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National Goat Mahakumbh: PM Modi के मंत्री ने बकरी बताई एक ATM; चौंके लोग तो दिया गजब तर्क

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National Goat Mahakumbh: पशुपालन एवं डेयरी विभाग और केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान की ओर से मथुरा में सोमवार को देश का पहला राष्ट्रीय बकरी महाकुंभ आयोजित हुआ। जिसमें बकरी पालन, बकरी के दूध समेत अन्य तमाम उत्पाद की जानकारी दी गई।

मथुरा, उत्तर प्रदेश

National Goat Mahakumbh: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में फरह के पास मखदूम स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (Central Goat Research Institute) में सोमवार को देश का पहला राष्ट्रीय बकरी महाकुंभ (National Goat Mahakumbh) हुआ। ये महाकुंभ पशुपालन एवं डेयरी विभाग (Department of Animal Husbandry and Dairy) के सहयोग से हुआ है। National Goat Mahakumbh में कृषि-औद्योगिक प्रदर्शनी भी लगाई गई। National Goat Mahakumbh में मुख्य अतिथि केन्द्रीय मंत्री मत्स्य, पशुपालन, डेयरी एवं पंचायतीराज मंत्रालय एसपी सिंह बघेल ने कहा कि हकीकत ये है कि बकरी आज के समय का एटीएम यानी एनी टाइम मनी, एनी टाइम मिल्क, एनी टाइम मीट है। इसलिए, इस ओर ध्यान दें। कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि अरुणाचल प्रदेश के कृषि, पशु चिकित्सा, बागवानी एवं मत्स्य पालन मंत्री गेब्रियल डीवांगसु रहे.

बकरी पालन समेत अन्य जानकारी दी गईं (Other information including goat rearing was given)
(Photo Credit: Kisan Voice)

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बता दें​ कि देश के पहले राष्ट्रीय बकरी महाकुंभ (CIRG Mathura) में मथुरा, आसपास के जिलों के साथ ही देश के 18 राज्यों से बकरी पालक (Goat Rearers), पशु पालक (Animal Breeders), किसान (Farmers), वैज्ञानिक (Scientists), शोधकर्ता (Researchers), छात्र (, Students), शिक्षण संस्थान (Educational Institutions) और कृषि उद्यमी (Agricultural Entrepreneurs) शामिल हुए। जिन्होंने राष्ट्रीय बकरी महाकुंभ में लगी अलग अलग विभाग की स्टॉल्स से तमाम जानकारी लीं। राष्ट्रीय बकरी महाकुंभ में आने वाले बकरी पालकों को बेहतरीन नस्ल की बकरियां और वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन की जानकारी भी दी गई।

National Goat Mahakumbh: वैज्ञानिकों की भी मानें किसान (Farmers should also listen to scientists)
(Photo Credit: Kisan Voice)
National Goat Mahakumbh: वैज्ञानिकों की भी मानें किसान (Farmers should also listen to scientists)

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि देश में पहली बार आयोजित राष्ट्रीय बकरी महाकुंभ में सहभागिता करने का मुझे अवसर प्राप्त हुआ है। भारत अब पशुपालकों का भी है, देश की तरक्की का रास्ता खेती-खलिहानी के साथ-साथ पशुपालन से होकर भी जाता है। भारत का किसान वैज्ञानिकों को मानता है। लेकिन, वैज्ञानिकों की नहीं मानता है। देश के किसानों को वैज्ञानिक खेती, उन्नत खेती एवं उन्नत पशुपालन का रूख करना पड़ेगा। जो कि आय दोगुना करने में सहायक सिद्ध होगा। बकरी आज के समय का एटीएम यानी एनी टाइम मनी, एनी टाइम मिल्क, एनी टाइम मीट। इसी के साथ ही उन्होंने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए संस्थान के शोध एव अनुसंधान कार्यों की भी प्रसंशा की।

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National Goat Mahakumbh में ये अतिथि रहे मौजूद

National Goat Mahakumbh में विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. राघवेन्द्र भट्टा, आयुक्त, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार डॉ. अभिजीत मित्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के एडीजी डॉ. एके गौर, मथुरा डीएम शैलेन्द्र सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेष पांडे उपस्थिति रहे। इसके साथ ही विभिन्न आईसीएआर संस्थानों के निदेशक, पूर्व निदेशक, संस्थान के पूर्व अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। इस महाकुम्भ में देश के कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थियों, विद्यार्थी, कृषि उद्योग जगत से जुड़े उद्यमियों एवं 3000 से अधिक प्रगतिशील किसान एवं बकरी पालकों ने भाग लिया।

