Anganwadi: अभिभावक अपने जच्चा-बच्चा को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो गर्भवती महिला का विशेष ध्यान रखें। डॉक्टर से समय-समय पर परामर्श लें, सभी आवश्यक जांच भी करवाएं। उसके आधार पर उपचार और आहार करवाएं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि गर्भवस्था की पहली तिमाही से प्रसव पूर्व जांचें जरूरी हैं। हर जनपद में सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांचों की सुविधा उपलब्ध है। सरकार की इस सुविधा का जरूर लाभ उठाएं। मधुमेह आदि जैसी बीमारियों से जच्चा-बच्चा को सुरक्षित करें।
आगरा/लखनऊ, उत्तर प्रदेश
Anganwadi: गर्भावस्था (pregnancy) के दौरान मधुमेह (diabetes) नियंत्रित न हो तो यह गर्भवती (pregnant woman) के साथ-साथ पैदा होने वाला शिशु (Baby) के लिए भी मुसीबत बन सकती है, इसलिए गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान ही गर्भवती को अपनी प्रसव पूर्व जांच करानी चाहिए। इस दौरान रैंडम ब्लड शुगर (Random Blood Sugar) जांच कराई जाती है। जिन गर्भवती में गर्भावस्था में मधुमेह की पुरानी पृष्ठभूमि रही है, उनकी प्रथम त्रैमास में ही मधुमेह की सम्पूर्ण जांच कराई जाती है। और अन्य गर्भवती की भी दूसरे त्रैमास में मधुमेह की पूरी जांच कराई जाती है । विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day) पर स्वास्थ्य विभाग विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करके जागरुकता अभियान चलता है। वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं (स्तनपान करने वाली महिलाओं) और उनके अभिभावकों को मधुमेह एवं अन्य बीमारियों को लेकर जागरूक किया जाता है।

यूपी के सभी जिलों में स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग भी स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों को कुपोषण से बचने के अभियान में जुटा है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए हैं। जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी समय-समय पर समीक्षा एवं निरीक्षण करके स्वास्थ्य केदो और आंगनबाड़ी केंद्रों पर सरकार की सुविधाओं की जानकारी लेते हैं। जहां भी कमियां पाई जाती हैं। उन्हें दूर करते हैं साथ ही जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं बैठकों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र पर होने वाले गतिविधियों में जागरुकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बच्चों को टाइप-1 मधुमेह होने की आशंका (Children at risk of developing type-1 diabetes)
आगरा के सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव का कहा है कि सभी गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था की पहली तिमाही से ही अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर प्रसव पूर्व जांच अवश्य कराएं। यह जच्चा और पैदा होने वाले बच्चे दोनों के लिए लाभदायक है। उन्होंने बताया कि गर्भावधि मधुमेह में रक्त शर्करा का मान सामान्य से अधिक होता है, लेकिन मधुमेह के निदान से कम हो जाता है। गर्भावधि मधुमेह सिर्फ गर्भावस्था के दौरान ही होता है। इससे पीड़ित महिलाओं को गर्भावस्था और प्रसव के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। इन महिलाओं और संभवतः उनके बच्चों को भी भविष्य में टाइप-एक मधुमेह की आशंका अधिक होती है। गर्भावधि मधुमेह का निदान लक्षणों के आधार पर नहीं, बल्कि प्रसवपूर्व जांच के माध्यम से किया जाता है, इसलिए प्रत्येक महिला को गर्भावस्था का पता चलते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर तुरंत जांच करानी चाहिए। सरकारी अस्पतालों पर न सिर्फ जांच की सुविधा है, बल्कि गर्भावस्था में मधुमेह का पता चलने पर जांच के साथ साथ कुशल इलाज व प्रबंधन से सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कराया जा रहा है।

एसीएमओ आरसीएच डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान मधुमेह के मामले औसतन दस फीसदी से भी कम आते हैं, लेकिन इन मामलों में सतर्कता अधिक जरूरी है। मधुमेह पाए जाने पर गर्भवती को उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) की श्रेणी में रखा जाता है और सुरक्षित प्रसव होने तक उनकी नियमित निगरानी की जाती है। उन्हें मधुमेह की दवाएं भी चलाई जाती हैं। अगर गर्भधारण करने के पहले से ही महिला मधुमेह पीड़ित है तो गर्भावस्था के दौरान उसे चिकित्सकीय देखरेख में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। मधुमेह पीड़ित महिला को गर्भधारण में भी परेशानी हो सकती है।

आगरा में 6519 मधुमेह रोगियों का उपचार (Treatment of 6519 diabetic patients in Agra)
गैर संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. पियूष जैन ने बताया कि आगरा जनपद में सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों पर 6519 मधुमेह रोगियों का उपचार दिया जा रहा है। इनमें 3563 पुरुष और 2956 महिलाएं हैं। सभी का उपचार किया जा रहा है।

शिशु के लिए बढ़ है अधिक दिक्कत (There is more problem for the baby)
आगरा के जीवनी मंडी नगरीय स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेघना शर्मा ने बताया कि अगर गर्भावस्था में मधुमेह नियंत्रित नहीं रहता है तो शिशु के लिए अधिक दिक्कत बढ़ सकती है। गर्भावस्था के पहले आठ सप्ताह के दौरान शिशु के अंग, जैसे मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और फेफड़े आदि बनने लगते हैं। इस चरण में उच्च रक्त शर्करा का स्तर हानिकारक हो सकता है। इससे शिशु में जन्म दोष जैसे कि हृदय दोष या मस्तिष्क अथवा रीढ़ की हड्डी में दोष होने की आशंका बढ़ जाती है। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्त शर्करा स्तर के कारण इस बात की आशंका भी बढ़ जाती है कि शिशु समय से पहले पैदा हो जाए। उसका वजन बहुत अधिक हो जाए अथवा जन्म के तुरंत बाद उसे सांस लेने में समस्या हो या रक्त शर्करा का स्तर कम हो जाए। इसकी वजह से गर्भपात या मृत शिशु के जन्म की आशंका भी बढ़ जाती है।

गर्भावस्था में मधुमेह की जांच और उपचार (Diabetes screening and treatment in pregnancy)
गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की जांच और उपचार बहुत जरूरी है। मधुमेह की जांच के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है। यदि मधुमेह की पुष्टि होती है तो डॉक्टर उपचार की सलाह देते हैं। जैसे कि इंसुलिन थेरेपी और आहार परिवर्तन।
मधुमेह के कारण शिशु में जटिलताएं (Complications in the baby due to diabetes)
- मधुमेह से पीड़ित माताओं के शिशु का वजन अधिक हो सकता है, जिससे प्रसव के समय समस्याएं आ सकती हैं।
- शिशु में श्वसन समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि श्वसन की गति धीमी होना।
- मधुमेह से पीड़ित माताओं के शिशु में हृदय समस्याएं हो सकती हैं।
- मधुमेह से पीड़ित माताओं के शिशु में मानसिक विकास में देरी हो सकती है।
गर्भावस्था में मधुमेह की रोकथाम के उपाय (Measures to prevent diabetes in pregnancy)
- स्वस्थ आहार लेने से मधुमेह के खतरे को कम किया जा सकता है।
- नियमित व्यायाम करने से मधुमेह के खतरे को कम किया जा सकता है।
- वजन नियंत्रण करने से मधुमेह के खतरे को कम किया जा सकता है
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