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Late Blight in Potato : आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग, ये अपनाएं टिप्स Aaloo me Pacheti Jhulsa Rog #kisanvoive #Weather

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Late Blight in Potato : आलू की फसल को प्रभावित करने वाला पछेती झुलसा रोग सबसे विनाशकारी रोगों में से एक है। जो फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टन्स नामक रोगजनक के कारण होने वाला यह रोग । आइए, आलू की फसल में लगने वाले पछेती झुलसा रोग के लक्षण, बचाव और दवा के छिड़काव के बारे में जानते हैं।

आगरा / फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश।

Late Blight in Potato : उत्तर प्रदेश में अचानक से मौसम में बदलाव हुआ है। मौसम के करवट बदलने से आलू में पछेती झुलसा रोग (Late Blight in Potato ) के साथ ही सरसों में माहूं लगने की आशंका बढ़ रही है। इस मौसम में खेतों में खडी आलू और सरसों की फसलों को रोग से बचाव के लिए KisanVoice ने आगरा के कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान के साथ ही फर्रुखाबाद कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु यादव से खास बातचीत की। आइए, आलू की फसल में लगने वाले पछेती झुलसा रोग (Late Blight in Potato ) के लक्षण, बचाव और दवा के छिड़काव करने की सलाह जानते हैं।

उत्तर प्रदेश की बात करें तो आलू की खेती आगरा मंडल के साथ ही फर्रुखाबाद मंडल में खूब होती है। इस समय जो मौसम में बदलाव हुआ है। ये आलू की फसल के लिए ठीक नहीं हैं। बूंदाबांदी, बारिश, कोहरे और शीतलहर से आलू की फसल में ​पछेती झुलसा रोग (Late Blight in Potato) लग सकता है।

Late Blight in Potato : इस मौसम में आलू का आकार बढ़ता नहीं (Size of potato does not increase in this weather)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Late Blight in Potato : बारिश से आलू और सरसों की फसल में नुकसान (Rain causes damage to potato and mustard crop)

फर्रुखाबाद के कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु यादव ने बताते हैं कि अभी कभी कोहरा है तो कभी आसामान में बादल छाए रहते है। इसके साथ ही कई जिलों में बूंदाबांदी और बारिश हो रही है या आगे आने वाले दिनों में बारिश की संभावना है। इसलिए, इस मौसम में आलू, सरसों की फसलों को नुकसान हो सकता है। इस मौसम में आलू में पछेती झुलसा रोग बढ़ने, सरसों की फसल पुष्प व फली बनने में नुकसान हो सकता है। मिर्च एवं टमाटर जैसी फसल में विषाणु रोग बढ़ सकते हैं।

Late Blight in Potato : इस मौसम में आलू का आकार बढ़ता नहीं (Size of potato does not increase in this weather)

आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि मौसम को देखते हुए किसानों के सामने बहुत बडी समस्या है। जब तापमान छह डिग्री सेंटीग्रेड से 19 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच आ जाता है तो आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग होने की संभावना अधिक होती हैं। कहें तो तापमान में कमी से पूरी ताकत के साथ पछेती झुलसा रोग आलू की फसल में प्रवेश करता है। अभी जो एकदम मौसम में बदलाव हुआ है। बारिश और बूंदाबांदी हो रही हैं। मौसम खुल नहीं रहा है। तापमान भी कम है। इस मौसम में खेतों में खडी आलू की फसल में पौधे शांति मुद्रा में हैं। आलू में किसी तरह का विकास नहीं होता है। क्योंकि, पत्तियों के स्टोमेटा खुलते नहीं हैं। जिससे पत्तियां भोजन नहीं बनाती हैं। जिससे आलू का आकार वहीं का वहीं रुक जाता है।

Late Blight in Potato : आलू में पछेती झुलसा रोग के लक्षण (Symptoms of late blight disease in potatoes)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Late Blight in Potato : आलू में पछेती झुलसा रोग के लक्षण (Symptoms of late blight disease in potatoes)

