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Electricity Privatisation in UP: निजीकरण के विरोध में नागपुर में सम्मेलन, आंदोलन को मिलेगी धार

Electricity Privatisation in UP: टैरिफ बेस्ड प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग होगी (There will be tariff based competitive bidding)
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Electricity Privatisation in UP: उप्र में बिजली निजीकरण को लेकर कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। बिजली निजीकरण से कॉमन कैडर के मुख्य अभियंता, अधिशासी भियंता, सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर सहित 28489 स्थायी पद समाप्त हो जाएंगे। इसके साथ ही संविदा पर कार्यरत करीब 50000 कर्मियों की नौकरियां भी खतरे में पड़ जाएंगी।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश

Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध में कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। प्रदेश में लगातार विरोध सभाएं और अन्य प्रदर्शन किए जा रहे हैं। यूपी सरकार ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (Dakshinchal Vidyut Vitran Nigam) और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम (Purvanchal Vidyut Vitran Nigam) के निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) का ऐलान किया तो प्रदेश में बिजली कर्मचारी उतर आए। प्रदेश में 81 वें दिन भी बिजली कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। आक्रोशित बिजली कर्मचारी अलग-अलग जिले और शहर में विरोध सभाएं की। अब बिजली के निजीकरण के विरोध में आगामी 23 फरवरी को नागपुर में बिजली कर्मचारियों,संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं का राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन हो रहा है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और चंडीगढ़ में कर्मचारी लंबे समय से बिजली निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। इसमें नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ़ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (National Coordination Committee of Electricity Employees and Engineers) दखल दी है। यूपी के साथ ही प्रदेश के अन्य प्रांतों में बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने बिजली के निजीकरण के विरोध में जोरदार विरोध प्रदर्शन किए और कर रहे हैं।

Electricity Privatisation in UP: पहले 22 फरवरी को नागपुर में बैठक (First meeting in Nagpur on 22 February)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: पहले 22 फरवरी को नागपुर में बैठक (First meeting in Nagpur on 22 February)

बता दें कि बिजली के निजीकरण के विरोध में आगामी 23 फरवरी को नागपुर में बिजली कर्मचारियों का सम्मेलन हो रहा है। जिसमें देश भर के बिजली कर्मचारियों,संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं शामिल हो रहे हैं। नेशनल सम्मेलन बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के बैनर तले हो रहा है। जिसको लेकर 22 फरवरी को नागपुर में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की राष्ट्रीय कोर कमेटी की बैठक होगी।

Electricity Privatisation in UP: देश भर के पदाधिकारी मौजूद रहेंगे (Officials from across the country will be present)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया ​कि नागपुर में होने वाले सम्मेलन में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज (एटक), इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीटू), इंडियन नेशनल इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन (इंटक), ऑल इंडिया पावर मेन्स फेडरेशन तथा कई प्रांतीय स्तर के बिजली कर्मियों के फेडरेशन के देश भर के पदाधिकारी बड़ी संख्या में सम्मिलित होंगे।

Electricity Privatisation in UP: देश में 27 लाख बिजली कर्मी एकजुट (27 lakh electricity workers united in the country)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: देश में 27 लाख बिजली कर्मी एकजुट (27 lakh electricity workers united in the country)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि घटक श्रम संघों और सेवा संगठनों के कई शीर्ष पदाधिकारी नागपुर सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हैं। चंडीगढ़ के निजीकरण के बाद नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने यह निर्णय लिया है कि उप्र में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया का राष्ट्रीय स्तर पर पुरजोर विरोध किया जाय और केन्द्र व राज्य सरकारों को यह स्पष्ट कर दिया जाय कि बिजली के निजीकरण के विरोध में किसी प्रान्त के बिजली कर्मी अकेले नहीं हैं, सारे देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी उनके साथ मजबूती से खड़े हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के पदाधिकारियों ने कहा कि निजीकरण के विरोध में प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन अगले सप्ताह भी यथावत जारी रहेंगे। नागपुर सम्मेलन के बाद संघर्ष समिति आन्दोलन के अगले कदमों की घोषणा करेगी।

