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Electricity Privatisation in UP: यूपी में 99 वें दिन भी प्रदर्शन जारी, दिल्ली से मिला ये समर्थन #cmyogi

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Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध में कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं। 99 वें दिन से कर्मचारी विरोध में हैं, मगर सरकार निजीकरण प्र​क्रिया निरस्त नहीं कर रही है। बिजली कर्मचारियों की सीएम योगी से बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग है। छह पांच मार्च को प्रदेश भर में प्रदर्शन करके विरोध सभाएं की गईं।

नई दिल्ली/लखनऊ.

Electricity Privatisation in UP: उप्र में बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) को लेकर कर्मचारी विरोध में हैं। ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी कन्ज्यूमर्स एसोसिएशन के दिल्ली में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में निजीकरण के विरोध में संघर्षरत उप्र के बिजली कर्मचारियों का पुरजोर समर्थन किया गया। ​बिजली कर्मचारियों ने बीते दिनों ही बिजली निजीकरण के विरोध में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम की तिथियां जारी कीं। जिसके चलते विरोध सभाएं हो रही हैं। 99 वें दिन से कर्मचारियों का विरोध जारी है। निजीकरण से नौकरियां जाएंगी। कर्मचारी लगातार स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले रहे हैं। कर्मचारियों और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के साथ ही छह केंद्रीय श्रम संघों भी बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) के विरोध में साथ हैं। संगठनों की मांग है कि निजीकरण प्रक्रिया गैरकानूनी है। जिसे सीएम योगी तत्काल निजीकरण निरस्त करें। छह को समस्त जनपदों, परियोजना मुख्यालयों और राजधानी लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किए गए।

बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) का जब ऐलान किया तो बिजली कर्मचारी विरोध आए। बिजली कर्मचारी का लगातार विरोध में प्रदर्शन जारी है। हर दिन बिजली कर्मचा​री और संघर्ष समिति पदाधिकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर, अभी तक बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त नहीं हुई है।

Electricity Privatisation in UP: 99वें दिन बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी (Protest by electricity employees continues on the 99th day)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: 99वें दिन बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी (Protest by electricity employees continues on the 99th day)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी है। अब ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी कन्ज्यूमर्स एसोसिएशन ने उप्र में बिजली के निजीकरण का विरोध किया है। इसके साथ ही विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज गुरुवार को भी लगातार 99वें दिन बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा। ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी कन्ज्यूमर्स एसोसिएशन के दिल्ली में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में निजीकरण के विरोध में संघर्षरत उप्र के बिजली कर्मचारियों का पुरजोर समर्थन किया गया।

Electricity Privatisation in UP: बिजली कर्मचारियों के साथ उपभोक्ताओं की संयुक्त रैलियां होंगी (There will be joint rallies of consumers with electricity employees)

ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी कन्ज्यूमर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने किया। सम्मेलन में 14 प्रान्तों के बिजली उपभोक्ताओं के संगठन सम्मिलित हुए। सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित कर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय को निरस्त करने की मांग की गई। सम्मेलन में ये निर्णय लिया गया कि बिजली उपभोक्ताओं खासकर घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों के व्यापक हित में उप्र में बिजली के निजीकरण का विरोध किया जायेगा। इस हेतु प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों के साथ उपभोक्ताओं की संयुक्त रैलियां करने का कार्यक्रम बनाया जाएगा।

Electricity Privatisation in UP: उपभोक्ता निजीकरण के विरोध में सड़कों पर आए (Consumers came out on the streets to protest against privatisation)
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Electricity Privatisation in UP: उपभोक्ता निजीकरण के विरोध में सड़कों पर आए (Consumers came out on the streets to protest against privatisation)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि ऑल इंडिया इलेक्ट्रिसिटी कन्ज्यूमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष स्वपन घोष और महामंत्री वेणुगोपाल ने कहा कि निजी क्षेत्र मुनाफे के लिए काम करता है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां सेवा के लिए कार्य कर रही हैं। उप्र में बहुत महंगे बिजली क्रय करार होने के बावजूद उप्र में घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली का टैरिफ निजी क्षेत्र की दिल्ली, मुंबई, कोलकाता की कंपनियों की तुलना में कम है। उन्होंने बिजली उपभोक्ताओं का आह्वान किया कि वे निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों के साथ खुलकर सड़कों पर आए।

Electricity Privatisation in UP: अयोध्या में जन जागरण सभा की गयी (Public awareness meeting held in Ayodhya)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि बिजली के निजीकरण के विरोध में चलाए जा रहे जन जागरण कार्यक्रम के क्रम में संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों द्वारा कल बाराबंकी जनपद में जन जागरण सभा की गयी और बाराबंकी के मा सांसद को और बाराबंकी सदर के विधायक को बिजली के निजीकरण से आम जनता को होने वाले भारी नुकसान के बारे में ज्ञापन देकर अवगत कराया गया। आज अयोध्या में जन जागरण सभा की गयी।

Electricity Privatisation in UP: इन जिलों में विरोध प्रदर्शन (Protests in these districts)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गुरुवार को वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध सभा हुई। जिसमें कर्मचारियों ने अपना आक्रोश जताया. कहा कि ये प्रदर्शन यूं ही जारी रहे।

Electricity Privatisation in UP: छह केन्द्रीय श्रम संघों की सीएम से अपील (Appeal of six central labor unions to CM)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: छह केन्द्रीय श्रम संघों की सीएम से अपील (Appeal of six central labor unions to CM)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे बताते हैं कि यूपी में बिजली निजीकरण के विरोध में छह केन्द्रीय श्रम संघ सामने आए हैं। सभी श्रम संघ के पदाधिकारियों ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील है कि बिजली निजीकरण की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार देखकर निजीकरण तत्काल निरस्त करें। हिन्द मजदूर सभा के अरुण गोपाल मिश्र, पीयूष मिश्र, एटक के चन्द्र शेखर, इंटक के दिलीप श्रीवास्तव, सुधीर श्रीवास्तव, सीटू के प्रेम नाथ राय, हेमन्त कुमार सिंह, एआईटीयूटीसी से बीरेंद्र त्रिपाठी और ‘सेवा’ से सीता रावत, मीना ने संयुक्त बैठक कर निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों के आन्दोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि निजीकरण हेतु ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति के मामले में जिस तरह हितों के टकराव के प्रावधान को शिथिल कर दिया गया है उससे यह स्पष्ट हो गया है कि निजीकरण की प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार चल रहा है। केंद्रीय श्रम संगठनों की बैठक की अध्यक्षता एटक के चंद्रशेखर ने की।

Electricity Privatisation in UP: पावर कार्पोरेशन प्रबंधन निजीकरण का राग बंद करे (Power Corporation management should stop the rant of privatization)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पुनः कहा है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन निजीकरण का राग बंद कर दें और बिजली कर्मचारियों को विश्वास में लेकर सुधार की प्रक्रिया में लगे। बिजली कर्मी सुधार चाहते हैं और निजीकरण के विरोध में अनावश्यक बिजली कर्मियों की ऊर्जा लग रही है। यही ऊर्जा सुधार में लगे तो बिजली की व्यवस्था में और उत्तरोत्तर सुधार होगा।

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