Fake Fertilizers and Pesticides: आधुनिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक दवाओं से भले ही फसलों का उत्पादन बढ़ा है। इसमें मुनाफाखोर और मिलावटखोरों ने बाजार में नकली उर्वरक और कीटनाशक उतार दिए हैं। जिन्हें पहचानना बेहद मुश्किल है। जिससे किसानों की मुसीबत बढ़ी है। नकली कीटनशाक और उर्वरकों के उपयोग से किसानों को फसलों में नुकसान और सेहत भी प्रभावित होती है। आइये, आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान से नकली कीटनाशक और उर्वरक के टिप्स और ट्रिक्स जानते हैं।
लखनऊ /आगरा , उत्तर प्रदेश
Fake Fertilizers and Pesticides: केंद्र और प्रदेश सरकारें किसानों (Farmers) की आमदनी बढ़ाने के लिए तमाम योजनाएं चल रहीं हैं। देश में कृषि वैज्ञानिक भी कम लागत में ज्यादा पैदावार देने वाले उन्नतशील बीज और खाद को विकसित कर रहे हैं। सरकारें (Central & State Governments) भी पारंपरिक खेती को बढ़ावा, जैविक खाद और दवाओं के इस्तेमाल पर जोर दे रही हैं। किसान एक तरफ जहां बदलते मौसम, महंगी लागत और मंडी की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं तो दूसरी ओर एक छिपा खतरा “नकली उर्वरक और कीटनाशक” हैं। जो किसानों की मेहनत और उम्मीदों को बर्बाद कर देते हैं। भारत के बाजारों में नकली उर्वरक और दवाएं (Fake Fertilizers and Pesticides) के साथ ही घटिया किस्म के बीजों का प्रतिशत 10-15% हैं, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं।
🔍 नकली उर्वरक और कीटनाशक क्या होते हैं?
ऐसे उत्पाद, जो पूरी तरह अवैध रूप से बनाए जाते हैं या जिनमें सक्रिय घटक (active ingredient) निर्धारित मानकों से बहुत कम या होता ही नहीं है। इन उत्पादों की झूठी ब्रांडिंग होती है। जिनमें घटिया गुणवत्ता के रसायन होते हैं। जो एक्सपायर्ड या अवैध रूप से पुनः ब्रांडेड सामग्री होती है। इनका उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना होता है, न कि किसान की मदद करना होता है।
नकली कीटनाशक और उर्वरकों के प्रभाव
फसल पर प्रभाव : नकली कीटनाशक दवाओं के उपयोग से कीट और बीमारियाँ नियंत्रित नहीं होतीं हैं। जिससे पौधों का विकास अवरुद्ध हो जाता है। जिससे फसल का उत्पादन घटता है। फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है।
मिट्टी और पर्यावरण पर असर: नकली खाद और नकली कीटनाशक में हानिकारक रसायन होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को नष्ट कर सकते हैं। जैविक जीवन (गुणवत्ता बढ़ाने वाले जीवाणु/फफूंद) समाप्त हो जाते हैं। इसके साथ ही भूमिगत जल दूषित भी हो सकता है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव: नकली कीटनाशकों और उर्वरक में हानिकारक रसायन होते हैं। जिनके छिड़काव करते समय संपर्क में किसानों के आने से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। किसानों को त्वचा रोग और श्वसन समस्याएं समेत अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
किसानों को आर्थिक नुकसान: फसलों में जब नकली कीटनाशक का छिड़काव और उर्वरक के उपयोग से किसान पर दोहरी मार पडती है। जिस कीटनाशक के लिए रुपये दिए वो मिली नहीं। नकली कीटनाशक और उर्वरक से उत्पादन सही नहीं होगा। जिससे आर्थिक नुकसान होने के साथ ही बाजार में फसल का सही मूल्य नहीं मिलने से भी आर्थिक नुकसान होता है।
नकली रासायनिक दवाओं का प्रभाव (Effect)
उत्तर प्रदेश में आगरा जिला के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra, Bichpuri, Agra) के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि फसलों में नकली और मिलावटी कीटनाशकों, खरपतवारनाशी, उर्वरक (Fake Fertilizers and Pesticides) के इस्तेमाल से मृदा बंजर होती है। जिससे खाद्य जनित बीमारियों, वायुजनित और जलजनित बीमारियों का खतरा रहते हैं। नकली कीटनाशकों के कारण किसानों को तीव्र श्वसन संकट, विषाक्तता और कैंसर जैसे घातक रोग ग्रस्त कर सकते हैं। किसानों में साक्षरता दर होने से यह सब खोरखधंधा चल रहा है।
📊 भारत में स्थिति कितनी गंभीर है?
