Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की उत्तर प्रदेश में आगरा, लखनऊ, गोरखपुर और झांसी में बिजली पंचायत हो चुकी हैं। अब पांच जनवरी को प्रयागराज में कर्मचारियों और अधिकारियों की पांच जनवरी को बिजली पंचायत होनी है। इससे पहले ही एक जनवरी को प्रदेश में बिजली कर्मचारी और अधिकारी काला दिवस मनाएंगे। आइए, कर्मचारियों के आक्रोश और काला दिवस के बारे में जानते हैं…
लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में बिजली के निजीकरण (Electricity Privatisation) का ऐलान किया है। जिससे चलते सरकार अब पूर्वाचंल डिस्कॉम (Purvanchal Discom ) और दक्षिणांचल डिस्कॉम (Dakshinchal Discom) को निजी हाथों में देने जा रही है। जिसको लेकर ही प्रदेश में बिजली कर्मचारियों में आक्रोश है। बिजली निजीकरण के विरोध में (कर्मचारियों ने सरकार के ऐलान के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti UP) की ओर से बिजली पंचायत (Bijali Panchayat) आयोजित की जा रही हैं। अब तक चार बिजली पंचायत हो चुकी हैं। जिसमें कर्मचारियों ने फैसला किया है कि प्रदेश में एक जनवरी यानी बुधवार को काला दिवस मनाया जाएगा। जिसके चलते कर्मचारी काली पट्टी बांध कर कार्य करेंगे। इसके साथ ही हर जिले में पंचायत होगी। इसके साथ ही बिजली रथ भी निकलेगा।
बता दें कि 27 दिसंबर को गोरखपुर और झाँसी में बिजली पंचायत (Bijali Panchayat) हुई थी। जिसमें संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मियों को मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास है। बिजली कर्मचारी लगातार सुधार में लगे हुए हैं। किन्तु, यूपी में पॉवर कॉरपोरेशन (Power Corporation) प्रबंधन निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) की एकतरफा कार्रवाई कर अनावश्यक तौर पर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण बना रहा है। गोरखपुर और झाँसी की बिजली पंचायत में बिजली कर्मियों, संविदा कर्मियों और अभियंताओं की भारी भीड़ रही।

Electricity Privatisation in UP: एकतरफा टेंडर प्रक्रिया शुरू होने पर आंदोलन करेंगे (Will protest if one-sided tender process starts)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि ऊर्जा मंत्री और पावर कारपोरेशन के चेयरमैन बिना मूल्यांकन के अरबों रुपये की परिसंपत्ति कौड़ियों के भाव निजी हाथों में देने पर आमादा है। पूर्व में ऊर्जा मंत्री के साथ हुए दो समझौता के अनुसार बिजली विभाग का निजीकरण नहीं हो सकता है। समझौते में वर्तमान बिजली व्यवस्था सुधारने का जिक्र है। इसके बावजूद, निजीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आगरा में निजीकरण हुआ। इससे हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री को पूरी बात नहीं बताई जा रही है। मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है। लखनऊ में तय कर लिया गया है कि यदि एकतरफा टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई या निजीकरण प्रक्रिया तेज हुई तो पूरे देश में आंदोलन शुरू किया जाएगा। हमारे आंदोलन की रूपरेखा क्या होगी।
Electricity Privatisation in UP: एक जनवरी में बिजलीकर्मी काली पट्टी बांधकर जताएंगे विरोध (Electricity workers will protest by wearing black bands on January 1)
उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्वांचल डिस्कॉम (Purvanchal Discom ) और दक्षिणांचल डिस्कॉम (Dakshinchal Discom) के निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) के ऐलान से विद्युत कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। इसको लेकर यूपी में लगातार विद्युत कर्मचारी विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं। सबसे पहले बिजली कर्मचरियों की आगरा में बिजली पंचायत (Bijli Panchayat) हुई थी। इसके बाद विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti) उप्र की ओर से लखनऊ और गोरखपुर में बिजली पंचायत (Bijli Panchayat) हुई। गोरखपुर की बिजली पंचायत में निर्णायक संघर्ष का निर्णय लिया गया। जिसके चलते ही प्रदेश में एक जनवरी में बिजलीकर्मी काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करेंगे। ऊर्जा मंत्री और प्रबन्धन पर औद्योगिक अशांति का वातावरण बनाने का काम कर रहे हैं। सीएम योगी के प्रति बिजली कर्मचारियों ने विश्वास व्यक्त किया है। उनसे बिजली का निजीकरण रोकने के प्रभावी करने को हस्तक्षेप की अपील की है।