आलू की फसल में लगे पछेती झुलसा रोग के शुरुआती लक्षण हल्के से गहरे हरे, गोलाकार धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। जो पत्तियों के निचले हिस्से पर होकर धीरे-धीरे पत्तियों के सिरों या किनारों की ओर फैलते हैं। आइए, जानते हैं कि पछेती झुलसा रोग के सामान्य लक्षण ये हैं।

पत्तियों पर पानीदार धब्बे: पछेती झुलसा रोग की वजह से आलू के पौधे की पत्तियों पर हरे या पीले रंग के फफोले जैसे धब्बे हो जाते हैं।

भूरे या काले धब्बे: पछेती झुलसा रोग में पौधे की पत्तियों के निचले हिस्से पर विकसित होते हैं।

पत्तियों का सड़ना: पछेती झुलसा रोग के संक्रमण की वजह से एक से चार दिन में पौधे की पत्तियाँ सड़ने लगती हैं। यदि शुष्क स्थिति है तो पौधे के तने पर फफोले बनते हैं। जबकि आर्द्र स्थितियों में नीले-भूरे कवक दिखाई देते हैं।

कंदों में सड़न के दो प्रकार: पछेती झुलसा रोग में शुष्क सड़न और गीली सड़न होती हैं।

शुष्क सड़न: पछेती झुलसा रोग में इस तरह की स्थिति में कवक क्षति 5-15 मिमी गहराई तक पहुंचती है। इसमें रंग नीला-काला या लाल-भूरा होता है।

गीली सड़न: पछेती झुलसा रोग में पौधे की पत्तियों पर 24-45 मिमी तक गहरा, पूरे आलू में फैलता है और सफेद कॉलोनी बनाता है। जो पानी छोड़ती है।

Late Blight in Potato से फसल में 90 प्रतिशत तक नुकसान (90 percent damage to the crop)

आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि जिस तरह का अभी मौसम में है। आलू के पौधे शांत हैं। इस मौसम में आलू की फसल में यदि पछेती झुलसा रोग प्रवेश करने की संभावना अधिक रहती है। इस मौसम में यदि आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग लग गया तो बहुत नुकसान होगा। कहें तो आलू की 80 से 90 प्रतिशत तक फसल खराब हो सकती है।

Late Blight in Potato : 48 घंटे में आलू की पूरी फसल कर सकता है (Can destroy the entire potato crop in 48 hours)

आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि पछेती झुलसा रोग की वजह फाइटोफ्थोरा इन्फ्रेस्टैंस नाम की एक फफूंदी है। जो बेहद खतरनाक है। ये फफूंदी इतनी खतरनाक है कि यदि किसी भी माध्यम से ये अपनी आलू की फसल वाले खेत में आ गई थी तो 24 से 48 घंटे में पूरी आलू की फसल को कवर कर सकती है। जिससे आलू की फसल खराब हो सकती है। जिससे किसानों को अधिक नुकसान होगा।

Late Blight in Potato : इस दवा का करें छिड़काव करें (Spray this medicine)

आगरा के बिचपुरी (Krishi Vigyan Kendra Bichpuri, Agra Senior Scientist Dr. Rajendra Singh Chauhan) स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि जब आलू की फसल वाले खेत में किसी भी माध्यम से यदि किसी भी आलू के पौधे पर ये फफूंदी आ गई। इसकी वजह से आलू के पौधे की एक पत्ती की बात करें तो उस पर तीन लाख स्पोट एक जगह पर बनते हैं। जब ये बिखर जाएं या पूरे खेत में फेल जाएं तो पूरे खेत की आलू की फसल बर्बाद हो जाएगी। पछेती झुलसा रोग में आलू की फसल में फैलाव दो तरह से होता है। इसमें एक सेक्चुअल और दूसरा एसेक्चुअल है. पिछैती झुलसा रोग से रोकथाम के लिए खेतों में कॉपर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी या मेटेलैक्सिल 35 प्रतिशत डब्ल्यूएस लगाएं. इसके साथ ही मेटेलैक्सिल के कॉम्बिनेशन भी आते हैं। इनकी मात्रा हमें एक से डेढ प्रतिशत पानी में रखनी है। इन दवाओं का कॉम्बिनेशन भी बाजार में मौजूद है।

