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Electricity Privatisation in UP: यूपी में बिजली कर्मचारी आन्दोलन के लिए अलर्ट, ये किया ऐलान

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Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण को लेकर कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। कर्मचारियों की मांग पर सरकार निजीकरण प्र​क्रिया निरस्त नहीं कर रही है। बिजली कर्मचारियों की सीएम योगी से बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त करने की मांग है।

Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti) की ओर से बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) का विरोध जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि अवैधानिक ढंग से ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट की बीड खोली जा रही है। हम अवैधानिक प्रक्रियाओं के विरोध में किसी भी समय आन्दोलन के लिए अलर्ट हैं। उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों कर्मचारियों और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के साथ ही छह केंद्रीय श्रम संघों भी बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) के विरोध में एकजुट हो चुके हैं। सभी संगठनों की मांग है कि उप्र में निजीकरण प्रक्रिया गैरकानूनी है। जिसे सीएम योगी तत्काल निजीकरण निरस्त करें।

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बता दें कि योगी सरकार ने बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) का जब से ऐलान किया है, तभी से प्रदेश में बिजली कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। प्रदेश भर में बिजली कर्मचारी का लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। हर दिन बिजली कर्मचा​री और संघर्ष समिति पदाधिकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर, अभी तक बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त नहीं हुई है। जबकि, बिजली कर्मचारी इस मामले में सीएम योगी से लगातार गुहार लगा रहे हैं कि सीएम योगी इसमें दखल दें। जिससे निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त करें।

Electricity Privatisation in UP: प्रदेश में बिजली कर्मियों में आक्रोश (Anger among electricity workers in the state)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: प्रदेश में बिजली कर्मियों में आक्रोश (Anger among electricity workers in the state)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti Uttar Pradesh Convenor Shailendra Dubey) के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि प्रदेश में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का विरोध जारी है। प्रदेश में बिजली निजीकरण के लिए ट्रांजेक्शन कंसलटेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह अवैधानिक है। सभी बिजली कर्मचरी की यही मांग और बात है। सभी बिजली कर्मियों का आह्वान किया है कि वे निजीकरण की अवैधानिक प्रक्रियाओं के विरोध में किसी भी समय आन्दोलन प्रारंभ करने के लिए अलर्ट रहें। आज जिस तरह सभी सीमाओं का उल्लंघन करके पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने बिड खोली है। उससे पूरे प्रदेश में बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा और आक्रोश है।

Electricity Privatisation in UP: सभी संगठन पूरी तरह लामबंद (All organizations fully mobilized)

पॉवर ऑफिसर्स एसोशिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि प्रदेश की राजधानी में स्थित शक्ति भवन पर आयोजित एक सभा में ऐलान किया कि किसी भी समय आन्दोलन प्रारंभ किया जा सकता है। इसके लिए सभी संगठन एकजुट रहे और सभी संगठन पूरी तरह लामबंद हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक लाख बिजली कर्मियों को अलर्ट किया गया है।

Electricity Privatisation in UP: पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने छेड़ा निजीकरण का राग (Power Corporation management started the tune of privatization)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने छेड़ा निजीकरण का राग (Power Corporation management started the tune of privatization)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के नाम पर हो रहे मेगा घोटाले को रोकने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप करने की कृपा करें। बिजली कर्मियों का मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास और वे उनके मार्गदर्शन में लगातार सुधार के कार्य में लगे हैं। किन्तु पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने निजीकरण का राग छेड़कर ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अंशाति उत्पन्न कर दी है।

Electricity Privatisation in UP: लखनऊ में शक्ति भवन पर विरोध प्रदर्शन (Protest at Shakti Bhawan in Lucknow)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि उप्र में आज बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर विरोध प्रदर्शन किया गया। शक्ति भवन पर बिजली कर्मियों ने पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन के विरोध में भ्रष्टाचार के आरोप के नारे लगाकर रैली निकाली।

Electricity Privatisation in UP: यह हितों के टकराव का मामला (This is a case of conflict of interest)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि यह पता चला है कि कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) के अति आवश्यक प्राविधान का उल्लंघन करते हुए पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने ऐसी कंपनियों से बिड ले ली है। जो बड़ी बिजली कंपनियों के साथ काम कर रही हैं। और यह हितों के टकराव का मामला है। इनमें से एक कम्पनी उप्र सरकार की एक ट्रिलियन योजना में भी काम कर रही है। यदि यह सही है तो यह अत्यन्त गम्भीर मामला है। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के सर्वथा विपरीत है।

Electricity Privatisation in UP: निजीकरण को लेकर पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन उतावला दिख रहा (Power Corporation management seems to be impatient about privatization)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि प्रारंभ से ही पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन निजीकरण हेतु इतना उतावला दिख रहा है कि वह लगातार सीवीसी की गाइडलाइंस का उल्लंघन कर निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 42 जनपदों की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करने हेतु कुछ भी नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 131 में इस बात का साफ उल्लेख है कि सरकारी निगम की परिसंपत्तियों को जब निजी क्षेत्र को सौंपा जाना है तब परिसंपत्तियों का मूल्यांकन किया जाना नितांत जरूरी है।

Electricity Privatisation in UP: यूपी में बिजली निजीकरण के नाम पर मेगा घोटाला (Mega scam in the name of electricity privatization in UP)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: 42 जनपदों की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन ही नहीं (Assets of 42 districts not evaluated)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि परिसंपत्तियों का मूल्यांकन किए बिना आरएफपी डॉक्यूमेंट में परिसंपत्तियों की रिजर्व प्राइस 1500 – 1600 करोड रुपए रखना सरकारी क्षेत्र की परिसंपत्तियों की खुली छूट नहीं तो और क्या है ? 42 जनपदों की परिसंपत्तियों का न तो मूल्यांकन किया गया है और न ही उनका रेवेन्यू पोटेंशियल निकाला गया है । इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 131 के अनुसार रेवेन्यू पोटेंशियल निकले बिना निजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती है।

Electricity Privatisation in UP: यूपी में बिजली निजीकरण के नाम पर मेगा घोटाला (Mega scam in the name of electricity privatization in UP)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि परिसंपत्तियों का मूल्यांकन नहीं किया गया है, रेवेन्यू पोटेंशियल नहीं निकाला गया है। और ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति ऐसी कंपनियों को शामिल कर दिया गया है जो कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) में सम्मिलित है। उन्होंने कहा कि है यह सब इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के नाम पर मेगा घोटाला होने जा रहा है।

Electricity Privatisation in UP: 17 मार्च होगा प्रदेश में जोरदार प्रदर्शन (Strong protests will be held in the state on March 17)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि शनिवार को वाराणसी आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध प्रदर्शन किया गया। अवकाश के बाद 17 मार्च को सभी जनपदों में और परियोजनाओं पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

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