Basmati Rice Crop: योगी सरकार ने प्रदेश के 30 जिलों में 60 दिनों तक 10 कीटनाशक की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंधित लगाया है. बासमती चावल के उत्पादन में वृद्धि के लिए सरकार ने कीटनाशक दवाओं की बिक्री व इस्तेमाल पर रोक लगाई है. यदि इनकी बिक्री व प्रयोग किया गया तो जिम्मेदार विभाग के अधिकारी सख्त कार्रवाई करेंगे.
आगरा/अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश
Basmati Rice Crop: उत्तर प्रदेश के बासमती चावल (Basmati Rice) की देश और दुनियां में डिमांड हैं. मगर, बीते सालों में उत्तर प्रदेश के बासमती चावल के निर्यात में गिरावट आ रही है. जिससे यूपी के किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम नहीं मिल पा रहा है. जिसको लेकर योगी सरकार ने मंथन किया. जिसमें जाना कि यूपी के बासमती चावल (Basmati Rice Crop) के निर्यात की वजह पता की. जिसमें ही योगी सरकार ने बासमती चावल की फसल (Basmati Rice Crop) में लगाये जाने वाले कीटनाशक (pesticides) पर अंकुश लगाने के प्रयास किए. कीटनाशक की वजह से ही बासमती चावल के निर्यात (Export of Basmati Rice) में गिरावट आई थी. जिस पर सरकार ने कीटनाशक के अधिक उपयोग होने पर चिंता जाहिर की.
योगी सरकार ने अधिकारियों के साथ बैठक करके अब प्रदेश के तीस जिलों में 60 दिन तक दस कीटनाशक दवाओं की बिक्री पर रोक लगाई है. सरकार ने इस बारे में प्रदेश के सभी कीटनाशक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि, 60 दिन तक इन प्रतिबंधित कीटनाशक की बिक्री की तो विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. जिससे बासमती चावल की गुणवत्ता बेहतर होगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य ही बासमती चावल में कीटनाशक अवशेषों की मात्रा को कम करना और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश में बासमती चावल की खेती आगरा, अलीगढ़, रामपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, बिजनौर, बरेली, बदायूं, औरैया, बागपत, बुलंदशहर, एटा, कासगंज, फैरूखाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, गौतमबुद्ध नगर गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, मथुरा, मैनपुरी, मेरठ, मुरादाबाद, अमरोहा, कन्नौज, मुजफ्फरनगर, शामली और पीलीभीत जिलों में अधिक क्षेत्रफल में होती है. इन जिलों से ही बासमती चावल को बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता था. मगर, कुछ बीते सालों से यूपी से निर्यात होने वाले बासमती चावल में कीटनाशी रयासनों के अवशेष अधिक मिले तो यूपी के बासमती चावल के निर्यात में गिरावट आई.
🌾 इस प्रतिबंध का उद्देश्य क्या है?
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बासमती चावल की गुणवत्ता में सुधार
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अंतरराष्ट्रीय निर्यात मानकों (MRL – Maximum Residue Limit) को पूरा करना
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किसानों की आय में वृद्धि
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पर्यावरण व उपभोक्ताओं की सेहत की सुरक्षा
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भारत के निर्यात को विश्व बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 30 जिलों में कीटनाशक पर रोक
आगरा के जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि शासन ने 60 दिनों की अवधि के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 30 जिलों में बासमती चावल में दस कीटनाशक दवाओं पर प्रतिबंध लगाया है. जिससे बासमती चावल की गुणवत्ता बेहतर रहे. जिससे बासमती चावल के निर्यात में वृद्धि की जाए. इसलिए, प्रदेश के सभी कीटनाशी विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं. कोई भी विक्रेता बासमती धान में लगने वाले विभिन्न प्रकार के कीटों और बीमारियों में प्रतिबंधित किए गए कीटनाशकों का प्रयोग न कराएं. यदि किसी विक्रेता ने कीटनाशकों की बिक्री की तो उनके खिलाफ कीटनाशी अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होगी.
यूरोपियन देशों में भी घटा निर्यात
यूपी के बासमती चावल के घटते निर्यात को लेकर एपीडा (एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट ऑथरिटी) ने कई जानकारी दी हैं. जिसमें कहा गया है कि यूरोपियन यूनियन द्वारा बासमती चावल में ट्र्राइसाइक्लाजोल (tricyclazole) का अधिकतम कीटनाशी अवशेष स्तर एमआरएल 0.01 पीपीएम निर्धारित किया गया है, लेकिन निर्धारित पीपीएम की मात्रा से अधिक होने के कारण यूरोप, अमेरिका एवं खाड़ी देशों के निर्यात में वर्ष 2020-21 की तुलना में वर्ष 2021-2022 में 15 प्रतिशत की कमी आई है।
कीटनाशक विक्रेताओं को दिए गए निर्देश (Instructions given to drug sellers)
आगरा के जिला कृषि रक्षा अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश के सभी कीटनाशक विक्रेताओं को बासमती धान में संतुलित मात्रा में वैकल्पिक कीटनाशकों का प्रयोग, नियंत्रण की आईपीएम पद्धति का प्रयोग करने और जैव कीटनाशकों जैसे-नीम ऑइल, ट्राइकोडर्मा, ब्युवेरिया बेसियाना, स्यूडोमोनास, मैटाराइजियम, बीटी, एनपीवी की बिक्री बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. कुछ वैकल्पिक उपाय जैसे लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और ट्राईकोकार्ड का प्रयोग किया जाए.
