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Electricity Privatisation in UP: निजीकरण के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन में कर्मचारियों ने ​दिखाई ताकत #kisan

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Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश, राजस्थान और चंडीगढ़ में बिजली निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है। उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को यूपी में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन करके अपनी ताकत दिखाई।

Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश सरकार, राजस्थान सरकार और चंडीगढ़ में बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation) की घोषणा है। जिसको लेकर बिजली कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। यूपी सरकार ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (Dakshinchal Vidyut Vitran Nigam) और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम (Purvanchal Vidyut Vitran Nigam) के निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) का ऐलान किया है। बिजली कर्मचारी प्रदेश में लम्बे समय से बिजली निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं। आक्रोशित बिजली कर्मचारियों की ओर से अलग-अलग जिले और शहर में विरोध सभाएं और प्रदर्शन किए जा रहे हैं। यूपी में बिजली कर्मचारी शुक्रवार को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन (Nationwide Protest)किया। बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश भर मे विरोध प्रदर्शन करके मोमबत्ती जुलूस (candle marches) निकाले।

बता दें कि बिजली के निजीकरण के विरोध में देश भर में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। सुधार और सुझाव देने के लिए ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of Energy) की ओर से गठित मंत्री समूह के अध्ययन और रिपोर्ट आने तक निजीकरण के सभी निर्णय निरस्त किए जाएं। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (National Coordination Committee of Electricity Employees and Engineers) के आवाहन पर आज देश के सभी प्रांतों में बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने बिजली के निजीकरण के विरोध में जोरदार विरोध प्रदर्शन किए। चंडीगढ़ की बिजली व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपी गई तो कल एक फरवरी को भी राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

Electricity Privatisation in UP: देश भर में 27 लाख बिजली कर्मी सड़कों पर उतरे (27 lakh electricity workers took to the streets across the country)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: देश भर में 27 लाख बिजली कर्मी सड़कों पर उतरे (27 lakh electricity workers took to the streets across the country)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Sanyukt Sangharsh Samiti, UP,) उप्र के संयोजक (convenor Shailendra Dubey) शैलेंद्र दुबे ने बताया कि चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बिजली वितरण का मनमाने ढंग से निजीकरण किया जा रहा है। जिसके विरोध में देश भर में 27 लाख बिजली कर्मी आज सड़कों पर उतरे। मुनाफे में चल रहे चंडीगढ़ विद्युत विभाग को एमिनेंट इलेक्ट्रिक डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को सौंपने के निर्णय से बिजली कर्मचारियों में गुस्सा फूट पड़ा है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के जरिए उत्तर प्रदेश के 42 जिलों की बिजली व्यवस्था निजी घरानों को सौंपने की तैयारी हो रही है।

Electricity Privatisation in UP: राजस्थान में एनटीपीसी और कोल इंडिया लिमिटेड को हैंडोवर (Handover to NTPC and Coal India Limited in Rajasthan)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि राजस्थान में विद्युत वितरण के निजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। उत्पादन निगम को जॉइंट वेंचर के नाम पर एनटीपीसी और कोल इंडिया लिमिटेड (NTPC and Coal India Limited) को हैंड ओवर किया जा रहा है।

Electricity Privatisation in UP: एक मंत्री समूह का गठन किया (A ministerial group formed)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: एक मंत्री समूह का गठन किया (A ministerial group formed)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने केंद्रीय ऊर्जा राज्य (Energy Ministry of the Government of India) मंत्री श्रीपद यश नायक (Shripad Yash Nayak) के नेतृत्व में एक मंत्री समूह का गठन किया है। इस मंत्री समूह में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री सम्मिलित है। इसके संयोजक उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री (Uttar Pradesh Energy Minister Arvind Kumar Sharma) अरविंद कुमार शर्मा हैं।

Electricity Privatisation in UP: उप्र, चंडीगढ़ और राजस्थान में एकतरफा निर्णय (Unilateral decision in UP, Chandigarh and Rajasthan)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि मंत्री समूह के टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस में विद्युत वितरण व्यवस्था के वित्तीय सुधार, ऋणों और घाटे से उबारने के लिए विस्तृत अध्ययन कर सुझाव देने का कार्य है। ऐसे में उप्र, चंडीगढ़ और राजस्थान में विद्युत वितरण के निजीकरण के एकतरफा निर्णय को तत्काल रद्द किया जाय। भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने सितम्बर 2020 में विद्युत वितरण के निजीकरण हेतु स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का एक ड्राफ्ट जारी किया था। ऊर्जा मंत्रालय ने अभी तक इस ड्राफ्ट को अंतिम रूप नहीं दिया है और अब विद्युत वितरण की व्यवस्था में सुधार हेतु उसे कर्ज और घाटे से उबारने हेतु एक मंत्री समूह का गठन कर दिया है।

Electricity Privatisation in UP: मंत्री समूह की रिपोर्ट आने पर निजीकरण टले (Privatization postponed after the report of the Group of Ministers comes)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: मंत्री समूह की रिपोर्ट आने पर निजीकरण टले (Privatization postponed after the report of the Group of Ministers comes)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि इस मंत्री समूह के सामने बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों के विभिन्न प्रांतों के और राष्ट्रीय संगठन अपनी बात रखेंगे। मंत्री समूह को कर्मचारी संगठनों से बात करना चाहिए और उनके प्रस्ताव पर भी विचार करना चाहिए। इस दृष्टि से मंत्री समूह की रिपोर्ट आने तक निजीकरण के तमाम फैसले तत्काल वापस लिया जाना बेहद जरूरी है।

Electricity Privatisation in UP: इन जिलों में किया प्रदर्शन (Protests held in these districts)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि निजीकरण से पहले भय का वातावरण उत्पन्न करने के लिए बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को निकाला जा रहा है। जिससे बिजली कर्मियों में गुस्सा बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अलीगढ़ , मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, जवाहरपुर, पनकी, हरदुआगंज, ओबरा, पिपरी, अनपरा में बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किए।

Electricity Privatisation in UP: बुद्धि शुद्धि यज्ञ स्थगत (Buddhi Shuddhi Yagna postponed)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: महंगी होंगी बिजली दरें (Electricity rates will be three times)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि जिस भी प्रदेश या शहर में बिजली का निजीकरण किया गया है। वहां पर बिजली दरें बढी हैं। उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था निजी क्षेत्र में गई तो आम उपभोक्ताओं के लिए उत्तर प्रदेश की तुलना में तीन गुना बिजली दरें होने की बात कही है। जिससे उत्तर प्रदेश में भी बिजली का निजीकरण होने पर आम उपभोक्ताओं को तीन गुना बिजली दरें न भुगतनी पड़ें।

Electricity Privatisation in UP: बुद्धि शुद्धि यज्ञ स्थगत (Buddhi Shuddhi Yagna postponed)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि बिजली निजीकरण के विरोध में 31 जनवरी को होने वाले राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन को लेकर अब संघर्ष समिति का पहले से प्रस्तावति 31 जनवरी को प्रस्तावित बुद्धि शुद्धि यज्ञ के कार्यक्रम फिलहाल स्थगत कर दिया है। बुद्धि शुद्धि यज्ञ की अगली तारीख शीघ्र ही घोषित की जाएगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी और एक फरवरी को समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। 01 फरवरी को अगले कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे।

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