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Electricity Privatisation in UP: बिजली निजीकरण में विरोध सभाएं, 77491 पद समाप्त होंगे !

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Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी विरोध कर रहे हैं. जिसको लेकर विद्युत कर्मचारी संघ के संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश का कहना है कि प्रदेश में निजीकरण करने पर पैमाने पर बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की छटनी होगी। निजीकरण के पहले ही आउटसोर्स कर्मियों को बड़े पैमाने पर हटाया जा रहा है। जो गलत है।

Electricity Privatisation in UP: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र की ओर से निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) के विरोध में जन जागरूकता अभियान जारी है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti, UP) की ओर से प्रदेश में बिजली पंचायत (Bijali Panchayats) आयोजित की गईं। इसको लेकर केंद्रीय संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने को लेकर योजनाएं बना रहे हैं। बिजली के निजीकरण के बाद पैमाने पर बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की छटनी होगी। निजीकरण (Privatization Of Electricity) के पहले ही आउटसोर्स कर्मियों (outsourced workers) को बड़े पैमाने पर हटाया जा रहा है। बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा है। लगातार चौथे दिन बिजली कर्मियों ने काली पट्टी (black bands) बांधकर विरोध दर्ज किया। प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज किया। विरोध में सभाएं की जा रही हैं। काली पट्टी बांधकर विरोध सभा (Protest Meetings) करने का अभियान 18 जनवरी को भी जारी रहेगा।

बता दें कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश (Vidyut Karamchari Samyukta Sangharsh Samiti, Uttar Pradesh) ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) जी से अपील की है। वे इस बारे में दखल दें। क्योंकि, बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) के प्लान अन्य प्रदेश में विफल हो चुके हैं। विद्युत वितरण के निजीकरण (Privatization Of Electricity) के प्रयोग को देश के सबसे बड़े प्रांत उत्तर प्रदेश में नहीं थोपा जाय। ये गलत है।

Electricity Privatisation in UP: बिजली पंचायत हुईं और अब विरोध सभाएं (Bijali Panchayats held and now protest meetings)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: बिजली पंचायत हुईं और अब विरोध सभाएं (Bijali Panchayats held and now protest meetings)

उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण (Privatization Of Electricity) को लेकर बिजली कर्मचारियों का विरोध जारी है। ​इसको लेकर लगातार बिजली पंचायत (Electricity Panchayats) हुईं। जिसमें आगरा, लखनऊ, गोरखपुर और झाँसी, प्रयागराज में भी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti) की बिजली पंचायत पांच जनवरी को हुई थीं। बिजली के निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) के निर्णय के विरोध में लगातार कर्मचारी जिलों में प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध सभाएं हो रही हैं। जिसमें निजीकरण का विफल प्रयोग देश के सबसे बड़े प्रान्त में थोपने की कोशिश हुई तो प्रबल प्रतिकार होगा।

Electricity Privatisation in UP: बिजलीकर्मी काली पट्टी बांधकर कर रहे विरोध (Electricity workers are protesting by tying black bands)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की ओर से केंद्रीय पदाधिकारियों ने शुक्रवार को विरोध सभाएं कीं। जिसमें विद्युत वितरण के निजीकरण के विरोध में जन जागरण अभियान जारी रखने पर चर्चा की। संघर्ष समिति ने कहा है कि बिजलीकर्मी काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे हैं.

Electricity Privatisation in UP: संविदा कर्मियों की छटनी की जा रही (Contract workers are being retrenched)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: संविदा कर्मियों की छटनी की जा रही (Contract workers are being retrenched)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि निजीकरण के बाद बिजली कर्मियों ,जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं की बड़े पैमाने पर छंटनी होने वाली है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में कर्मचारियों के 44330 पद हैं और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में कर्मचारियों के 33161 पद है। जो करीब 77491 पद हैं। निजीकण होने पर ये 77491पद समाप्त हो जाएंगे। स्वाभाविक तौर पर कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छटनी होगी। इसमें 50 हजार संविदा कर्मी, 23818 तकनीशियन और अन्य कर्मचारी,2154 जूनियर इंजीनियरों और 1518 अभियंताओं के पद हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण होने के पहले ही संविदा कर्मियों की छटनी की जा रही है। जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा है।

Electricity Privatisation in UP: बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को वीआरएस देकर हटाया जाएगा (Employees will be removed on a large scale by giving VRS)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Electricity Employees Joint Sangharsh Samiti UP) उप्र के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि निजीकरण के बाद दिल्ली और उड़ीसा में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को वीआरएस देकर हटाया गया था। आगरा में टोरेंट पॉवर कंपनी ने पॉवर कॉरपोरेशन के एक भी कर्मचारी को नहीं रखा था। ग्रेटर नोएडा में नोएडा पॉवर कंपनी ने भी उप्र राज्य विद्युत परिषद के एक भी कर्मचारी को नहीं रखा था। इन सबको देखते हुए बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि निजीकरण के लिए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने के आरएफपी डॉक्यूमेंट में अर्ली वीआरएस का उल्लेख किया गया है। सामान्यतया वीआरएस 30-35 साल की नौकरी वाले कर्मचारियों के लिए होता है। किन्तु अर्ली वीआरएस से ऐसा प्रतीत होता है कि बहुत कम सर्विस वाले कर्मचारियों की छुट्टी की जाने वाली है।

Electricity Privatisation in UP: यूपी के इन जिलों में विरोध सभाएं (Protest meetings in these districts of UP)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: यूपी के इन जिलों में विरोध सभाएं (Protest meetings in these districts of UP)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश में वाराणसी, आगरा, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा,कानपुर, मेरठ, गाजियाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, बरेली, देवी पाटन, सुल्तानपुर, अयोध्या, झांसी, बांदा, उरई, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, पनकी, हरदुआगंज, परीक्षा, जवाहरपुर, ओबरा, और अनपरा में बड़ी सभाएं की गई।

Electricity Privatisation in UP: निगम की भूमि निजी घरानों को सौंपने की साजिश’ (Conspiracy to hand over all the land of the corporation to private houses’)


विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि प्रदेश में निजीकरण को लेकर पॉवर कॉरपोरेशन ने नियम ताक पर रखकर कार्य किया है। निजीकरण को लेकर जो मसौदा तैयार किया है। उसमें पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम की समस्त भूमि मात्र 01 रुपए प्रति वर्ष की लीज पर निजी कंपनी को दिए जाने का प्रस्ताव बनाया है। जिससे लाखों करोड़ रुपये की निगमों की परिसंपत्तियों को बिना मूल्यांकन किए कौड़ियों के दाम निजी घरानों को सौंपने की साजिश है। जो गलत है। ये कर्मचारियों के साथ-साथ बिजली उपभोक्ताओं से भी धोखा है। प्रयागराज में पांच जनवरी 2025 को आयोजित बिजली पंचायत में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

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