Mustard Crops: रबी सीजन में सरसों की बुवाई के बाद निराई और सिंचाई समय पर करनी चाहिए। सरसों की निराई करें और कब सरसों में पहला पानी दें। आइए, वरिष्ठ कृषि विज्ञान इस बारे में क्या बात रहे हैं, ये जानते हैं।
जयपुर, आगरा, लखनऊ
Mustard Crops: देश में रबी सीजन (Rabi Season Crops) की फसलों की बुवाई अभी तेजी से हो रही है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार समेत दूसरे प्रदेशों में रबी सीजन की फसल सरसों (Mustard) की बुवाई पूरी हो चुकी है। किसानों के खेतों में सरसों (Mustard Crops)जमी खड़ी है। सरसों की फसल अच्छी हो। उसकी देखभाल, निराई, सिंचाई बेहद जरूरी है। सरसों की फसल में पहली सिंचाई सबसे अहम होती है। पहली सिंचाई का ध्यान रखने की जरूरत है। सिंचाई का समय मिट्टी, तापमान, जलवायु समेत अन्य बातें भी हर प्रदेश के लिए अलग हैं। आइए, सरसों (Mustard Crops)की पहली सिंचाई कब करें सिंचाई से पहले या सिंचाई के साथ कौन-कौन सी खाद का उपयोग करें इन सबके बारे में आगरा के बिचपुरी कृषि विज्ञान केंद्र ( (Bichpuri Krishi Vigyan Kendra, Agra) के कृषि वैज्ञानिकों से जानते हैं।
बता दें कि सरसों की फसल (Mustard Crops) में निराई, सिंचाई के साथ ही खाद का चयन करना बेहद जरूरी है। अक्सर करके किसान सरसों की सिंचाई की टाइमिंग और पहली सिंचाई के साथ या सिंचाई के बाद खाद के चयन, खाद की मात्रा के बारे में नहीं जानते हैं। जिसकी वजह से फसल अच्छी नहीं होती है। सरसों की पहली सिंचाई के समय के बारे में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक (Senior Agricultural Scientist Dr. Rajendra Chauhan Singh) डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बता रहे हैं कि सरसों की फसल में सिंचाई, निराई और खाद का सही इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है. जिससे ही अच्छी फसल का उत्पादन होगा।
Mustard Crops: सरसों की निराई जरूरी (Weeding of mustard is very important)
आगरा के बिचपुरी कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि सरसों खेतों में खडी है। किसान सबसे पहले ये देखें कि खेत में सरसों की फसल में खरतपतवार तो नहीं हैं। सरसों की फसल में यदि खरपतवार उग चुके हैं तो उनका प्रबंधन करना चाहिए। ऐसे में सबसे जरूरी है कि खरपतवार के लिए निराई करें। जिससे खरपतवार खत्म हो जाएंगे तो खेत की जमीन में मौजूद सभी पोषक तत्व सरसों के पौधों को मिलेगा। जिससे पौधे सही तरह से ग्रोथ करेंगे। निराई के दौरान किसान ये अहम कार्य भी कर सकते हैं। क्योंकि कई जगह पर सरसों के पौधों के बीच की दूरी बेहद कम होती है। कहें तो कहीं पर घनी सरसों उगी है तो सरसों के पौधे अधिक पास-पास हैं तो पौधों की बढ़त में कई समस्याएं आ सकती हैं। घने पौधों में रोशनी और हवा का प्रवाह कम होने के कारण उनकी शाखाएं ठीक से नहीं बनतीं हैं। जिससे सरसों के उत्पादन में कमी आ सकती है। इसलिए, निराई से किसान पहले सरसों की फसल में खरपतवार प्रबंधन के साथ ही पौधों की एक दूसरे से दूरी भी सही कर सकेंगे।

सरसों की पहली सिंचाई 25 से 25 दिन में करें (Do the first irrigation of mustard in 25 to 25 days)
केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप सिंह बताते हैं कि सरसों की पहली सिंचाई सरसों बिजाई के एक माह बाद ही करनी चाहिए। 25 से 30 दिन तक फसल की अवस्था (condition) को देखकर सिंचाई करनी चाहिए । फसल अगर सही वृद्वि (growth) हो रही है तो सिंचाई थोड़ी लेट की जा सकती है। अगर खेत में पौधे ज्यादा मुरझा रहे हैं तो थोड़ी जल्दी सिंचाई करनी चाहिए। लेकिन किसान सरसों की पहली सिंचाई जरूर करें। सही समय पर सरसों की सिंचाई करने से पौधों का तना मजबूत और मोटा होगा। सरसों के पौधे का तना मोटा होने से पौधों की शाखाएं भी मजबूत बनेंगी। जिसमें ही सरसों की फलियों बनेंगी। जिससे ही सरसों की बेहतर पैदावार होगी।
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Mustard Crops: पौधे सूखने पर पहली सिंचाई में देरी नहीं करें (Do not delay the first irrigation when the plant dries up)
