Electricity Privatisation in UP: यूपी विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल महोदया आनंदीबेन पटेल ने बजट अभिभाषण में बिजली व्यवस्था की प्रशंसा की। मगर, बिजली कर्मचारियों का कहना है कि इस बारे में सरकार जल्द बिजली निजीकरण की प्रक्रिया रोक दें। निजीकरण के विरोध में उत्तर प्रदेश में प्रदेश व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी है।
लखनऊ/ उत्तर प्रदेश.
Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण (Electricity Privatization) के विरोध में बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन गुरुवार को 85 वें दिन भी जारी रहा। जिसको लेकर प्रदेश के जिलों में विरोध सभाएं भी हुईं। इसके साथ ही यूपी सरकार के बजट पर बिजली कर्मचारी और अधिकारियों ने चर्चा की। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti UP) के पदाधिकारियों ने कहा कि उप्र की राज्यपाल महोदया के अभिभाषण के बाद गुरुवार दोपहर बजट पेश किया गया। जिसमें जिस प्रकार बिजली व्यवस्था की प्रशंसा की गई है। उसे देखकर बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए। यूपी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना (UP government’s Finance Minister Suresh Khanna) ने प्रदेश का बजट जारी किया। मगर, बजट के मुताबिक, बिजली के क्षेत्र में कोई नई योजना नहीं शुरू की गई है। जो एक निराशाजनक बात है। विधानसभा में लगातार तीन दिन से बिजली आपूर्ति की बेहतर स्थिति बताई जा रही है। ऐसे में सीएम योगी को आगे आकर बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त कर देनी चाहिए।
बता दें कि जब से योगी सरकार ने प्रदेश में बिजली निजीकरण का ऐलान किया। तभी से यूपी में बिजली कर्मचारी विरोध में उतर आए हैं। हर दिन बिजली कर्मचारी और अधिकारी प्रदेश में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर, अभी तक बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त नहीं की गई है। बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग है कि संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की मांग पर प्रभावी हस्तक्षेप करके निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त कराएं। जिससे कर्मचारी एकजुट होकर सीएम योगी के नेतृत्व में उप्र को देश में पहले नंबर पर लाकर दिखा देंगे।

Electricity Privatisation in UP:तेरे दीवारों दर जगमगा देंगे हम (We will light up your walls)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि यूपी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में आज बजट पेश किया। उन्होंने बिजली व्यवस्था को लेकर कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। लोगों के घरों में रोशनी है। गर्मियों में निर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि “तेरे दीवारों दर जगमगा देंगे हम”…। इस पर संघर्ष समिति का कहना है कि इससे अधिक बिजली व्यवस्था की प्रशंसा और क्या हो सकती है? संघर्ष समिति ने कहा कि इसके पहले महामहिम राज्यपाल भी अपने अभिभाषण में विद्युत व्यवस्था की प्रशंसा कर चुकी हैं।
Electricity Privatisation in UP: बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया (Record of electricity production made)
संघर्ष समिति उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा भी समय समय पर ट्वीट करके बिजली व्यवस्था की उपलब्धियां गिनाते रहते है। किन्तु इस सबके बावजूद पता नहीं क्यों उन्होंने बिजली के निजीकरण की जिद पकड़ रखी है ? बजट में यह कहा गया है कि बिजली व्यवस्था में इतना ज्यादा सुधार हुआ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे 35 मिनट, तहसील में 22 घंटे 36 मिनट और सभी जनपदों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। 4680 कृषि फीडरों को अलग किए जाने के लक्ष्य के सापेक्ष 3817 कृषि फीडर अलग किए जा चुके हैं। उत्पादन निगम ने 37056 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। एक लाख 88 हजार निजी नलकूपों को नए कनेक्शन दिए गए हैं। यह सब स्वयंमेव सर्वांगीण सफलता की कहानी कह रहा है। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि बिजली कर्मी इससे भी अधिक युगांतरकारी सुधार करने के लिए संकल्प बद्ध हैं। उप्र के ऊर्जा मंत्री निजीकरण की जिद छोड दें। निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए तो बिजली कर्मी बिजली व्यवस्था के मामले में उत्तर प्रदेश को देश में पहले नंबर पर लाकर खड़ा कर देंगे।

Electricity Privatisation in UP: आज इन जिलों में विरोध सभाएं हुईं (Protest meetings were held in these districts today)
उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध में वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी, अनपरा, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध सभा हुईं।
Electricity Privatisation in UP: ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद निराशाजनक बजट (Very disappointing budget for the energy sector)
ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने उत्तर प्रदेश के बजट पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट में यह कहा है कि कानून व्यवस्था और बिजली के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। किंतु, खेद का विषय है कि बिजली के क्षेत्र में अभूतपुर सुधार के बावजूद बजट में बिजली के लिए किया गया आवंटन बेहद निराशाजनक है। उन्होंने बताया कि भारी भरकम बजट में बिजली के लिए की गई घोषणा उप्र की बिजली की जरूरतों को देखते हुए नगण्य है। अवस्थापना विकास हेतु 22%, शिक्षा हेतु 13%,कृषि के लिए 11% ,चिकित्सा के लिए 6%, सामाजिक सुरक्षा के लिए 4% और पूंजीगत परिव्यय 20.5% है। अलग से ऊर्जा क्षेत्र के लिए कोई उल्लेख नहीं किया गया है।

Electricity Privatisation in UP: परिणाम अच्छे, नई परियोजना की घोषणा नहीं (Results are good, no new project announced)
ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे का कहना है कि पंप स्टोरेज स्कीम के लिए 50 करोड रुपए, कोल इंडिया लिमिटेड के साथ संयुक्त उपक्रम में सोलर प्लांट के लिए 50 करोड रुपए और एनटीपीसी ग्रीन के साथ संयुक्त उपक्रम में सोलर प्लांट के लिए 80 करोड रुपए का आवंटन किया गया है। उप्र में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग के सापेक्ष यह धनराशि कुछ भी नहीं है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की प्रशंसा तो की गई है। किंतु, उत्पादन निगम के तहत किसी नई परियोजना को लगाने की घोषणा नहीं की गई है।
Electricity Privatisation in UP: ऊर्जा मंत्री बिजली निजीकरण की जिद छोड़ें (Energy Minister should give up his insistence on electricity privatization)
बता दें कि उत्तर प्रदेश को सबसे सस्ती बिजली उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम (Uttar Pradesh State Electricity Generation Corporation) से ही मिलती है। बजट में उत्पादन निगम के लिए किसी नई परियोजना की घोषणा न होना बेहद निराशाजनक है। ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे का कहना है कि जहां एक ओर ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में बिजली की सेहत ठीक नहीं है। वहीं, दूसरी ओर बजट में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा है कि कानून व्यवस्था और बिजली के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। बजट की घोषणा को देखकर ऊर्जा मंत्री को निजीकरण की जिद छोड़ देनी चाहिए। और सार्वजनिक क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में चल रहे ऊर्जा सुधारो को आगे बढ़ाना चाहिए।
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