Late Blight in Potato : 48 घंटे में आलू की पूरी फसल कर सकता है (Can destroy the entire potato crop in 48 hours)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Late Blight in Potato : मौसम खुलने पर इन दवाओं के रजिल्ट बेहतर (These medicines will give better results when the weather clears)

आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि मौसम खुलने पर इन दवाओं के रजिल्ट बेहतर आएंगे। यदि मौसम नहीं खुल रहा है। खेत में पीलापन दिख रहा है, पत्तियां झुलस रही हैं। पत्तियां गिर रही हैं तो पत्तियां पर दाग आ रहे हैं। या पौधा झुलस गया है तो इन दवाओं का एक स्प्रे जरूर करें। जिससे बीमारी से फसल को बचाया जा सके।

Late Blight in Potato : नाइट्रोजन उर्वरकों का छिड़काव रोक दें (Stop spraying nitrogen fertilizers)

फर्रुखाबाद के कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक (Crop Protection Scientist Dr. Abhimanyu Yadav) डॉ. अभिमन्यु यादव ने बताते हैं कि आलू में कुछ दिन के लिए नाइट्रोजन उर्वरकों का छिड़काव रोक दें। पछेती झुलसा रोग आने पर खेत में आवागमन कम करें। आलू व टमाटर की फसल में झुलसा व अन्य फफूंद जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए मैंकोजेब 0.25 प्रतिशत या मैंकोजेब एवं कार्बेन्डाजिम मिश्रण 0.2 प्रतिशत या कॉपर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत या एजोक्सिस्ट्रोबिन के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहिए। पिछैती झुलसा के लक्षण दिखते ही साइमोक्सेनिल़ या फिनामिडोन या डाइमेथोमार्फ के साथ मैंकोजेब के मिश्रण वाली दवा जैसे सुदात्सू फंजीसाइड, कर्जेट, सेक्टिन या एक्रोवेट के 0.3 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें।

Late Blight in Potato : मटर, सरसों, लहसुन, प्याज, गेहूं व आलू की बीमारी (Disease of Peas, Mustard, Garlic, Onion, Wheat and Potato)

फर्रुखाबाद के कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अभिमन्यु यादव ने बताते हैं कि सरसों, लहसुन, प्याज, टमाटर, मिर्च, केला, आलू व अन्य सब्जियों में सफेद मक्खी, लीफहॉपर, व माहूं आदि के प्रबंधन व विषाणु रोगों का प्रसार रोकने के लिए पांच प्रतिशत नीम पत्ती सत या 0.5 प्रतिशत नीम तेल का छिड़काव करें। अथवा समस्या की उग्रता में इमिडाक्लोप्रिड 0.03 प्रतिशत घोल या लैम्डासाइहैलोथ्रिल 2.5 प्रतिशत ई.सी. 1 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इसके साथ ही मटर, सरसों, लहसुन, प्याज, गेहूं व आलू आदि की फसल में पत्ती धब्बा व अन्य फफूंद जनित बीमारियों के लिए मैंकोजेब 0.25 प्रतिशत अथवा मैंकोजेब एवं कार्बेन्डाजिम के मिश्रण का 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव किया जाना चाहिए।

Ans: आलू और टमाटर की फसल में लगने वाला एक रोग पछेती झुलसा है। जो आलू और टमाटर में फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टन्स नामक कवक के कारण होता है। जिसमें पौधे की पत्तियां और कंद संक्रमित होते हैं।

Ans: आलू ओर टमाटर की फसल में पछेती झुलसा रोग लगने पर पौधे की पत्तियों पर हरे या पीले रंग के पानीदार धब्बे, भूरे-काले धब्बे आ जाते हैं। इसके साथ ही पौधे की पत्तियां सड़ने के साथ ही आलू का कंद भी सड़ने लगता है।

Ans: पछेती झुलसा रोग के लिए अनुकूल मौसम की बात करें तो गर्म और आर्द्र मौसम, विशेष रूप से क्षारीय मिट्टी में पछेती झुलसा रोग को बढ़ावा देता है।

Ans: डाइमिथोमार्फ 50% WP (कात्यायनी डिसमिस) जैसे फफूंदनाशकों का उपयोग करने से रोग का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

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