिरोध रखती है। आलू की यह प्रजाति मैदानी इलाकों में खेती (Cultivation) के लिए अच्छी है। जो अन्य आलू की जल्दी पकने वाली प्रजातियों की तुलना में अधिक पैदावार दे रही है। जिसकी एक महत्वपूर्ण विशेषता देर से होने वाले तुषार के प्रति मध्यम प्रतिरोध होता है। आलू की यह प्रजाति 60-75 दिन में तैयार हो जाती है। कुफरी ख्याति की खेती बात करें तो राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में खूब की जाती है। यह प्रजाति जल्दी पकने वाली अन्य प्रजाति कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी जवाहर, कुफरी अशोक और कुफरी पुखराज के लिए एक अच्छा प्रतिस्थापन होने की संभावना है।
✅ कुफरी ख्याति की मुख्य विशेषताएं (Main Features of Kufri Khyaati)
रिलीज का वर्ष: 2008
विकास संस्थान: केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI), शिमला
परिपक्वता अवधि: सिर्फ 70-80 दिन में फसल तैयार हो जाती है
कंद का आकार: मध्यम से बड़ा, अंडाकार
उपज: 25-30 टन/हेक्टेयर, 35-40 टन/हेक्टेयर
भंडारण क्षमता: मध्यम से अच्छी
अनुकूलता: उत्तर भारतीय मैदान
सूखा पदार्थ (Dry Matter): 18-20% (अच्छी प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त)
उद्देश्य: भोजन योग
प्रोसेसिंग योग्यता: चिप्स और फ्रेंच फ्राइज बनाने के लिए आदर्श
विशेष गुण: पिछेती झुलसा और अगेती झुलसा के लिए प्रतिरोधी। अगेती झुलसा और अधिक के लिए उपयुक्त फसल की सघनता।
कुफरी ख्याति की खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्र
कुफरी ख्याति को भारत के लगभग सभी आलू उत्पादक राज्यों में उगाया जा सकता है, विशेष रूप से:
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उत्तर प्रदेश
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पंजाब
- हरियाणा
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बिहार
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मध्य प्रदेश
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पश्चिम बंगाल
बुवाई का समय और तरीका
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बुवाई का समय: अक्टूबर के मध्य से नवंबर तक इसका सबसे उपयुक्त समय है।
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बीज की मात्रा: प्रति हेक्टेयर करीब 20 से 25 क्विंटल बीज की आवश्यकता होती है।
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खेत की तैयारी: खेत को अच्छी तरह जोतकर भुरभुरा बनाया जाए। अंतिम जुताई के समय अच्छी मात्रा में सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए।
Potato Farming: 400 क्विंटल तक देती है पैदावार
आलू की प्रजाति कुफरी ख्याति अगेती बुवाई करने पर 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार दे सकती है। मुख्य फसल के रूप में इस प्रजाति की बुवाई करके किसान 350 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार ले सकते हैं।
📈 कुफरी ख्याति की बाजार में मांग
कुफरी ख्याति आलू की खासियत यह है कि यह प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए भी उपयुक्त है। इसलिए इसकी मांग होटल, प्रोसेसिंग यूनिट्स और थोक बाजारों में अधिक रहती है। यह किस्म भंडारण में भी अच्छी रहती है, जिससे किसानों को लंबे समय तक बिक्री का मौका मिलता है।
अगेती और पिछेती झुलसा प्रतिरोधी क्षमता (Resistant to early and late blight)
आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि कुफरी ख्याति अगेती और पिछेती में झुलसा रोग प्रतिरोधी क्षमता है। इस प्रजाति में आलू बनने की प्रक्रिया जल्दी शुरू होती है। झुलसा और तुषार (पाला) का असर ज्यादा नहीं होता है, इसलिए पौधे काफी दिनों तक स्वस्थ रहते हैं। ऐसा होने से फसल की पैदावार बहुत अच्छी होती है।
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लेट ब्लाइट (Late Blight): सहनशील
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स्कैब रोग: सहनशील
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रोग प्रतिरोधक होने के कारण इसमें कीटनाशक खर्च कम होता है।
कुफरी ख्याति की सिंचाई और देखभाल
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पहली सिंचाई बुवाई के 7 दिन बाद।
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दूसरी सिंचाई 15-20 दिन बाद।
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आलू की फसल में पानी का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, खासकर कंद बनने की अवस्था में।
आलू में कौन सा तत्व कितना कितना (Which element is present in how much quantity in potato)
आलू में मुख्य रूप से 80-82 प्रतिशत पानी होता है। इसके अलावा 14 प्रतिशत स्टार्च, 2 प्रतिशत चीनी, 2 प्रतिशत प्रोटीन, 1 प्रतिशत खनिज लवण वसा 0.1 प्रतिशत और थोड़ी मात्रा में विटामिन्स भी होते हैं।
