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Millets Procurement: यूपी में MSP पर धान, बाजरा और मक्का की सरकारी खरीद शुरू Government Procurement Of Paddy, Millet And Maize At MSP Started In UP #kisanvoice.in

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Millets Procurement: 'उत्तर प्रदेश में किसानों से खरीफ सीजन की फसलों को MSP पर खरीदने के लिए योगी सरकार ने काम शुरू कर दिया है। सरकारी क्रय केंद्र चालू हो गए हैं। अधिकारी लगातार समीक्षा करके व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में लगे हैं। केंद्र सरकार ने इस वर्ष समर्थन मूल्य धान (काॅमन) का 2300 रुपये प्रति कुंतल, धान ग्रेड-ए का 2320 रुपये प्रति कुंतल, बाजरा का 2665 रुपये प्रति कुंतल और मक्का का 2225 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है।'

आगरा, उत्तर प्रदेश

Millets Procurement : खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य योजना के अन्तर्गत धान, बाजरा एवं मक्का क्रय नीति के संबंध में आगरा मंडलायुक्त (Agra Divisional Commissioner Ritu Maheshwari) रितु माहेश्वरी ने गुरुवार को आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी और मथुरा के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष समर्थन मूल्य धान (काॅमन) में 2300 रुपये प्रति कुंतल, धान ग्रेड (Paddy) ए का 2320 रुपये प्रति कुंतल, बाजरा (Millet) का 2665 रुपये प्रति कुंतल और मक्का (Maize) का 2225 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है।

मंडलायुक्त ने कहा कि एक अक्टूबर से खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बाजरा और मक्का 31 दिसंबर तक क्रय किया जाएगा, जबकि धान क्रय 31 जनवरी 2025 तक किया जाएगा। आगरा मण्डल में धान क्रय के लिए 53 केन्द्र, बाजरा क्रय के लिए 51 और मक्का क्रय के लिए 8 केन्द्र अनुमोदित किए गये हैं। अनुमोदित किए गये धान क्रय केन्द्रों की जनपदवार और एजेन्सीवार समीक्षा की गई। मैनपुरी और फिरोजाबाद में एफसीआई के बन्द केन्द्रों को लेकर मंडलायुक्त द्वारा जनपद स्तर पर मामले का निस्तारण कराते हुए केन्द्रों को शुरू करने अथवा मैनपुरी में पीसीएफ और पीसीयू के एक-एक केन्द्र और शुरू करने के निर्देश दिए गये।

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आगरा मंडल में किस फसल का कितना लक्ष्य (How much target for which crop in Agra division)

आगरा मण्डल में इस वर्ष धान क्रय में 6500 मीट्रिक टन, बाजरा में 57600 मीट्रिक टन और मक्का में 2000 मीट्रिक टन का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। मंडलायुक्त ने शत प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति के निर्देश दिए हैं। सभी क्रय केन्द्र प्रभारियों की पूर्ण उपस्थिति दर्ज न होने पर कहा कि कुछ केन्द्रों पर तकनीकि समस्या के कारण उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही है। समस्या का तत्काल निस्तारण कराते हुए केन्द्र प्रभारियों के शत प्रतिशत उपस्थिति के निर्देश दिए।

15 अक्टूबर के बाद एडीएम-एसडीएम करें निरीक्षण (ADM-SDM should inspect after 15 October)

क्रय केन्द्रों पर व्यवस्था प्रबन्धन की समीक्षा करते मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी ने कहा कि निर्धारित सूचनाओं की वाॅल राइटिंग, निर्धारित अभिलेखों की उपलब्धता, बिजली, किसानों की सुविधा के लिए बैठने, पेयजल, शेड आदि, केन्द्र का चावल मिल से सम्बद्धीकरण, मिल का सत्यापन, केन्द्रों पर स्टेंसिल, परिवहन ठेकेदारों की नियुक्ति, जियो टेगिंग, पोर्टल पर ऑनलाइन फीडिंग ये सभी व्यवस्थायें दुरूस्त करें। 15 अक्टूबर के बाद एडीएम-एसडीएम निरीक्षण करें।

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किसानों के रजिस्ट्रेशन बढ़ाए जाएं (Registration of farmers should be increased)