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पंजाब 2024 रिपोर्ट: 4,500 कीटनाशक सैंपल लिए गए, जिनमें से 140 से अधिक फेल।
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ICFIC 2023 रिपोर्ट: भारत में हर साल करीब ₹3,000 करोड़ के नकली कृषि रसायन बिकते हैं।
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उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में नकली उर्वरकों का प्रसार तेजी से बढ़ा है।
🛡️ किसान क्या कर सकते हैं?
केवल अधिकृत विक्रेता से खरीदें
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अपने ब्लॉक या KVK से प्रमाणित दुकानों की सूची लें
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स्थानीय सहकारी समितियों से खरीदें
मूल बिल लें और संजोकर रखें
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शिकायत या कानूनी कार्रवाई के लिए पक्का प्रमाण यही है
संदेह होने पर तुरंत रिपोर्ट करें
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जिला कृषि अधिकारी या कृषि हेल्पलाइन पर शिकायत करें
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राज्य सरकार की ऐप या पोर्टल का उपयोग करें
फॉर्मर ग्रुप / FPO से जुड़ें
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सामूहिक खरीद में नकली उत्पाद का जोखिम कम होता है
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सस्ता और सही माल मिल सकता है
जैविक और स्थानीय विकल्पों पर जोर दें
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नीम आधारित जैव कीटनाशक, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट अपनाएं
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IPM (Integrated Pest Management) को प्राथमिकता दें
पक्का बिल लेने के बाद मुआवजा संभव (Compensation possible after getting a proper bill)
आगरा के जिला कृषि अधिकारी (District Agriculture Officer) व प्रभारी जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार सिंह का कहना है कि नकली बीजों, उर्वरकों (Fake Fertilizers and Pesticides) और दवाओं को लेकर किसान जब शिकायत करते हैं । उनके पास पक्का बिल नहीं होता है, जिसकी वजह से किसान को हुए नुकसान का उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिल पाता है। उनका कहना है कि किसान लाइसेंस वाली दुकान से ही खाद, बीज और दवाएं खरीदें। जो भी उत्पाद खरीद रहे हैं, उसका दुकानदार से पक्का बिल जरूर लें। कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि किसान कीटनाशकों का निर्माण घर पर ही कर सकते हैं। यह जैविक भी होगा और इससे फसल एवं मिट्टी भी सुरक्षित रहेगी। इसके अलावा स्टिकी ट्रैप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। येलो स्टिकी ट्रैप या फिर रंग-बिरंगे स्टिकी ट्रैप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनका इस्तेमाल करके भी कीटों का नियंत्रण कर सकते हैं।
🧪 नकली उत्पादों की पहचान कैसे करें?
| पहचान बिंदु | विवरण |
|---|---|
| ✅ सील और पैकिंग | असली उत्पादों की पैकिंग मजबूत और ब्रांडेड होती है |
| ✅ QR कोड / बैच नंबर | मोबाइल से स्कैन करने पर असली वेबसाइट पर जानकारी मिले |
| ✅ लाइसेंस और मैन्युफैक्चरिंग डिटेल | पंजीकृत फैक्ट्री का नाम और पता होना चाहिए |
| ✅ रंग, गंध और घनत्व | कई बार नकली उत्पाद की बनावट अलग होती है |
| ✅ बिल लें | लिखित रसीद हमेशा लें ताकि शिकायत की जा सके |
🏛️ सरकार की पहलें
| पहल | विवरण |
|---|---|
| Agri Input Portal | नकली उत्पादों की शिकायत और उत्पाद ट्रैकिंग |
| QR Code Labeling | प्रमुख कंपनियां QR कोड से प्रामाणिकता जांचने की सुविधा दे रही हैं |
