FAO Report: संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने 2025 में वैश्विक गेहूं उत्पादन 79.6 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद जताई है। जो पिछले साल की तुलना में एक फीसदी अधिक है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने वैश्विक अनाज उत्पादन की नई रिपोर्ट जारी की है। जिसमें यूरोपियन यूनियन विशेष रूप से फ्रांस और जर्मनी में गेहूं उत्पादन में वृद्धि होने का अनुमान जताया गया है। जिसकी वजह इन देशों में गेहूं का रकबा में वृद्धि होने की बात कही गई है।
नई दिल्ली.
FAO Report: देश और दुनिया के लिए अच्छी खबर है। दुनिया में इस साल गेहूं उत्पादन बढ़कर 79.6 करोड़ टन पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। जिससे गेंहू का उत्पादन 2024 की तुलना में करीब एक फीसदी अधिक होने की संभावना है। इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization of the United Nations) ने रिपोर्ट जारी की है। इस साल यूरोपीय संघ, विशेष रूप से फ्रांस और जर्मनी में गेहूं की पैदावार में अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। क्योंकि, इन देशों में बुवाई का रकबा बढ़ा है। जिससे पैदावार अधिक होने की संभावना है। हालांकि, सूखे की वजह से पूर्वी यूरोप में गेंहू की पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जबकि, पश्चिमी यूरोप में भारी बारिश के कारण उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिका में भी गेहूं का रकबा बढ़ने की उम्मीद से सर्दियों में सूखे के कारण पैदावार मामूली घट सकती है।
हाल में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने एक रिपोर्ट जारी की है। एफएओ की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में धान उत्पादन भी बढने के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। सत्र 2024-25 की बात करें तो वैश्विक धान उत्पादन 54.3 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा है। यह वृद्धि मुख्य रूप से भारत में बेहतर फसल और कंबोडिया एवं म्यांमार में अनुकूल मौसम परिस्थितियों के कारण से हुआ है।

FAO Report: अनाज उत्पादन बढ़ाकर 284.2 करोड़ टन किया (Grain production increased to 2842 million tonnes)
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization of the United Nations) ने वैश्विक अनाज उत्पादन पूर्वानुमान को बढ़ाकर 284.2 करोड़ टन किया है। जो सन 2023 की तुलना में थोड़ा अधिक है। इसके साथ ही एफएओ ने 2024-25 में अनाज की कुल खपत 286.7 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना भी जताई है। कहें तो ये पूर्व की खपत में करीब एक फीसदी की वृद्धि है। ये खपत में वृद्धि मुख्य रूप से चावल की बढ़ती मांग के कारण हो सकती है। एफएओ की रिपोर्ट को देखें तो गेहूं की खपत स्थिर रहने का पूरा अनुमान है। हालांकि, खाद्य के रूप में गेहूं के उपयोग में मामूली गिरावट संभव है। लेकिन कारखानों में विशेष रूप से चीन में इसका उपयोग बढ़ सकता है।
FAO Report: अनाज भंडारण में गिरावट की आशंका (Fear of decline in grain storage)
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization of the United Nations) ने अनुमान जताया है कि सन 2025 में वैश्विक अनाज भंडार 1.9 फीसदी घटकर 86.93 करोड़ टन रहेगा। हालांकि, रूस और यूक्रेन में भंडारण बढ़ने से इसमें आंशिक रूप से गिरावट आने की वजह से संतुलित किया जा सकता है। इसके साथ ही दुनिया में स्टॉक-टू-यूज अनुपात 29.9 फीसदी तक गिरने की आशंका है। लेकिन इसे अभी संतोषजनक मानकर विशेषज्ञ चल रहे हैं। यदि वैश्विक व्यापार में भी कमी आई तो सही नहीं रहेगा। इसी आशंका को लेकर एफएओ ने अपने पूर्वानुमान को घटाकर 48.42 करोड़ टन कर दिया है। जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.6 फीसदी कम है। इसकी वजह निर्यात में होने वाले बदलाव हैं।

FAO Report: दुनिया में क्षेत्रवार मिलीजुली स्थिति (Mixed situation in the world region-wise)
दुनिया में गेंहू के उत्पादन को लेकर लगभग स्थित स्पष्ट हो चुकी है। दुनिया में क्षेत्रवार गेंहू उत्पादन की मिली जुली स्थिति है। जिसमें उत्तरी अफ्रीका की बात करें तो वहां पर कम बारिश की वजह से गेंहू का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। जबकि, दक्षिणी अफ्रीका में 2024 की गिरावट के बाद बेहतर बारिश से फसल उत्पादन में सुधार की उम्मीद है। पूर्वी एशिया की बात करें तो वहां पर बेहतर बुवाई और अनुकूल मौसम के चलते गेहूं उत्पादन बढ़ने की पूरी संभावना है। लेकिन निकट पूर्व एशिया में कम बारिश के कारण गेहूं की पैदावार पिछले पांच साल के औसत से कम रह सकती है। इसके साथ ही मध्य अमेरिका व कैरेबिया में शुष्क मौसम के कारण मेक्सिको में अनाज बुवाई घटने की संभावना है। ब्राजील की बात तो यहां पर गेंहू की अच्छी फसल से कुल उत्पादन औसत पैदावार से ऊपर रहने की उम्मीद है।

FAO Report: दुनिया के 45 देशों में खाद्य संकट (Mixed situation in the world region-wise)
दुनिया की बात करें तो जलवायु परिवर्तन, संघर्ष और असुरक्षा की वजह से तमाम देशों में खाद्य संकट की स्थिति बनने लगी है। जिसकी वजह से दुनिया में गंभीर खाद्य संकट की स्थिति है। विशेष रूप से गाजा व सूडान में अकाल जैसे हालात बने हुए हैं। दुनिया की बात करें तो 45 देशों को खाद्य सहायता की जरूरत पड़ सकती है। जिसमें अफ्रीका के 33, एशिया के 9, दक्षिण अमेरिका एवं कैरेबिया के दो और यूरोप का एक देश है।
FAO Report: प्रतिदिन प्रति 10,000 लोगों में से दो मृत्यु की संभावना (Possibility of two deaths per 10,000 people per day)
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO Report) ने अपनी रिपोर्ट में ये चेतावनी दी है कि दुनिया के 45 से अधिक देशों में खाद्य असुरक्षा के उच्चतम स्तर (आईपीसी चरण-5) की स्थिति बनी हुई है। जिससे इंटीग्रेटेड फेज क्लासिफिकेशन तीव्र खाद्य असुरक्षा का आकलन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त प्रणाली है। ये तीव्र खाद्य असुरक्षा पैमाने का सबसे गंभीर चरण है। जहां प्रतिदिन प्रति 10,000 लोगों में से दो या अधिक व्यक्तियों या चार या उससे अधिक बच्चों की मृत्यु होने की संभावना जताई जा रही है।
FAO Report: तापमान ने किसानों की बढ़ाई चिंता (FAO Report: Temperature increased the concern of farmers)
बीते साल भी इसी अवधि में खरीद की गई थी। परंतु तब मार्च के पहले दो सप्ताह तक गेहूं की आवक शून्य रही थी। इसके चलते ही सरकार ने खरीद को आगे बढ़ाने के लिए इसको ही आधार बनाया है। वहीं, इस साल जिस तरह से भारत में तापमान बढ़ रहा है। उससे किसानों की चिंता बढा दी है। गेहूं की कटाई भी अभी शुरू नहीं हुई है। मौसम में आए बदलाव का असर फसलों पर भी पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि किसान यदि गेहूं की सिंचाई करने जा रहे हैं तो अभी रुक जाएं।
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