Electricity Privatisation in UP: उप्र में लाइन हानियां 17 प्रतिशत कीं (Line losses reduced to 17 percent)
बिजली कर्मचारियों ने हर बिजली पंचायत में कहा कि बिजली कर्मचारियों का प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा विश्वास है। बिजली कर्मी उनके नेतृत्व में लगातार सुधार करने में लगे हैं। सत्र 2016-17 की बात करें तो प्रदेश में 41 प्रतिशत लाइन हानियां थीं। जो सत्र 2023-24 में घटकर 17 प्रतिशत हो गई है। बिजली कर्मी अगले एक दो वर्ष में लाइन हानियों को 15 प्रतिशत से नीचे लाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। बिजली कर्मचारी के बीच अच्छा कार्य करने का वातावरण चल रहा था। जिसे पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने अचानक निजीकरण की घोषणा करके बिगाड़ दिया है।
Electricity Privatisation in UP: निजीकरण से एक झटके में बिजली की दरें तीन गुना बढ़ेंगी (Electricity rates will increase three times in one stroke)
संघर्ष समिति ने इंजीनियर (Engineer Jitendra Singh Gurjar) जितेंद्र सिंह गुर्जर का कहना है कि सरकारी विद्युत वितरण निगम (electricity distribution corporations) घाटा उठाकर लागत से कम मूल्य पर घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली दी जाती है। निजी कंपनी मुनाफे के लिए करेंगी। ऐसे में निजीकरण के बाद प्रदेश में बिजली की दरों में काफी वृद्धि होगी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि मुम्बई में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें 17.71 रुपए प्रति यूनिट हैं। जबकि उप्र में सरकारी क्षेत्र में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अधिकतम दरें रु 06.50 प्रति यूनिट है। जिससे स्पष्ट है कि निजीकरण होते ही एक झटके में बिजली की दरें तीन गुना बढ़ जाएंगी।

Electricity Privatisation in UP: निगम की समस्त भूमि निजी घरानों को सौंपने की साजिश’ (Conspiracy to hand over all the land of the corporation to private houses’)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि प्रदेश में निजीकरण को लेकर पॉवर कॉरपोरेशन की ओर से नियम ताक पर रखकर कार्य किया जा रहा है। निजीकरण को लेकर जो मसौदा तैयार किया है। उसमें पूर्वांचल और दक्षिणांचल डिस्कॉम की समस्त भूमि मात्र 01 रुपए प्रति वर्ष की लीज पर निजी कंपनी को दिए जाने का प्रस्ताव बनाया गया है। इसी प्रकार लाखों करोड़ रुपये की निगमों की परिसंपत्तियों को बिना मूल्यांकन किए कौड़ियों के दाम निजी घरानों को सौंपने की साजिश है। जो गलत है। ये कर्मचारियों के साथ-साथ बिजली उपभोक्ताओं से भी धोखा है। प्रयागराज में पांच जनवरी 2025 को आयोजित बिजली पंचायत में आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
Electricity Privatisation in UP: झांसी की बिजली पंचायत (Electricity Panchayat in Jhansi)
गोरखपुर के बाद 29 झांसी में बिजली पंचायत हुई। जिसमें वक्ताओं ने कहा कि झांसी की बिजली पंचायत में निजीकरण के नाम पर बड़े घोटाले होने जा रहा है। इलेक्ट्सिटी एक्ट-2003 को दरकिनार करके निजीकरण किया जा रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि इस निजीकरण से प्रदेश के 75 में से 42 जिले की बिजली निजी हाथों में चली जाएगी। इससे न सिर्फ किसान बल्कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के सामने महंगी बिजली लेना मजबूरी होगी। हमने प्रयागराज में बिजली पंचायत के बाद सभी जिलों में बिजली पंचायत होगी और बिजली रथ निकलेगा। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2003 के तहत यदि कोई परिसंपत्ति दी जाती है तो उसकी कीमत का मूल्यांकन जरूरी है।

Electricity Privatisation in UP: विफलता से बौखलाए पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन (Power Corporation Chairman frustrated by failure)
विफलता से बौखलाए पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन (Power Corporation Chairman frustrated by failure) बिजली पंचायत में वक्ताओं ने कहा कि गोरखपुर बिजली पंचायत में भी यह आरोप लगाया गया कि अपनी विफलता से बौखलाए पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन और पूर्वांचल एवं पश्चिमांचल के प्रबंध निदेशक वीसी के माध्यम से मनमाने ढंग से लोगों को निलंबित और दंडित कर भय का वातावरण बना रहे हैं। जो पूरी तरह उकसाने वाला कदम है। यदि इनके मनमाने पन पर अंकुश न लगाया गया तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी और गम्भीर परिणाम होंगे।
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