🚫 ये हैं प्रतिबंधित कीटनाशक
- ट्राईसाइक्लाजोल
- ब्यूप्लोजिन
- एसीफेट
- क्लोरोपाइरीफास
- हेक्साकोनाजोल
- प्रोपिकोनाजोल
- थायोमेथाक्सान
- प्रोफेनाफास
- इमिडाक्लोप्रिड
- कार्बेन्डाजिम
(Note: इनकी अधिक मात्रा बासमती चावल में अवशेष रूप में रह जाती है, जिससे यूरोपीय देशों समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात अटक जाता है. कीटनाशकों के अवशेषों के कारण उत्तर प्रदेश से बासमती चावल का निर्यात 15% तक घट गया है। यह न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालता है, बल्कि किसानों की आय पर भी प्रतिकूल असर डालता है। इन कीटनाशकों के सभी प्रकार के फार्मूलेशन की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है.)
📈 बासमती चावल निर्यात पर प्रभाव
यूरोपीय संघ ने ट्राईसाइक्लाजोल का अवशेष स्तर 0.01 ppm निर्धारित किया है। इससे अधिक मात्रा में अवशेष पाए जाने पर शिपमेंट रोक दिया जाता है। इस प्रतिबंध से बासमती निर्यातकों को राहत मिलेगी और विदेशी बाज़ार में भारतीय चावल की मांग बढ़ेगी।
🎯 कीटनाशकों का प्रतिबंध का उद्देश्य
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बासमती चावल में कीटनाशक अवशेषों की मात्रा को कम करना।
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अंतरराष्ट्रीय निर्यात मानकों के अनुरूप बनाना।
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बासमती चावल की गुणवत्ता और स्वाद को संरक्षित करना।
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निर्यात में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार।
प्रदेश के इन जिलों में लगा प्रतिबंध
आगरा, अलीगढ़, रामपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, बिजनौर, बरेली, बदायूं, औरैया, बागपत, बुलंदशहर, एटा, कासगंज, फैरूखाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, गौतमबुद्ध नगर गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, मथुरा, मैनपुरी, मेरठ, मुरादाबाद, अमरोहा, कन्नौज, मुजफ्फरनगर, शामली, पीलीभीत।
🌍 अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कदम
यूरोपीय संघ ने बासमती चावल में ट्राइसाइक्लाजोल जैसे कीटनाशकों के अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) को 0.01 पीपीएम तक सीमित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, उत्तर प्रदेश सरकार ने इन कीटनाशकों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाकर बासमती चावल को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने का प्रयास किया है।
🌿 कीटनाशकों का वैकल्पिक उपाय:
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम बासमती चावल की गुणवत्ता सुधारने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है. किसानों को चाहिए कि वे वैकल्पिक और जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें. जिससे न केवल फसल की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि निर्यात के अवसर भी बढ़ेंगे.
कृषि विभाग ने किसानों को जैविक और वैकल्पिक कीटनाशकों के उपयोग की सलाह दी है, जैसे…
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नीम ऑयल
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ट्राइकोडर्मा
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ब्युवेरिया बेसियाना
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स्यूडोमोनास
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मैटाराइजियम
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बीटी (Bacillus thuringiensis)
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एनपीवी (Nuclear Polyhedrosis Virus)
(Note: इसके अतिरिक्त, लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप और ट्राइकोकार्ड जैसे उपकरणों के उपयोग की भी सिफारिश की गई है।)
🌿 किसान अच्छी पैदावार के लिए उपाय भी करें
किसानों को निम्नलिखित वैकल्पिक उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।
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जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें, जैसे नीम आधारित उत्पाद।
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फसल चक्र अपनाएं ताकि कीटों का प्रकोप कम हो।
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एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) तकनीकों का पालन करें।
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मिट्टी और जल परीक्षण कराकर उपयुक्त उर्वरकों और कीटनाशकों का चयन करें।
FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q: यूपी सरकार ने किन जिलों में कीटनाशकों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है?
A: यूपी सरकारने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 30 जिलों में 60 दिनों के लिए 10 कीटनाशकों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। इनमें आगरा, अलीगढ़, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, बिजनौर समेत अन्य जिले शामिल हैं।
Q: इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A: यूपी सरकार ने बासमती चावल में कीटनाशकों के अवशेषों को कम करना, अंतरराष्ट्रीय मानकों (MRL) को पूरा करना और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है।
Q: यूपी में कौन-कौन से कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाया गया है?
A: ट्राईसाइक्लाजोल, एसीफेट, क्लोरोपाइरीफास, इमिडाक्लोप्रिड, ब्यूप्लोजिन, हेक्साकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल, थायोमेथाक्सान, प्रोफेनाफास और कार्बेन्डाजिम।
Q: सरकार ने किसानों को कौन से वैकल्पिक उपाय सुझाए हैं?
A: यूपी सरकार ने जैविक कीटनाशक जैसे नीम ऑयल, ट्राइकोडर्मा, बीटी, एनपीवी, और उपकरण जैसे लाइट ट्रैप, फेरोमोन ट्रैप, स्टिकी ट्रैप आदि प्रयोग करने की सलाह दी गई है
Q: क्या कीटनाशक विक्रेताओं पर भी कार्रवाई की जाएगी?
A: हां, यदि कोई विक्रेता प्रतिबंधित कीटनाशकों की बिक्री करते पाए जाने पर ऐसे दुकानदार के खिलाफ कीटनाशी अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Q: क्या यह निर्णय बासमती चावल के निर्यात को प्रभावित करेगा?
A: सरकार के इस कदम से यूपी से चावल का निर्यात सकारात्मक रूप से बढेगा। इस प्रतिबंध के कारण चावल की गुणवत्ता बढ़ेगी और यूरोप, अमेरिका जैसे देशों में निर्यात में सुधार होगा।