National Goat Mahakumbh में प्रगतिशील बकरी पालक सम्मानित (Progressive goat rearers were honored)
(Photo Credit: Kisan Voice)
National Goat Mahakumbh में प्रगतिशील बकरी पालक सम्मानित (Progressive goat rearers were honored)

National Goat Mahakumbh की शुरूआत जलभरो कार्यक्रम और परिषद के गीत से हुई. इसके बाद केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (Central Goat Research Institute) के संस्थान निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने मुख्य अतिथि केन्द्रीय मंत्री मत्स्य, पशुपालन, डेयरी एवं पंचायतीराज मंत्रालय डॉ० एसपी सिंह बघेल और अति विशिष्ट अतिथिगण का स्वागत पटुका, पगड़ी पहनाकर और स्मृति चिन्ह भेंट करके स्वागत किया। इस कार्याक्रम में प्रगतिशील बकरी पालकों को सम्मानित किया गया एवं कुल चार प्रतियोगिताओं में विजयी किसानों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

National Goat Mahakumbh में आए लोगों का हुआ ज्ञानवर्धन (People were enlightened)
(Photo Credit: Kisan Voice)
National Goat Mahakumbh में आए लोगों का हुआ ज्ञानवर्धन (People were enlightened)

संस्थान निदेशक डॉ. चेटली ने कहा कि आज दिन का एक एतहासिक दिन है। यहां पर 17 आईसीएआर के संस्थानों ने स्टॉल लगायी हैं। जिससे विभिन्न राज्यों से 3000 से अधिक प्रगतिशील किसान का ज्ञानवर्धन हुआ है। उन्होंने विभिन शोध-अनुसंधान कार्य, प्रशिक्षणों एवं परियोजनाओं की जानकारी दी। जिससे किसान और पशु पालकों का आर्थिक उत्थान के साथ ही उनकी आय दोगुनी करने में सहायक है। इधर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के एडीजी डॉ. ए. के गौर ने कहा कि संस्थान के कार्यक्रम जिसमें 3000 से अधिक किसानों एवं बकरी पालकों ने सहभागिता की है। जो एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि बकरी के दूध उत्पादन और उसकी मेडिशनल प्रोपर्टी के लाभ पर चर्चा की।

बकरी दूध की उपयो​गिता बताई (usefulness of goat milk was explained)
(Photo Credit: Kisan Voice)

बकरी दूध की उपयो​गिता बताई (usefulness of goat milk was explained)

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. राघवेन्द्र भट्टा ने कहा कि पहली बार इतने बकरी पालक किसान इस कार्यक्रम में उपस्थित हुएं है। उन्होंने बकरी के दूध के उपयोग और महत्व पर विस्तृत चर्चा की एवं संस्थान को एक विशाल किसान छात्रावास के लिए निधि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। भारत सरकार के पशुपालन विभाग के आयुक्त अभिजित मित्रा ने कहा कि बकरी पालन के उभरते भविष्य की ओर एक कदम है। अरुणाचल प्रदेश के कृषि, पशु चिकित्सा, बागवानी एवं मत्स्य पालन मंत्री गेब्रियल डीवांगसु ने कहा कि किसानों से संस्थान में चल रही परियोजनाओं का लाभ लेने की अपील की.

बकरी पालन समेत अन्य जानकारी दी गईं (Other information including goat rearing was given)

National Goat Mahakumbh में किसान-वैज्ञानिक संबंध पर चर्चा, विभिन्न महत्वपूर्ण शोध एवं अनुसंधान पर चर्चा, पशुपालन एवं कृषि तकनीकी प्रदर्शन, उच्च नस्ल के बकरें-बकरियों का प्रदर्शन, प्रगतिशील बकरी पालकों का सम्मान एवं पुरस्कार वितरण के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आयीं प्रदर्शनियों एवं संस्थान की विभिन्न प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रय का मुख्य उदेश्य बकरी पालक किसानों को नई तकनीकियों एवं वैज्ञानिक बकरी प्रबंधन जागरूक करते हुए उनकी आत्मनिर्भर बनने में मदद करना एवं उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित था। इस कार्यक्रम में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के किसानों एवं महिला किसानों के विकास एवं सशक्तिकरण विषय पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

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