| KVK जागरूकता अभियान | गांव-गांव जाकर नकली उत्पादों की जानकारी देना |
| पंजाब मॉडल | रैंडम जांच, लाइसेंस निरस्तीकरण और केस दर्ज करने की नीति |
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चौहान की सलाह, किसान इन बातों का विशेष ध्यान रखें
▪️ जिन दुकानदारों के पास कृषि विभाग से मिलने वाला लाइसेंस है उनसे ही दवाएं खरीदें।
▪️किसान इनटरनेट सौदों से बचें जो बहुत अच्छे लगते हैं।
▪️ऐसी कीटनाशक, खरपतवार नाशक एवं अन्य रासायनिक दवाएं कभी न खरीदें, जिन पर अंग्रेजी-हिंदी में निर्देश न लिखे हों।
▪️बोतल, पैकेट पर उचित लेबल हो, जिसमें EPA पंजीकरण संख्या शामिल हो।
▪️लेबल स्पष्ट रूप से सक्रिय घटक नामों की पहचान करता है।
▪️सभी ईपीए पंजीकृत दवाओं के सक्रिय घटक लेबल पर स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध होते हैं।
▪️सभी दवाएं पक्के बिल पर खरीदें, जिससे आप दुकानदार पर क्लेम कर सकें
▪️ फसल में इस्तेमाल की गई दावों की बोतल पैकेट आज सामग्री को सुरक्षित रख लें, फसल में नुकसान होने पर यह सभी काम आएंगे
▪️पैकिंग पर विभिन्न प्रकार के लेबल लगे होते हैं जैसे दवा का निर्माण कब किया गया है, इस दवा की एक्सपायरी डेट कब है, इस दवा की बैच संख्या क्या है ये सभी चीजें ध्यान से देखें।
▪️ बोतल अथवा पैकेट है, उसकी सील को अच्छी तरह से देखें कहीं व टूटी, कटी-फटी या उसमें कोई लीकेज तो नहीं।
✅ नकली उर्वरक और कीटनाशक पर पूछे जाने वाले FAQs
Q: नकली उर्वरक और कीटनाशक क्या होते हैं?
👉A: ऐसे उत्पाद, जो अवैध रूप से बनाए जाते हैं, जिनमें सक्रिय घटक निर्धारित मानकों से कम या नहीं होते हैं। जिनकी पैकेजिंग और ब्रांडिंग झूठी होती है। जो मुनाफा कमाने के लिए बनाए जाते हैं।
Q: नकली उर्वरक और कीटनाशक के उपयोग से फसल पर क्या प्रभाव पड़ता है?
👉A: नकली कीटनाशकों के उपयोग से कीट और बीमारियाँ नियंत्रित नहीं होतीं हैं। पौधों का विकास अवरुद्ध रुकने से उत्पादन घटता है। फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होता है।
Q: नकली उर्वरक और कीटनाशक का मिट्टी और पर्यावरण पर क्या असर होता है?
👉A: नकली खाद और कीटनाशकों में हानिकारक रसायन होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को नष्ट कर सकते हैं। इसके साथ ही खेती में जैविक जीवन समाप्त करने के साथ ही इनसे भूमिगत जल दूषित हो सकता है।
Q: नकली उर्वरक और कीटनाशकों का किसान की सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
👉A: नकली उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव करते समय किसानों के सपंर्क में आने से त्वचा रोग, श्वसन समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
Q: भारत में नकली कृषि उत्पादों की स्थिति कितनी गंभीर है?
👉A: भारत की बात करें तो हर साल करीब ₹3,000 करोड़ के नकली कृषि रसायन बिकते हैं। जो पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में खूब खपाए जाते हैं।
Q: नकली खाद और कीटनाशकों को किसान कैसे बचें?
👉A: आगरा के कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान की किसानों को सलाह है कि वे इनके उपयोग के साथ कुछ सावधानी बरतें.
- केवल अधिकृत विक्रेता से खरीदें।
- मूल बिल लें और संजोकर रखें।
- संदेह होने पर तुरंत रिपोर्ट करें।
- फॉर्मर ग्रुप / FPO से जुड़ें।
- जैविक और स्थानीय विकल्पों पर जोर दें।
Q: नकली उत्पादों की पहचान कैसे करें?
👉A: आगरा के जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार सिंह नकली उर्वरक और कीटनाशक के बारे में ये बातें बता रहे हैं…
- पैकेजिंग पर स्पष्ट लेबल और सक्रिय घटक की जानकारी होनी चाहिए।
- EPA पंजीकरण संख्या की जांच करें।
- निर्देश अंग्रेजी और हिंदी में लिखे होने चाहिए।