Electricity Privatisation in UP: यदि निजीकरण होता है तो कॉमन कैडर के मुख्य अभियंता, अधिशासी भियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर सहित 28,489 स्थायी पद समाप्त हो जाएंगे। जबकि संविदा पर कार्यरत करीब 50,000 कर्मियों की नौकरियां भी खतरे में पड़ जाएंगी।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश.
Electricity Privatisation in UP: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti Uttar Pradesh) उत्तर प्रदेश की ओर से बिजली के निजीकरण के खिलाफ प्रदेश व्यापी विरोध प्रदर्शन 80 वें दिन भी जारी रहा। संघर्ष समिति ने मांग की है कि बिजली उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बिजली निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए। संघर्ष समिति ने कहा है कि वह सुधार और संघर्ष का मंत्र लेकर जहां निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। सुधार के लिए भी बिजली कर्मचारियों का आवाहन कर रहे हैं किन्तु प्रबंधन निजीकरण हेतु भय का वातावरण बना रहा है। जिससे सुधार के कार्यक्रमों में बाधा आ रही है।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण से हजारों कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। यदि निजीकरण होता है तो कॉमन कैडर के मुख्य अभियंता, अधिशासी भियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर सहित 28,489 स्थायी पद समाप्त हो जाएंगे। जबकि संविदा पर कार्यरत करीब 50,000 कर्मियों की नौकरियां भी खतरे में पड़ जाएंगी। निजीकरण के चलते किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। निजी कंपनियां किसानों को मुफ्त बिजली नहीं देंगी। इससे 7.5 हॉर्स पावर के ट्यूबवेल के मात्र 6 घंटे चलाने पर 12-15 हजार रुपए प्रति माह का बिजली बिल आएगा।वहीं गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं की सब्सिडी भी समाप्त हो जाएगी।

Electricity Privatisation in UP: बिजली की दरें महंगी होंगी (Electricity rates will become expensive)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि मुंबई का उदाहरण ही देख लीजिए वहां घरेलू बिजली की दरें 17-18 रुपए प्रति यूनिट हैं। जबकि, यूपी में अभी अधिकतम 6.50 रुपए प्रति यूनिट है। निजीकरण के बाद यह दर तीन गुना तक बढ़ सकती है। इससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसके लेकर वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
Electricity Privatisation in UP: 23 फरवरी को होगा बडा विरोध प्रदर्शन (A big protest will be held on February 23)
उत्तर प्रदेश में बिजली कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारी और इंजीनियर लामबंद 23 फरवरी को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर सोमवार को वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, जवाहरपुर, पनकी, हरदुआगंज, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

Electricity Privatisation in UP: नियामक आयोग पहुंचा उपभोक्ता परिषद (Consumer Council reaches Regulatory Commission)
पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के लिए ट्रांजेक्शन अडवाइजर नियुक्ति की शर्तों में शिथिलता का मुद्दा अब नियामक आयोग पहुंचा है। इस बारे में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग में प्रत्यावेदन दाखिल कर हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट में महत्वपूर्ण पैरामीटर होते हैं। उन्हें लगभग खत्म कर दिया गया है। उपभोक्ता परिषद ने सीबीसी गाइडलाइन की एक प्रति भी विद्युत नियामक आयोग को अपने प्रत्यावेदन के साथ सौपी है। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा मनमाने तरीके से निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया से सिर्फ निजी कंपनियों को लाभ मिलेगा।
Electricity Privatisation in UP: प्रत्यावेदन में परिषद ने इन मुद्दों को उठाया (The council raised these issues in the representation)
पहले टर्नओवर को 500 करोड़ से 200 करोड़ रुपये कर दिया गया। अब कंसल्टेंट को वर्क सबलेट करते हुए मुख्य सेवाओं के लिए कंसल्टेंट रखने का अधिकारी दे दिया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि ये पूरी प्रक्रिया केन्द्रीय सतर्कता आयोग की बनाई गाइडलाइन का उल्लंघन किया गया है।

Electricity Privatisation in UP: महाकुम्भ में श्रेष्ठतम बिजली व्यवस्था बनाएं (Make the best electricity system in Maha Kumbh)
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण का निर्णय वापस होने तक विरोध का सतत अभियान जारी रहेगा किन्तु संघर्ष समिति ने अपने सुधार और संघर्ष के मंत्र का पालन करते हुए बिजली कर्मचारियों,संविदा कर्मियों और अभियंताओं से अपील की है कि वे चालू वित्तीय वर्ष में अधिकतम राजस्व वसूली का लक्ष्य प्राप्त करने में पूरी शक्ति से लगे रहें। संघर्ष समिति ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि प्रबंधन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक बार फिर बिजली अभियंताओं को ट्रांसफर कर, चार्जशीट देकर और निलंबन जैसी कार्यवाही कर भय का वातावरण बना रहा है। बिजली कर्मी यह उम्मीद लगाए हुए थे कि महाकुम्भ में श्रेष्ठतम बिजली व्यवस्था बनाए रखने का कीर्तिमान बनाने वाले बिजली कर्मियों को प्रबंधन पुरस्कृत करेगा किन्तु अत्यन्त खेद का विषय है कि पुरस्कार के बदले प्रबन्धन बिजली कर्मियों का उत्पीड़न कर रहा है जिससे कार्य का वातावरण बिगड़ रहा है।
Electricity Privatisation in UP: विरोध में सभाएं जारी (Protest meetings continue)
संघर्ष समिति ने कहा कि महाकुम्भ के पांचों अमृत स्नान के साथ आज महाकुंभ के 34 दिन तक बिजली कर्मियों ने महाकुम्भ में एक मिनट के लिए भी बिजली का व्यवधान नहीं होने दिया जो एक रिकॉर्ड है। इसके बाद भी प्रबन्धन का निजीकरण के लिए रवैया अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। शनिवार को वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी, और अनपरा में विरोध सभा हुई।

Electricity Privatisation in UP: मुनाफे में रहेंगी निजी कंपनियां (Private companies will remain in profit)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के संयोजक (convenor Shailendra Dubey) शैलेंद्र दुबे ने बताया कि विद्युत वितरण के निजीकरण के लिए स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 63 में कोई उल्लेख नहीं है। ये पूरी तरह असंवैधानिक है। भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय (Energy Ministry of Government of India) ने स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के ड्राफ्ट के पैरा 2.2.7 में लिखा है। राज्य सरकार निजी कंपनी को सब्सिडाइजड दरों पर बिजली देगी। जिससे निजी कंपनी को मुनाफा हो सके।
Electricity Privatisation in UP: स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के ड्राफ्ट पर सैकड़ो आपत्ति (Hundreds of objections on the draft of standard bidding document)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि मानक स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के ड्राफ्ट को असंवैधानिक हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए। निजीकरण के नाम पर बड़े घोटाले होंगे। जिन्हें रोके जाएं। भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने अभी तक विद्युत वितरण के निजीकरण के लिए स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट फाइनल नहीं किया है। सितंबर 2020 में जारी किए गए स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट के ड्राफ्ट पर सैकड़ो आपत्ति आई है। अभी तक उनका निस्तारण नहीं किया गया है।
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