Rabi Crops: मौसम में बदलाव से किसान परेशान हैं। किसानों की रबी सीजन में खेतों खड़ी गेहूं, आलू, राई, सरसों, चना, मटर, मसूर, मक्का एवं गन्ना की फसल में कीटों और रोगों का प्रकोप बढने की संभावना है। इसको लेकर कृषि विभाग की कृषि रक्षा इकाई ने आगरा मंडल के किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करने के साथ ही हेल्पलाइन नंबर्स 9452247111 और 9452257111 जारी किए है। जिस पर किसान अपनी फसल में लगे रोग या कीट के प्रकोप का फाटो भेजेंगे तो उन्हें बीमारी और कीटों से बचाव के उपाच बताए जाएंगे।
आगरा, उत्तर प्रदेश.
Rabi Crops: रबी की फसल खेतों में खड़ी है। मौसम में जो बदलाव हुआ है। ऐसे में खेतों खड़ी (Rabi Crops) गेहूँ, आलू, राई/सरसों, चना, मटर, मसूर, मक्का एवं गन्ना की देखभाल बेहद जरूरी है। क्योंकि, मौसम (changes in the weather) में हुए बदलाव यानी बूंदाबांदी, बारिश, तापमान में गिरावट और आर्द्रता में वृद्धि की वजह से कीटों और रोगों का प्रकोप बढ सकता है। इसको लेकर आगरा में कृषि विभाग (Agriculture Department in Agra) के उपनिदेशक (Deputy Director Agricultural Protection) श्री देव शर्मा (shri Dev Sharma) ने एक गाइडलाइन (Guideline) और हेल्प लाइन नंबर्स (Helpline Numbers) जारी की है। जिसमें किसानों से इस मौसम में (Rabi Crops)फसलों की देखभाल की अपील करने के साथ ही कीट या रोगों को लेकर निकटतम विकास खण्ड स्तर पर प्रभारी राजकीय कृषि रक्षा इकाई या जनपद स्तर पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय से करें संपर्क करने की अपील की है।

Rabi Crops: इन नंबर पर कॉल करके पाएं सलाह (Get advice by calling on these numbers)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि आगरा मंडल के किसान भाई किसी भी कीट या रोग के साथ ही खेतों में खरपतवार की समस्या के निवारण के लिए व्हाट्सएप नंबर 9452247111 अथवा 9452257111 और एनपीएसएस पोर्टल पर प्रभावित पौधों की फोटो सहित अपनी समस्या व पता लिखकर मैसेज भेजें. किसानों को 48 घण्टे के अंदर फसल में लगे रोग और कीट के निदान, नियंत्रण और सुझाव प्राप्त करें। इसके साथ ही किसान अपने निकटतम विकास खण्ड स्तर पर प्रभारी राजकीय कृषि रक्षा इकाई अथवा जनपद स्तर पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी कार्यालय से सम्पर्क करें।

Rabi Crops: मौसम के बदलाव से कीट और रोग का प्रकोप बढेगा (Infestation of pests and diseases will increase due to change in weather)
कृषि विभाग के उप निदेशक (Deputy Director (Agriculture Protection) श्री देव शर्मा ने बताया कि मौसम में बदलाव हो रहा है. अभी किसानों के खेतों में रबी सीजन की प्रमुख रूप से गेहूँ, आलू, राई, सरसों, चना, मटर, मसूर, मक्का एवं गन्ना की फसलें खडी हैं. जिस तरह से मौसम में बदलाव हो रहा है. आगरा मंडल की बात करें तो कहीं पर छिट पुट वर्षा हो रही तो कहीं पर तेज बारिश हुई है. ऐसे में तापमान में गिरावट के साथ ही आर्द्रता में वृद्धि हुई है. इस मौमस से रबी सीजन की फसलों में सामयिक कीट और कई रोग के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है। किसान भाईयों से अपील है कि अपनी फसलों की सही से निगरानी करें। यदि फसल में कोई सामयिक कीट या रोग दिखाई दे रहा है तो तत्काल विशेषज्ञ से बात करें।

Rabi Crops: गेंहू की फसल में पीली गेरूई रोग और नियंत्रण (Yellow rust disease and control in wheat crop)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि अभी के मौसम में यदि हम गेंहू की फसल की बात करें तो गेहूँ में पीली गेरूई रोग लग सकता है। इससे किसान घबराए नहीं. गेंहू में लगने वाले पीली गेरूई रोग के नियंत्रण के लिए प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी 500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 600-700 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिडकाव करें। ऐसे ही गेंहू की फसल में यदि पत्ती धब्बा रोग लग गया है तो इस रोग के नियंत्रण के लिए थायोफीनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्लूपी 700 ग्राम अथवा मेन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी 2.0 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।