धान खरीद के लिए पर्याप्त मात्रा में बोरों की उपलब्धता है। सभी केन्द्रों से पंजीकृत किसानों की संख्या पर असंतोष व्यक्त करते हुए मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि चारों जनपदों आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी में धान, बाजरा और मक्का के किसानों के रजिस्ट्रेशन बढ़ायें जाएं। रजिस्ट्रेशन कराने के बाद लंबित आवेदनों का संबंधित अधिकारी द्वारा सत्यापन जल्द पूर्ण किया जाए। केन्द्र को पूर्ण रूप से क्रियाशील बनाने के बाद सार्वजनिक रूप से धान खरीद से संबंधित संपूर्ण जानकारी दें।

बैठक में यह अधिकारी मौजूद रहे (These officers were present in the meeting)

इस मौके पर एडीए उपाध्यक्ष एम.अरून्मौली, संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी राजेश कुमार उपाध्याय, एडीएम एफआर शुभांगी शुक्ला, मैनपुरी एडीए रामजी मिश्र, अनिल कुमार उपनिदेशक (प्रशा.), राकेश कुमार त्रिपाठी, विजेयता सिंह, नन्द किशोर आदि मौजूद रहे।

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क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य (What is Minimum Support Price)

फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी (Minimum support price) किसानों को दी जाने वाले एक गारंटी की तरह होती है। इसमें तय किया जाता है कि किसानों की फसल बाजार में किस मूल्य पर बिकेगी। फसल की बुवाई के दौरान ही फसलों की कीमत तय कर दी जाती है। फसलें तय कीमत से कम मूल्य पर बाजारों में नहीं बिकती हैं। एमएसपी तय होने के बाद बाजार में फसलों की कीमत गिरने के बाद भी सरकार किसानों से एमएसपी पर ही फसलें खरीदती है। एमएसपी का उद्देश्य फसल की कीमत में उतार-चढ़ाव के बीच किसानों को नुकसान से बचाना है।

किस-किस फसल पर लगता है एमएसपी (On which crops is MSP applicable?)

बता दें कि कृषि मंत्रालय खरीफ और रबी सीजन के अलावा अन्य सीजन की फसलों के साथ ही कमर्शियल फसलों पर एमएसपी लागू करता है। किसानों से खरीदी जाने वाली 23 फसलों पर एमएसपी लागू की जाती है। इन 23 फसलों में से 7 अनाज ज्वार, बाजरा, धान, मक्का, गेहूं, जौ और रागी होती हैं। इसी तरह 5 दालें मूंग, अरहर, चना, उड़द और मसूर होती हैं। इसके अलावा 7 तिलहन सोयाबीन, कुसुम, मूंगफली, तोरिया-सरसों, तिल, सूरजमुखी और नाइजर बीज होती हैं। इसके अलावा 4 कमर्शियल फसलें कपास, खोपरा, गन्ना और कच्चा जूट होता है।

फसलों की एमएसपी कौन तय करता है (Who decides the MSP of crops?)

फसलों पर एमएसपी दर लागू केंद्र सरकार करती है। प्रदेश सरकारों के पास भी एमएसपी लागू करने का अधिकार है। केंद्र सरकार ने किसानों की फसलों को उचित कीमत दिए जाने के उद्देश्य से वर्ष 1965 में कृषि लागत और मूल्य आयोग यानी सीएसीपी का गठन किया था। यह हर साल रबी और खरीफ फसलों के लिए एमएसपी तय करता है। देश में पहली बार वर्ष 1966-67 में एमएसपी लागू की गई थी। सीएसीपी द्वारा की जाने वाली सिफारिशों के आधार पर ही सरकार हर साल 23 फसलों के लिए एमएसपी लागू करती है।

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कैसे तय होता है एमएसपी (How is MSP decided)

सीएसीपी जब न्यूनतम समर्थन मूल्य की अनुशंसा करता है तो वह इन बिंदुओं पर ध्यान देता है कि फसल के लिए उत्पाद की लागत क्या है। मांग और आपूर्ति की स्थिति क्या है। अंतरराष्ट्रीय मूल्य स्थिति क्या है। मूल्यों में कितना परिवर्तन आया है। बाजार में मौजूदा कीमतों का क्या रुख है। सीएसीपी स्थान,‍ जिले और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्थितियों का जायजा लेने के बाद ही फसलों पर एमएसपी तय करता है।

क्या है सीएसीपी (What is CACP)

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का एक संलग्न कार्यालय (CACP) है। यह जनवरी 1965 में अस्तित्व में आया। वर्तमान में आयोग में एक अध्यक्ष, सदस्य सचिव, एक सदस्य (आधिकारिक) और दो सदस्य (गैर-आधिकारिक) शामिल हैं। गैर-आधिकारिक सदस्य कृषक समुदाय के प्रतिनिधि होते हैं और आमतौर पर कृषक समुदाय के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हो

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