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Electricity Privatisation in UP: ध्यानाकर्षण कार्यक्रम की तिथियां, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर सवाल

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Electricity Privatisation in UP: यूपी में बिजली निजीकरण का विरोध जारी है। कर्मचारी लंबे समय से बिजली निजीकरण की प्रक्रिया रोकने की मांग कर रहे हैं। ध्यानाकर्षण कार्यक्रमों में 27 फरवरी, 28 फरवरी और 01 मार्च को प्रदेश भर में विरोध सभाएं की जाएंगी।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश.

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Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का विरोध जारी है। विधान परिषद में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के निजीकरण पर दिए गए बयान से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश है। जिसमें बिजली विभाग में निजीकरण के बाद भी आरक्षण की व्यवस्था यथावत बनी रहेगी। ऐसे में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की लखनऊ में बैठक हुई। जिसमें यूपी में बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) के विरोध में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम जारी किया गया है। ध्यानाकर्षण कार्यक्रमों में 27 फरवरी, 28 फरवरी और 01 मार्च को प्रदेश भर में विरोध सभाएं की जाएंगी। बिजली कर्मचारियेां की मांग है कि व्यापक जनहित में बिजली निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए।

बता दें कि योगी सरकार ने जब से प्रदेश में बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) का ऐलान किया है। तभी से बिजली कर्मचारी विरोध में उतर आए हैं। हर दिन बिजली कर्मचा​री और अधिकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर, अभी तक बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त नहीं हुई है।

Electricity Privatisation in UP: ट्रांजेक्शन कन्सल्टेंट नियुक्त करने के किये बिड खोलने का विरोध (Opposition to opening bids for appointing transaction consultants)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: ट्रांजेक्शन कन्सल्टेंट नियुक्त करने के किये बिड खोलने का विरोध (Opposition to opening bids for appointing transaction consultants)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की लखनऊ में हुई बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार बिजली के निजीकरण की जारी प्रक्रिया के विरोध में बिजली कर्मी ध्यानाकर्षण कार्यक्रम जारी रखेंगे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि ध्यानाकर्षण कार्यक्रमों में 27 फरवरी, 28 फरवरी और 01 मार्च को प्रदेश भर में विरोध सभाएं की जाएंगी।इसके बाद तीन मार्च को ट्रांजेक्शन कन्सल्टेंट नियुक्त करने हेतु बिड खोलने के विरोध में बिजली कर्मी समस्त जनपदों और परियोजना मुख्यालयों पर भोजनावकाश के दौरान विरोध सभा करेंगे। इसके साथ ही राजधानी लखनऊ में शक्तिभवन पर विरोध सभा की जाएगी। विरोध सभा में लखनऊ स्थित समस्त कार्यालयों के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे।

Electricity Privatisation in UP: सीएम योगी से अनुरोध (Request to CM Yogi)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि 04 मार्च, 05 मार्च, 06 मार्च एवं 07 मार्च को प्रदेश भर में जन-जागरण के लिए विरोध सभाएं की जाएंगी। 08 मार्च को लखनऊ में संघर्ष समिति के सभी घटक श्रम संघों/सेवा संगठनों के केन्द्रीय पदाधिकारियों एवं समस्त जनपदों/परियोजनाओं के संयोजक/सहसंयोजक की बैठक होगी। जिसमें निजीकरण के विरोध में अगले चरण के कार्यक्रम घोषित किये जायेंगे। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि हमें मुख्यमंत्री योगी पर अपना पूर्ण विश्वास है। हमारा सीएम योगी से अनुरोध किया है कि व्यापक जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त किया जाए। जिससे बिजली कर्मी प्रदेश की जनता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में लग रहे।

Electricity Privatisation in UP: स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से स्थितियां और बिगड़ रहीं (Voluntary retirement is making the situation worse)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से स्थितियां और बिगड़ रहीं (Voluntary retirement is making the situation worse)

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे बताते हैं कि भय और अविश्वसनीयता के वातावरण के चलते योग्य और अनुभवी अभियन्ता लगातार स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले कर जा रहे है। जनवरी और फरवरी माह में आठ मुख्य अभियंताओं और तीन अधीक्षण अभियंताओं ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। ऐसे ही विभाग छोड़ने का क्रम जारी है। ऐसे में ऊर्जा मंत्री के बयान से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के मामले में स्थितियां और बिगड़ सकती है। इसका विभाग की कार्य संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता दिख रहा है।

Electricity Privatisation in UP: ऊर्जा मंत्री ने दिए बयान (Statement given by the Energy Minister)

संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा मंत्री को यह समझना चाहिए कि एक ही बात दो समझौतों में लिखी जा रही है तो उसका महत्व कितना बढ़ जाता है। ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा जी के वक्तव्य कि “पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में निजीकरण सहित रिफॉर्म करने पर सरकार की सहमति बन गई है” ने सुधार में लगे बिजली कर्मचारियों को बहुत निराश किया है और इसी सरकार द्वारा किए गए विगत दो समझौतों के उल्लंघन से बिजली कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा की बिजली कर्मचारी लगातार मांग कर रहे हैं की सुधार हेतु उनके द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर प्रबंधन और सरकार उनसे बातचीत करें और वार्ता के बाद उचित समझे जाने वाले सुझाव के बिंदुओं को सुधार हेतु लागू किया जाए। मौजूदा प्रबंधन ने सुधार पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति से एक बार भी वार्ता नहीं की है। इसके बावजूद संघर्ष समिति के सुधार के आवाहन पर बिजली कर्मी लगातार सुधार में लगे हुए हैं। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश के विद्युत वितरण निगमन में 2017 में 41% ए टी एंड सी हानियां थी जिसे बिजली कर्मचारियों ने घटकर वर्ष 2023 24 में 17% कर दिया है कि निजीकरण का राग बंद किया जाए तो बिजली कर्मचारी अगले 1 वर्ष में राष्ट्रीय मानक 15% से नीचे एटी एंड सी हानियां लाकर दिखा देंगे।

Electricity Privatisation in UP: आगरा में बिजली बेंच कर 800 करोड़ रुपये का मुनाफा (Rs 800 crore profit by selling electricity in Agra)
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Electricity Privatisation in UP: आगरा में बिजली बेंच कर 800 करोड़ रुपये का मुनाफा (Rs 800 crore profit by selling electricity in Agra)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि विकसित भारत के लिए बिजली निजीकरण नहीं अपितु सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली उद्योग को रखा जाए। ये प्राथमिक आवश्यकता है। क्योंकि, निजी क्षेत्र के लिए बिजली एक व्यापार है। जबकि, सार्वजनिक क्षेत्र के लिए बिजली एक सेवा है। आगरा में टोरेंट कंपनी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। खुद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा को सदन में बताना चाहिए था कि टोरेंट को प्रति यूनिट बिजली किस रेट में प्राप्त हो रही है। कंपनी की ओर से पॉवर कॉर्पोरशन को प्रति यूनिट कितना राजस्व दिया जा रहा है? विगत वर्ष 2023-24 में इस कारण हुए 275 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई कैसे की जाएगी? जबकि कम्पनी ने आगरा में बिजली बेंच कर 800 करोड़ रुपये का मुनाफा फिर कैसे कमाया? यदि निजीकरण के इस प्रयोग की सही समय पर समीक्षा होती तो एक साल में पॉवर कॉर्पोरशन को 1000 करोड़ का मुनाफा होता।

Electricity Privatisation in UP: इन सब परिणामों के बावजूद निजीकरण क्यों? (Why privatisation despite all these results?)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि विगत 15 वर्षों में सिर्फ आगरा के निजीकरण से ही पॉवर कॉर्पोरशन को हजारों करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। सदन के वर्तमान सत्र में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार की मुक्तकंठ से प्रशंसा हर स्तर से हो रही है। भारत सरकार द्वारा जारी की गई। विद्युत वितरण कंपनियों की रेटिंग की रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगातार सुधार हो रहा है। उत्तर प्रदेश में आरडीएसएस स्कीम के तहत विद्युत वितरण निगमों का नेटवर्क सुधारने के लिए हजारों करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इससे हो रहे सुधार और बिजली कर्मियों के परिश्रम का परिणाम है कि विद्युत वितरण निगम लगातार सुधार की ओर बढ़ रहे हैं फिर इन सब परिणामों के बावजूद निजीकरण क्यों?

Electricity Privatisation in UP: टोरेंट पावर कंपनी की प्रति यूनिट अधिक (Torrent Power Company's per unit is more)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: टोरेंट पावर कंपनी की प्रति यूनिट अधिक (Torrent Power Company’s per unit is more)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने वर्ष 2023 – 24 में प्रति यूनिट बिजली विक्रय कर रु 04.47 प्रति यूनिट राजस्व वसूली की है। जो आगरा शहर में टोरेंट पॉवर कंपनी से मिलने वाले राजस्व रु0 4.36 प्रति यूनिट से अधिक है। इस बारे में ध्यान देने योग्य बात ये है कि आगरा एक औद्योगिक शहर है। आगरा में एशिया का सबसे बड़ा चमड़ा उद्योग है और आगरा में सबसे अधिक पांच सितारा होटल है। दूसरी और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत बुंदेलखंड और चंबल का क्षेत्र आता है और अनेक गांव आते हैं। इन स्थानों पर बिजली का राजस्व बहुत कम है। इसके बावजूद दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से टोरेंट पावर कंपनी की तुलना में प्रति यूनिट अधिक राजस्व मिल रहा है।

Electricity Privatisation in UP: 90 दिन से बिजली कर्मियों का विरोध जारी (Protest by electricity workers continues for 90 days)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार सुधार में लगे हैं। बिजली कर्मचारियों के प्रयासों को अनदेखा कर जिस प्रकार निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है। उससे बिजली कर्मचारियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में 90 दिन से बिजली कर्मियों का जिले और परियोजना मुख्यालयों पर विरोध सभा की।

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