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि जन क्षेत्र में खेतों की मिट्टी रेतीली है तो उसमें सरसों की फसल की है। रेतीली जमीन में नमी अधिक देर तक नहीं रहती है। जिसकी वजह से बुवाई के 15, 20 या 25 दिन से पहले ही सरसों की फसल सूखने लगती है। इसलिए, इन क्षेत्र के किसानों को सरसों की पहली सिंचाई समय से करनी चाहिए। यदि ऐसा है तो सरसों की सिंचाई 15 दिन, 20 दिन या 25 दिन बाद जरूर कर देनी चाहिए। इसके साथ ही यदि सरसों की बुवाई के समय मिट्टी में नमी कम थी या किसान ने बारिश की नमी में ही सरसों की बुवाई की है तो पहले पानी में देरी होने से सरसों के पौधे मुरझाने लगते हैं। पौधों में मुरझाने या सूखने की समस्या बढ़ती है। किसान ये भी ध्यान दें कि यदि सरसों के पौधे का रंग हरा होने के बजाय नीला दिखाई देने लगता है। जिससे पौधे का तना फूलने की बजाए, सूखेगा और पतला होता जाएगा। जिससे सरसों के उत्पादन पर असर होता है।

सरसों के पौधों यदि पास-पास होंगे तो बीमारियां अधिक होंगी (more diseases)
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि यदि खेत में सरसों के पौधे पास-पास हैं। जिससे बहुत अधिक घनत्व वाले पौधों में वाइट रस्ट जैसी बीमारियां लगने की संभावना बढ़ जाती है। ये एक फंगस रोग है। जो पौधों के तने को प्रभावित करता है। जिसमें पौधे के तने पर पाउडर जैसा सफेद परत बनाती है। इसके साथ ही सघन पौधों में ओस और कोहरे के कारण नमी अधिक समय तक ठहरती है। जिससे पौधों के गलने का खतरा बढ़ जाता है। पहली सिंचाई से पहले निराई करके अधिक घने पौधों को हटाएं। हालांकि, निराई में स्वस्थ दिखने वाले पौधों को नहीं उखाड़ें। कहें तो पौधों के बीच लगभग 1 फीट की दूरी रखने से उनकी ब्रांचिंग बेहतर आएंगी। जिससे अधिक फली और उच्च गुणवत्ता का उत्पादन संभव हो पाता है।
सिंचाई के साथ ये खाद करें उपयोग (Use these fertilizers with irrigation)
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि सरसों की फसल में पहली सिंचाई 25 से 35 दिन के बीच कर देनी चाहिए। लेकिन, अगर मिट्टी में नमी की कमी हो या पहले की स्थिति सही न हो तो अपनी फसल की स्थिति के अनुसार सिंचाई का समय तय करें। कहें तो सरसों की पहली सिंचाई के बाद सरसों के पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए उसमें खाद भी दें। यदि मृदा की जांच के बाद सरसों की बुवाई में उर्वरक का उपयोग किया है तो भी सरसों की पहली सिंचाई के बाद खाद का उपयोग करें। यदि पहली सिंचाई के बाद पौधों के आसपास सफेद जड़ें उभर रही होती हैं। ये नई जड़ें पौधे के चारों ओर फैल जाती हैं, जो उनकी वृद्धि को प्रोत्साहित करती हैं। इस समय पर उर्वरक का उपयोग करने से पौधों की जड़ों मजबूत होंगी और पौधों की वृद्धि अच्छी होगी।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि यदि किसान भाईयों ने सरसों की बुवाई के दौरान डीएपी, सिंगल सुपर फास्फेट, सल्फर समेत अन्य खाद का उपयोग नहीं किया है तो उन्हें सिंचाई से साथ ये उर्वरक उपयोग करने चाहिए। जिससे सिंचाई के साथ ये खाद देने का सही समय है। सिंचाई के समय ये खादें सीधे पौधों की जड़ों के पास पहुंचेगी। जिससे पौधों को पोषक तत्व मिलेंगे। जो इन्हें अवशोषित करके पौधों की अच्छी वृद्धि होगी।
Mustard Crops: यूरिया और जिंक का उपयोग (Use of urea and zinc)
कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप सिंह बताते हैं कि अगर सरसों की बुवाई के समय डीएपी, सिंगल सुपर फास्फेट, पोटाश और सल्फर जैसे खाद उपयोग किए हैं तो सिंचाई के बाद सरसों में केवल यूरिया और जिंक का उपयोग करें। यूरिया की मात्रा लगभग 50 किलो प्रति एकड़ होनी चाहिए। इसके साथ ही जिंक की मात्रा 10 से 15 किलो प्रति एकड़ रखेंगे तो अच्छी रहेगी। जिंक को सिंचाई से पहले खाद के साथ मिलाकर छिड़कने से अच्छे परिणाम मिलते हैं। सिंचाई के बाद यूरिया सरसों में लगाने पर नाइट्रोजन का सही तरीके से अवशोषण होता है। जिससे पौधों को भरपूर पोषण मिलता है।
एनपीके स्प्रे का भी इस्तेमाल करें (Use NPK spray as well)
कृषि वैज्ञानिक डॉ. संदीप सिंह बताते हैं कि सरसों की पहली सिंचाई के बाद 2-4 दिन में NPK 19:19:19 या 20:20:20 का स्प्रे करेंगे तो पौधों की वृद्धि ठीक होगी। एनपीके का स्प्रे पौधों की वृद्धि तेजी से होगी। सरसों के पौधे का आकार चौड़ा होगा। स्प्रे के परिणाम शानदार होते हैं। इसके अलावा यदि आप माइक्रो न्यूट्रिएंट भी मिलाना चाहते हैं तो आप इसे भी स्प्रे में डाल सकते हैं. जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में और अधिक सुधार होगा।
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