Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी अब मोमबत्ती जुलूस निकालेंगे। इसके साथ ही बुद्धि-शुद्धि यज्ञ किये जायेंगे। 1 फरवरी को लखनऊ में सभी संगठनों की केन्द्रीय कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक में आन्दोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जायेंगे।
Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश सरकार ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (Dakshinchal Vidyut Vitran Nigam) और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम (Purvanchal Vidyut Vitran Nigam) के निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) का ऐलान किया है। जिसके विरोध में बिजली कर्मचारी उतर आए हैं। प्रदेश में बिजली कर्मचारी लगातार बिजली निजीकरण के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। आक्रोशित बिजली कर्मचारी अलग अलग शहर में विरोध सभाएं और प्रदर्शन कर रहे हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti, UP)के पदाधिकारियों ने अब बिजली निजीकरण को लेकर विरोध प्रदर्शन की विशेष रणनीति बनाई है। आइए, संघर्ष समिति की रणनीति और विरोध प्रदर्शन के बारे में जानते हैं।
Electricity Privatisation in UP: कर्मचारियों ने घेरा था शक्तिभवन (Employees had surrounded Shakti Bhawan)
बिजली निजीकरण के विरोध में बीते दिनों संघर्ष समिति के पदाधिकारी और कर्मचारियों ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शक्तिभवन (Shakti Bhawan in Lucknow) घेर लिया था। शक्तिभवन पर हजारों कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया था। कर्मचारियों ने नारेबाजी की थी। जिसकी वजह से शक्तिभवन मुख्यालय में बिजली निजीकरण को ट्रांजेक्शन कन्सलटेंट नियुक्त करने के लिए प्री-बिडिंग कॉफ्रेंस नहीं हो पाई थी। बिजली कर्मियों के शक्तिभवन घेरने के बाद शक्तिभवन में प्री-बिडिंग कॉफ्रेंस की बैठक दूसरी जगह पर की गई थी। जिससे बिजली कर्मचारियों में आक्रोश और बढ गया है।

Electricity Privatisation in UP: निजीकरण की जल्बादी में पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन Power Corporation chairman in a hurry for privatisation)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी जितेन्द्र सिंह गुर्जर का कहना है कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने कर्मचारियों के गुस्सा और आक्रोश के बाद शक्तिभवन में बैठक नहीं की। पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन ने अन्य स्थान पर चहेते कंसलटेंट्स के साथ गुपचुप मीटिंग की थी। चूंकि प्री-बिडिंग कॉफ्रेंस के लिए निर्धारित स्थान शक्तिभवन मुख्यालय घोषित किया था। अतः किसी अन्य स्थान पर की गयी कोई भी मीटिंग नियमानुसार पूरी तरह से असंवैधानिक है। जिससे साफ है कि पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन निजीकरण की जल्दी में हैं। उन्हें वैधानिक प्रक्रिया का भी कोई ज्ञान नहीं रहा है।
Electricity Privatisation in UP: प्रबन्धन के लिए बुद्धि-शुद्धि यज्ञ करेंगे (Will do Buddhi-Shuddhi Yagna for management)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti) , उप्र के संयोजक (Shailendra Dubey) शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में अब इस सप्ताह में मोमबत्ती जुलूस निकालने और प्रबन्धन के लिए बुद्धि-शुद्धि यज्ञ करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही 1 फरवरी को लखनऊ में सभी श्रम संघों की केन्द्रीय कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक होगी। जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जायेंगे। प्रदेश में बिजली कर्मचारी लगातार काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
Electricity Privatisation in UP: ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट नियुक्त प्रक्रिया अवैधानिक (Process of appointing transaction consultant illegal)
उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध को लेकर नई रणनीति बनाने को लेकर हुई बैठक में संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारी राजीव सिंह, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय, सुहैल आबिद, पी.के.दीक्षित, राजेंद्र घिल्डियाल, चंद्र भूषण उपाध्याय, आर वाई शुक्ला, छोटेलाल दीक्षित, देवेन्द्र पाण्डेय, आर बी सिंह, राम कृपाल यादव, मो वसीम, मायाशंकर तिवारी, राम चरण सिंह, मो इलियास, श्रीचन्द, सरजू त्रिवेदी, योगेन्द्र कुमार, ए.के. श्रीवास्तव, के.एस. रावत, रफीक अहमद, पी एस बाजपेई, जी.पी. सिंह, राम सहारे वर्मा, प्रेम नाथ राय, विशम्भर सिंह एवं राम निवास त्यागी शामिल हुए. बैठक में वक्ताओं ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया को अवैधानिक बताकर तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

