Electricity Privatisation in UP: उप्र में बिजली निजीकरण को लेकर 82 वें दिन भी कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। बिजली निजीकरण से कॉमन कैडर के मुख्य अभियंता, अधिशासी भियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर सहित 28489 स्थायी पद और संविदा पर कार्यरत करीब 50000 कर्मियों की नौकरियां भी खतरे में पड़ जाएंगे।
लखनऊ/ उत्तर प्रदेश.
Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी है। 82 वें दिन भी उत्तर प्रदेश में समस्त जनपदों और परियोजना मुख्यालयों पर बिजलीकर्मियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन जारी रखा। अब बिजली कर्मचारियों की मांग है कि करार का उल्लंघन करने और भारी अनियमितता के चलते ग्रेटर नोएडा और आगरा का करार रद्द किया जाए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि मांग है कि निजीकरण करने के पहले ग्रेटर नोएडा और आगरा में किए गए निजीकरण के करार भारी अनियमितता के चलते रद्द किए जाएं।

Electricity Privatisation in UP: आगरा शहर का 2200 करोड़ रुपए का राजस्व का बकाया था (Agra city had revenue dues of Rs 2200 crores)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि 01 अप्रैल 2010 को आगरा शहर की विद्युत व्यवस्था टोरेंट पावर कंपनी को सौंपी गई थी। उस समय उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन का आगरा शहर का 2200 करोड़ रुपए का राजस्व का बकाया था। निजीकरण की शर्त यह थी की यह धनराशि टोरेंट पॉवर कंपनी वसूल कर पावर कॉरपोरेशन को देगी। पॉवर कॉरपोरेशन इसके ऐवज में टोरेंट पावर कंपनी को 10% प्रोत्साहन धन राशि देगा।
Electricity Privatisation in UP: पावर कारपोरेशन को 2200 करोड़ रुपए की चोट से हुई (Power Corporation suffered a loss of Rs 2200 crores)
उल्लेखनीय है कि लगभग 15 वर्ष होने जा रहे हैं और टोरेंट पॉवर कंपनी ने यह धनराशि, जो उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन का राजस्व बकाया था। आज तक पॉवर कॉरपोरेशन को वापस नहीं किया है। नियम यह है कि अगर कोई उपभोक्ता बकाए की धनराशि नहीं देता है तो उसका कनेक्शन काट दिया जाता है। मजेदार बात है कि टोरेंट पावर कंपनी में इन बकायेदारों का कनेक्शन भी नहीं काटा। इसका मतलब यह हुआ कि यह 2200 करोड़ रुपए की धनराशि उपभोक्ताओं से लेकर टोरेंट पावर कंपनी ने अपने खाते में डाल ली। इस प्रकार आगरा में निजीकरण की शुरुआत ही पावर कारपोरेशन को 2200 करोड़ रुपए की चोट से हुई है।

Electricity Privatisation in UP: 41 हजार करोड़ रुपए का राजस्व बकाया (Revenue dues of Rs 41 thousand crores)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम (Purvanchal Vidyut Vitran Nigam) में लगभग 41 हजार करोड़ रुपए का राजस्व बकाया है। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (Dakshinchal Vidyut Vitran Nigam) की बात करें तो यहां पर लगभग 25 हजार करोड़ रुपए का राजस्व का बकाया है। निजीकरण की आगरा वाली ही कहानी दोहराई जाती है तो पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में आने वाली निजी कंपनी के खाते में क्रमशः 41 हजार करोड़ रुपए और 25 हजार करोड़ रुपए की धनराशि चली जाएगी। पॉवर कॉरपोरेशन को एक झटके में लगभग 66 हजार करोड़ रुपए की चोट लगेगी। दरअसल निजी कंपनियों की नजर इसी बकाए पर है। उप्र के अलावा अन्य प्रांतों में भी निजी कम्पनी ने बकाए की धनराशि हड़प ली है।

Electricity Privatisation in UP: टोरेंट पॉवर कंपनी को सस्ती दर पर बिजली (Torrent Power Company gets electricity at cheaper rates)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि इसके अलावा महंगी दर पर बिजली खरीद कर आगरा में टोरेंट पॉवर कंपनी को सस्ती दर पर बिजली देने के कारण पॉवर कॉरपोरेशन को प्रति वर्ष 275 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है। आगरा में बिजली का औसत विक्रय मूल्य 07.98 रुपए प्रति यूनिट है। पॉवर कॉरपोरेशन टोरेंट पॉवर कंपनी को मात्र 04.13 रुपए प्रति यूनिट में बिजली दे रहा है। टोरेंट कंपनी इसे आगरा में 07.98 रुपए प्रति यूनिट पर बेच कर प्रति वर्ष 800 करोड रुपए का मुनाफा कमा रही है। यदि आगरा का निजीकरण न हुआ होता तो अकेले आगरा शहर से ही पावर कारपोरेशन को 1000 करोड रुपए का मुनाफा मिल रहा होता।
Electricity Privatisation in UP: प्रबंधन की निजी कंपनियों से सांठ गांठ (Management in cahoots with private companies)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि बिजली कर्मी शांति पूर्वक लोकतांत्रिक ढंग से निजीकरण का विगत 82 दिनों से विरोध कर रहे है। अत्यन्त खेद का विषय है कि पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने संघर्ष समिति से वार्ता तक नहीं की है। ऐसा लगता है कि प्रबंधन की निजी कंपनियों से सांठ गांठ है और इसीलिए प्रबन्धन निजीकरण की जिद पर अड़ा है जिससे प्रदेश को अपूर्णीय क्षति होने जा रही है।

Electricity Privatisation in UP: निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाय (The decision of privatisation should be withdrawn immediately)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि बिजली कर्मी चालू वित्तीय वर्ष में अधिकतम राजस्व वसूली के संकल्प के साथ अपने काम में जुट हुए हैं किन्तु पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने निजीकरण का राग अलाप कर अनावश्यक तौर पर औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया है। निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाय तो बिजली कर्मी रिकॉर्ड राजस्व वसूली करने में सक्षम हैं।
Electricity Privatisation in UP: इन जिलों में आज हुई विरोध सभाएं (Protest meetings held in these districts today)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में सोमवार को वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध सभा हुई।
Electricity Privatisation in UP: निजीकरण से बिजली की दरें महंगी होंगी (Electricity rates will become expensive)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि मुंबई की बात करें तो घरेलू बिजली की दरें 17-18 रुपए प्रति यूनिट हैं। जबकि, यूपी में अभी अधिकतम 6.50 रुपए प्रति यूनिट है। निजीकरण के बाद यह दर तीन गुना तक बढ़ सकती है। इससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसके लेकर वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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