Rabi Crops: मक्का की फसल में लगने वाले तना भेदक से बचाव (Yellow rust disease and control in wheat crop)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि इस मौसम में मक्का की फसल में तना भेदक कीट लगने की अधिक संभावना है। मक्का की फसल में लगने वाले तला भेदक कीट के लिए किसान 10 प्रतिशत मृतगोभ का आर्थिक क्षति स्तर का प्रकोप दिखाई देने पर डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी अथवा क्लोरेन्ट्रनिलिप्रोल 200 मिली० अथवा इन्डोक्साकार्ब 500 प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करें।
Rabi Crops: फॉल आर्मी वर्ग कीट के प्रकोप से बचाव (Protection from fall armyworm infestation)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि फॉल आर्मी वर्ग कीट के प्रकोप से बचाव के लिए 20-25 पक्षी आश्रय (बर्ड पर्चर) तथा 3-4 को संख्या में लाइट ट्रैप लगाकर आसानी से प्रबन्धन किया जा सकता हैं। फेरोमोन टैप 35-40 प्रति हेक्टेयर की दर से लगा कर भी इसका नियंत्रण किया जा सकते हैं। 10-20 प्रतिशत क्षति लक्षित होने पर रासायनिक नियंत्रण का प्रयोग करना चाहिए। इसके लिए किसानों को क्लोरेन्ट्रानिलीपोल 18.5 प्रतिशत ईसी 0.4 मिलीलीटर अथवा इमामेक्टिन बेजोडट 0.4 ग्राम अथवा थायामेथेक्साम 12.6 ग्राम प्रतिशत लैम्ब्डा-साईहेलोथिन 9.5 प्रतिशत 0.5 प्रति लीटर पानी से घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए।
Rabi Crops: राई और सरसों में वालदार सूड़ी रोग और बचाव (Walled larva disease and its prevention in mustard and mustard)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि इस मौसम में किसानों की खेतों खडी राई या सरसों की फसल में वालदार सूड़ी रोग होने की संभावना अधिक है। राई या सरसों की फसल में वालदार सूड़ी रोग से 10-5 प्रतिशत प्रकोपित पत्तियां दिखाई देने तो अधिक नुकसान कर सकती हैं। इसमें आर्थिक क्षति स्तर मानकर मैलाथियान 50 प्रतिशत ईसी की 1.5 लीटर अथवा क्यूनालफास 25 प्रतिशत इसी की 1.25 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
Rabi Crops: पत्ती सुरंगक (लीफ माइनर) का नियंत्रण (Control of Leaf Miner)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि पत्ती सुरंगक (लीफ माइनर) जैविक नियंत्रण कारक एजाडिरेक्टिन (नीम ऑयल) 0.15 प्रतिशत ईसी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग कर सकते हैं। कीट के रसायनिक नियंत्रण के लिए ऑक्सीडिमेंटॉन-मिथाइल 25 प्रतिशत ईसी अथवा क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी की 1.0 लीटर मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 लीटर पानी में घोल घोल बनाकर छिडकाव करें।
अल्टरनेरिया पत्ती धब्बा (Alternaria Leaf Spot): कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि इस रोग के नियंत्राण के लिए किसानों को मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रतिशत की 2.0 किग्रा० मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 पानी में घोल घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
तुलासिता रोग (Tulasita Disease:) : कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि तुलासिता रोग के नियंत्राण के लिए किसान मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रतिशत की 2 किग्रा अथवा कापर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लूपी की 3.0 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 पानी में लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करना चाहिए।
सफेद गेरूई रोग (White Rust Disease) : कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि सफेद गेरूई रोग के नियंत्रण के लिए मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रतिशत की 2.0 किग्रा० मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 600-750 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करें।

Rabi Crops: चना, मटर और मसूर की फसल में सेमीलूपर कीट से बचाव (Protection from Semilooper Insect in Gram, Pea and Lentil Crop)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि किसानों की खेतों में खडी चना, मटर और मसूर में भी सेमीलूपर कीट नुकसान कर सकता है। सेमीलूपर कीट के नियंत्रण के लिए 50-60 बर्ड पर्वर प्रति हेक्टेयर की दर से लगाना चाहिए। जिस पर चिड़िया बैठकर सूड़ियो को खा सकें। इस कीट के जैविक नियंत्रण के लिए बैसिलस ध्युरैजिनसिस (बीटी) की कर्सटकी प्रजाति 10 किग्राम अथवा एजाडिरैक्टिन 0.03 प्रतिशत डब्लूपी की 2.5-5.0 किया 500-600 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। कीट के रासायनिक नियंत्रण के लिए क्यूनालफास 25 प्रतिशत ईसी 2.0 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

Rabi Crops: आलू में पछेती झुलसा, यूं करें बचाव (Late Blight in Potato, Prevent it this way)
कृषि विभाग के उप निदेशक (कृषि रक्षा) श्री देव शर्मा बताते हैं कि इस मौसम में आलू की फसल की बात करें तो उसमें पछेती झुलसा रोग का प्रकोप हो सकता है। पहले तो किसान तत्काल खेत की सिंचाई बंद कर दें। इसके साथ ही पछेती झुलसा रोग के नियंत्रण के लिए मांजेब 75 प्रतिशत डब्लूपी अथवा जिनेब 75 प्रतिशत डब्लूपी मात्रा 1.5-2.0 किग्रा० प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर घोलकर छिड़काव करना चाहिए।

Rabi Crops: गन्ना की फसल में टॉप बोरर (चोटी भेदक) कीट और बचाव (Top Borer Pest and Prevention in Sugarcane Crop)
इस मौसम में गन्ना की फसल में टॉप बोरर (चोटी भेदक) कीट के प्रकोप अधिक देखने को मिलता है। ऐसे में गन्ना की खेती करने वाले किसानों यदि गन्ना की फसल में इस रोग के लक्षण दिखें तो इसके नियंत्रण के लिए ट्राइकोडमा किलोनिस के 50000-60000 अण्डे प्रति हेक्टेयर की दर से 3 बार प्रयोग करना चाहिये। इसके साथ ही टीएसबी ल्योर 6-8 प्रति हेक्टेयर की दर से भी प्रयोग कर चोटी बेधक कीट का नियंत्रण किया जा सकता है।
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