Electricity Privatisation in UP: निजीकरण से बिजली की दरें महंगी होंगी (Privatisation will make electricity rates expensive)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि मुंबई की बात करें तो घरेलू बिजली की दरें 17-18 रुपए प्रति यूनिट हैं। जबकि, यूपी में अभी अधिकतम 6.50 रुपए प्रति यूनिट है। निजीकरण के बाद यह दर तीन गुना तक बढ़ सकती है। इससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसके लेकर वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में बिजली कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

Electricity Privatisation in UP: 23 फरवरी को होगा बडा विरोध प्रदर्शन (A big protest will be held on February 23)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: 23 फरवरी को होगा बडा विरोध प्रदर्शन (A big protest will be held on February 23)

उत्‍तर प्रदेश में बिजली कंपनियों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारी और इंजीनियर लामबंद 23 फरवरी को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर रविवार को वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, जवाहरपुर, पनकी, हरदुआगंज, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

Electricity Privatisation in UP: नियामक आयोग पहुंचा उपभोक्ता परिषद (Consumer Council reaches Regulatory Commission)

पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के लिए ट्रांजेक्शन अडवाइजर नियुक्ति की शर्तों में शिथिलता का मुद्दा अब नियामक आयोग पहुंचा है। इस बारे में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग में प्रत्यावेदन दाखिल कर हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट में महत्वपूर्ण पैरामीटर होते हैं। उन्हें लगभग खत्म कर दिया गया है। उपभोक्ता परिषद ने सीबीसी गाइडलाइन की एक प्रति भी विद्युत नियामक आयोग को अपने प्रत्यावेदन के साथ सौपी है। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा मनमाने तरीके से निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया से सिर्फ निजी कंपनियों को लाभ मिलेगा।

Electricity Privatisation in UP: महाकुम्भ में श्रेष्ठतम बिजली व्यवस्था बनाएं (Make the best electricity system in Maha Kumbh)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: प्रत्यावेदन में परिषद ने इन मुद्दों को उठाया (The council raised these issues in the representation)

पहले टर्नओवर को 500 करोड़ से 200 करोड़ रुपये कर दिया गया। अब कंसल्टेंट को वर्क सबलेट करते हुए मुख्य सेवाओं के लिए कंसल्टेंट रखने का अधिकारी दे दिया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि ये पूरी प्रक्रिया केन्द्रीय सतर्कता आयोग की बनाई गाइडलाइन का उल्लंघन किया गया है।

Electricity Privatisation in UP: महाकुम्भ में श्रेष्ठतम बिजली व्यवस्था बनाएं (Make the best electricity system in Maha Kumbh)

उत्तर प्रदेश में निजीकरण का निर्णय वापस होने तक विरोध का सतत अभियान जारी है। संघर्ष समिति ने अपने सुधार और संघर्ष के मंत्र का पालन करते हुए। यूपी में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और अभियंताओं से अपील की है कि चालू वित्तीय वर्ष में अधिकतम राजस्व वसूली का लक्ष्य प्राप्त करें। इसके पूरा करने में अपनी पूरी शक्ति लगा लें। संघर्ष समिति ने पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि प्रबंधन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक बार फिर बिजली अभियंताओं को ट्रांसफर कर, चार्जशीट देकर और निलंबन जैसी कार्यवाही कर भय का वातावरण बना रहा है। बिजली कर्मी महाकुम्भ में श्रेष्ठतम बिजली व्यवस्था बनाए रखकर कीर्तिमान बना रहे हैं। उन्हें पुरस्कृत किया जाए। मगर, खेद का विषय है कि पुरस्कार के बदले प्रबन्धन बिजली कर्मियों का उत्पीड़न कर रहा है।

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