Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी हैहै। 98 वें दिन से कर्मचारी विरोध कर रहे हैं, मगर सरकार निजीकरण प्रक्रिया निरस्त नहीं कर रही है। बिजली कर्मचारियों की सीएम योगी से बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग है। पांच मार्च को प्रदेश भर में प्रदर्शन करके विरोध सभाएं की गईं।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश.
Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) को लेकर कर्मचारी विरोध में हैं। बिजली कर्मचारियों ने बीते दिनों ही बिजली निजीकरण के विरोध में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम की तिथियां जारी कीं। जिसके चलते विरोध सभाएं हो रही हैं। 98 वें दिन से कर्मचारियों का विरोध जारी है। कर्मचारियों का आरोप है कि निजीकरण की वजह से नौकरियां जाएंगी। इसलिए तो बिजली कर्मचारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति हो रही है। इसके लिए निरंकुश अधिकारी जिम्मेदार हैं। कर्मचारियों और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के साथ ही छह केंद्रीय श्रम संघों की मांग है कि बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) की प्रक्रिया की गैरकानूनी है। सीएम योगी से मांग है कि तत्काल निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाए। 05 मार्च को समस्त जनपदों, परियोजना मुख्यालयों और राजधानी लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किए जाएंगे।
बता दें कि योगी सरकार ने बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) का जब ऐलान किया तो बिजली कर्मचारी विरोध आए। बिजली कर्मचारी लगातार विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। हर दिन बिजली कर्मचारी और संघर्ष समिति पदाधिकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर, अभी तक बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त नहीं हुई है।

Electricity Privatisation in UP: संघर्ष समिति केंद्रीय पदाधिकारियों की लखनऊ में बैठक (Sangharsh Samiti central officials meeting in Lucknow)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि बिजली के निजीकरण के विरोध में प्रांत भर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। अब छह केंद्रीय श्रम संघों ने बिजली का निजीकरण निरस्त करने की प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है। प्रदेश में बुधवार को लगातार 98 वें दिन बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजना मुख्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन किया। निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन छह व सात मार्च को भी यथावत जारी रहेगा। संघर्ष के 101वें दिन संघर्ष समिति के सभी घटक श्रम संघों और सेवा संगठनों के केंद्रीय पदाधिकारियों की लखनऊ में बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में निजीकरण निरस्त कराने के लिए संघर्ष तेज करने की रणनीति तय की जाएगी।
Electricity Privatisation in UP: छह केन्द्रीय श्रम संघों की सीएम से अपील (Appeal of six central labor unions to CM)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि छह केन्द्रीय श्रम संघों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि बिजली निजीकरण की प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार को देखते हुए निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त करने की कृपा करें। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि हिन्द मजदूर सभा के अरुण गोपाल मिश्र, पीयूष मिश्र, एटक के चन्द्र शेखर, इंटक के दिलीप श्रीवास्तव, सुधीर श्रीवास्तव, सीटू के प्रेम नाथ राय, हेमन्त कुमार सिंह, एआईटीयूटीसी से बीरेंद्र त्रिपाठी और ‘सेवा’ से सीता रावत, मीना ने संयुक्त बैठक कर निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों के आन्दोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि निजीकरण हेतु ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति के मामले में जिस तरह हितों के टकराव के प्रावधान को शिथिल कर दिया गया है उससे यह स्पष्ट हो गया है कि निजीकरण की प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार चल रहा है। केंद्रीय श्रम संगठनों की बैठक की अध्यक्षता एटक के चंद्रशेखर ने की।

Electricity Privatisation in UP: पावर कार्पोरेशन प्रबंधन निजीकरण का राग बंद करे (Power Corporation management should stop the rant of privatization)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पुनः कहा है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन निजीकरण का राग बंद कर दें और बिजली कर्मचारियों को विश्वास में लेकर सुधार की प्रक्रिया में लगे। बिजली कर्मी सुधार चाहते हैं और निजीकरण के विरोध में अनावश्यक बिजली कर्मियों की ऊर्जा लग रही है। यही ऊर्जा सुधार में लगे तो बिजली की व्यवस्था में और उत्तरोत्तर सुधार होगा।
Electricity Privatisation in UP: इन जिलों में विरोध सभा हुईं (Protest meetings were held in these districts)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बुधवार को वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, प्रयागराज ,अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध सभा हुई।

Electricity Privatisation in UP: 42 जनपदों की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन तक नहीं (Assets of 42 districts not even evaluated)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की सारी प्रक्रिया के पीछे भारी घोटाले के संकेत पहले ही मिल रहे हैं। इसके बाद भी पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन निजीकरण को लेकर इतना उतावला है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 42 जनपदों की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन तक कराना जरूरी नहीं समझा है। इसके बाद ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने के आरएफपी डॉक्यूमेंट में परिवर्तन कर कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट के प्रावधान को ड्रॉप किया है। ये सब गतिविधियां बहुत संदेहास्पद हैं।
Electricity Privatisation in UP: आगरा में टोरेंट पॉवर का 800 करोड़ रुपये का मुनाफा (Torrent Power earns Rs 800 crore profit in Agra)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि विकसित भारत के लिए बिजली का निजीकरण नहीं होना चाहिए. बिजली को सार्वजनिक क्षेत्र में रखा जाए. बिजली को सार्वजनिक उद्योग को रखा जाए। जो एक प्राथमिक आवश्यकता है। जबकि, निजी क्षेत्र के लिए बिजली एक व्यापार है। जबकि, सार्वजनिक क्षेत्र के लिए ये एक सेवा है। आगरा की ही बात करें तो टोरेंट पॉवर कंपनी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। खुद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा (Energy Minister AK Sharma) को सदन में बताना चाहिए था कि टोरेंट पॉवर (Torrent Power) को प्रति यूनिट बिजली किस रेट में प्राप्त हो रही है। कंपनी पॉवर कॉर्पोरशन को प्रति यूनिट कितना राजस्व दे रही है? विगत वर्ष 2023-24 में इस कारण हुए 275 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई कैसे की जाएगी? जबकि कम्पनी ने आगरा में बिजली बेंच कर 800 करोड़ रुपये का मुनाफा फिर कैसे कमाया? यदि निजीकरण के इस प्रयोग की सही समय पर समीक्षा होती तो एक साल में पॉवर कॉर्पोरशन को 1000 करोड़ का मुनाफा हो सकता था।
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