Electricity Privatisation in UP: सीएम योगी ये ये मांग (CM Yogi demands this)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी राजीव सिंह का कहना है कि देश के आबादी के हिसाब से सबसे बड़े प्रान्त उप्र में 42 जनपदों की विद्युत वितरण व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है। ये गलत है। क्योंकि, इसमें कुछ पूर्व निर्धारित निजी घरानों के साथ संवैधानिक प्रक्रियाएं ताक पर रखकर हर काम किया जा रहा है। जो एक बड़े घोटाले संकेत है। हम सब का प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी पर पूरा विश्वास है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से अपील की है कि वे निजीकरण के मामले में प्रभावी हस्तक्षेप करने की कृपा करें। जिससे इस मामले में पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन को मनमाने ढंग से कार्य करने से रोका जा सके। निजीकरण की प्रक्रिया वापस हो।
Electricity Privatisation in UP: सरकार की छवि धूमिल होगी (Government’s image will be tarnished)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti) समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि कंसल्टेंट नियुक्त करने हेतु 23 जनवरी को प्रि-बिडिंग कॉन्फ्रेंस शक्तिभवन में होनी थी जिसे शक्तिभवन में न करके गुप-चुप एसएलडीसी के गेस्ट हाउस में किया गया। इसके अतिरिक्त यह जानकारी मिली है कि प्रि-बिडिंग में 03 कम्पनियां प्राइस वाटर हाउस कूपर्स, अर्नस्ट एण्ड यंग तथा ग्रेट थोरॉट(जीटी) सम्मिलित हुईं। उल्लेखनीय है कि यह तीनों कम्पनियां पॉवर कारपोरेशन में पहले से ही कार्य कर रहीं हैं। अतः इन कम्पनियां की कंसल्टेंट के रूप में हितों के टकराव के कारण नियुक्ति नहीं की जा सकती है। संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन की इन कम्पनियों के साथ सांठ-गांठ प्रतीत होती है। प्रबन्धन सरकार को धोखे में रखकर निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है जिससे सरकार की छवि धूमिल हो सकती है। संघर्ष समिति ने इस दृष्टि से मा. मुख्यमंत्री जी से अपील की है कि वे प्रभावी हस्तक्षेप करते हुए निजीकरण की सारी प्रक्रिया निरस्त करने की कृपा करें।

Electricity Privatisation in UP: उपभोक्ताओं और किसानों के लिए बेहद घातक (Extremely dangerous for consumers and farmers)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बैठक में ये निर्णय लिए कि निजीकरण का विरोध को लेकर 27, 28, 29 और 30 जनवरी को समस्त ऊर्जा निगमों के तमाम बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी और अभियन्ता प्रति दिन सभा करके शाम पांच बजे अपने कार्यालय के बाहर मोमबत्ती जुलूस (candlelight procession) निकालेंगे। इसके साथ ही 31 जनवरी को बिजली कर्मी अपने कार्यालयों के बाहर बुद्धि-शुद्धि यज्ञ करेंगे। बुद्धि-शुद्धि यज्ञ (Buddhi-Shuddhi Yagya) के जरिये यह प्रार्थना की जायेगी कि भगवान ऊर्जा मंत्री और पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन को सद्बुद्धि दें। जिससे आम उपभोक्ताओं और किसानों के लिए बेहद घातक बिजली का निजीकरण वापस हो।
Electricity Privatisation in UP: तीन गुना बिजली दरें होंगी (Electricity rates will be three times)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली में दिये गये बयान का स्वागत किया है। जिसमें मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था की तारीफ की है। दिल्ली में चल रही निजी क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में आम उपभोक्ताओं के लिए उत्तर प्रदेश की तुलना में तीन गुना बिजली दरें होने की बात कही है। संघर्ष समिति ने कहा कि बुद्धि-शुद्धि यज्ञ इसलिए जरूरी हो गया है कि जिससे उत्तर प्रदेश में भी बिजली का निजीकरण होने पर आम उपभोक्ताओं को तीन गुना बिजली दरें न भुगतनी पड़ें।
Electricity Privatisation in UP: महाकुंभ की बिजली व्यवस्था बेहतर (Better electricity system of Mahakumbh)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि महाकुंभ को भारत की सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा है कि बिजली कर्मियों ने 05 जनवरी को प्रयागराज में हुई बिजली पंचायत में महाकुंभ में दिन रात कार्य करके श्रेष्ठतम बिजली आपूर्ति की शपथ ली थी। आज महाकुंभ की बिजली व्यवस्था पर पूरा भारत गर्व कर रहा है। अब ये निर्णय लिया है कि प्रयागराज के सभी बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी और अभियन्ता 29 जनवरी को मौनी अमावस्या के होने वाले स्नान में बिजली व्यवस्था श्रेष्ठतम बनाये रखने के लिए 27, 28 और 29 जनवरी को दिन-रात प्रयासरत रहेंगे।
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