आलू की उन्नत खेती के लिए जलवायु और तापमान (Climate and temperature for advanced cultivation of potato)
आलू समशीतोष्ण जलवायु की फसल है। जबकि उत्तर प्रदेश में इसकी खेती उपोष्णीय जलवायु की दशाओं में रबी के सीजन में की जाती है। सामान्य रूप से आलू की अच्छी खेती के लिए फसल अवधि के दौरान दिन का तापमान 25-30 डिग्री सेल्सियस और रात्रि का तापमान 4-15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। फसल में कन्द बनते समय लगभग 18-20 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अच्छा होता है। कन्द बनने के पहले कुछ अधिक तापमान रहने पर फसल की वानस्पतिक वृद्धि अच्छी होती है, लेकिन कन्द बनने के समय अधिक तापमान होने पर कन्द बनना रुक जाता है। लगभग 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान होने पर आलू की फसल में कन्द बनना बिल्कुल बन्द हो जाता है।
भूमि एवं भूमि प्रबन्ध (Land and Land Management)
आलू की फसल के लिए मृदा का पीएच मान 6 से 8 के मध्य होना चाहिए। बलुई दोमट और दोमट मिट्टी उचित जल निकास की उपयुक्त होती है। 3-4 जुताई डिस्क हैरो या कल्टीवेटर से करें। प्रत्येक जुताई के बाद पाटा लगाने से ढेले टूट जाते हैं। नमी सुरक्षित रहती है। वर्तमान में रोटावेटर से भी खेत की तैयारी शीघ्र व अच्छी हो जाती है। आलू की अच्छी फसल के लिए बुवाई से पहले पलेवा करना चाहिए।
कार्बनिक खाद के फायदे (Benefits of organic manure)
खेत में यदि हरी खाद का प्रयोग न किया हो तो 15-30 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी गोबर की खाद का प्रयोग करने से जीवांश पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है, जो कन्दों की पैदावार बढ़ाने में सहायक होती है।
उर्वरक प्रबंधन
| उर्वरक | मात्रा (प्रति हेक्टेयर) |
|---|---|
| नाइट्रोजन (N) | 120 किग्रा |
| फास्फोरस (P) | 60 किग्रा |
| पोटाश (K) | 60 किग्रा |
( Note: यह मात्रा फसल के विकास और उपज बढ़ाने के लिए संतुलित मानी जाती है।)
Q: आलू का बीज उपचारित कैसे तैयार करें ? (How to prepare potato seeds?)
A: आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि आलू की बुवाई से पहले बीज का उपचार जरूर करना चाहिए। आलू का बीज उपचार करके उसे बीमारियों से बचाया जा सकता है। इसके लिए बोरिक एसिड (Boric Acid) और टाईक्रोडर्मा (Trichoderma) का उपयोग कर सकते हैं। आलू के बीजों का उपचार करने के लिए बोरिक एसिड और ट्राइकोडर्मा का इस्तेमाल करना चाहिए। आलू के बीजों का उपचार करने के लिए तीन प्रतिशत बोरिक एसिड का इस्तेमाल करें। इसके साथ ही ट्राइकोडर्मा से आलू के बीज का उपचार करने के लिए 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा को एक लीटर पानी में घोलें। इस घोल में आलू को डुबाकर रखें। इसके बाद बीजों को छाया में आधा घंटा रखने के बाद बुआई करें। बीजों का उपचार करने के लिए इन तरीकों का भी इस्तेमाल किया जा सकते हैं। आलू का बीज उपचारित करने से बीज जनित या मिट्टी जनित रोगजनक जीवों और भंडारण कीटों से बचाया जा सकता है।
Q: आलू की कितनी प्रजातियां होती हैं? (How many varieties of potatoes are there?)
A: आलू की बात करें तो दर्जनों प्रजाति हैं। आलू की प्रजाति की बात करें तो सात प्रकारों में से एक में आती है। रसेट, लाल, सफ़ेद, पीला, नीला/बैंगनी, फिंगरलिंग और पेटाइट।
Q: आलू की उत्तम किस्म क्या है? (What is the best variety of potato?)
A: यदि आप आलू की खेती करना चाहते हैं तो आलू की उन्नत किस्मों की बुवाई करें। आलू की उन्नत किस्मों में कुफरी बहार, कुफरी पुखराज किस्म, कुफरी सिंदूरी किस्म, कुफरी चिप्सोना, कुफरी अलंकार और कुफरी नीलकंठ समेत अन्य शामिल हैं। आलू की इन उन्नतशील किस्मों की खेती करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
Q: आलू कौन से महीने में बोए जाते हैं? (In which month are potatoes sown?)
A: भारत की बात करें तो आलू की फसल की अगेती किस्मों की बुवाई 15 सितम्बर के आस पास की जाती है। इसके साथ ही देखा जाए तो देश में आलू की मुख्य फसल की बुवाई के लिए 15-25 अक्टूबर का समय उचित रहता है।
Q: सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली आलू कौन सी है? (Which is the highest yielding potato?)
A: देश में आलू की उन्नतशीन प्रजातियों की भरमार है। यदि हम क्षेत्र के हिसाब से पैदावार की बात करें तो सबसे अधिक पैदावार देने वाली आलू की टॉप 5 किस्में (Top 5 Potato Variety) ये हैं। जिसमें आलू की कुफरी बहार किस्म, आलू की कुफरी पुखराज किस्म,आलू की कुफरी चिप्सोना किस्म,आलू की कुफरी अलंकार किस्म,आलू की कुफरी नीलकंठ किस्म,आलू की कुफरी सिंदूरी किस्म समेत अन्य प्रजाति हैं।