Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण का विरोध जारी है। कर्मचारियों की मांग है कि सरकार बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त करे। ये जनहित में नहीं है। इसको लेकर विरोध प्रदर्शन को लेकर कर्मचारियों ने ध्यानाकर्षण कार्यक्रम जारी किये । जिसके चलते ही तीन मार्च को प्रदेश भर में प्रदर्शन करके विरोध सभाएं की जाएंगी।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश.
Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) को लेकर कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों ने बीते दिनों ही बिजली निजीकरण के विरोध में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम की तिथियां जारी कीं। इसके साथ ही बिजली कर्मचारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किए हैं। जो चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसके साथ ही कर्मचारियों और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश की मांग है कि बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) की प्रक्रिया की गैरकानूनी है। इसे तत्काल निरस्त किया जाए। यदि निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त नहीं की गई और टेक्निकल बीड खोलने की कोशिश की गई तो 03 मार्च को समस्त जनपदों, परियोजना मुख्यालयों और राजधानी लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किए जाएंगे।

बता दें कि योगी सरकार ने जब से प्रदेश में बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) का ऐलान किया है। सरकार के ऐलान के बाद ही उप्र में बिजली कर्मचारी विरोध में उतर आए हैं। हर दिन बिजली कर्मचारी और अधिकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर, अभी तक बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त नहीं हुई है।

Electricity Privatisation in UP: ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने की बिडिंग असंवैधानिक (Bidding to appoint transaction consultant is unconstitutional)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि ये विदित हुआ है कि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की बीड डालने के अंतिम दिन तक केवल दो ही कंपनियों ने बीड डाली है। पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन यह सार्वजनिक करे कि किन-किन कंपनियों ने बीड डाली है। जिससे पता चल सके कि कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों को टकराव) के दायरे में यह कंपनियां आती है या नहीं। इसके अतिरिक्त चूंकि यह पता चला है कि तीन से कम कंपनियों की बीड आई है। अतः वैसे भी ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने की बिडिंग असंवैधानिक हो जाती है। अतः इसे निरस्त किया जाना चाहिए।
Electricity Privatisation in UP: 42 जनपदों की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन तक नहीं (Assets worth lakhs of crores of rupees of 42 districts not even evaluated)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि प्रारंभ से ही पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की सारी प्रक्रिया के पीछे भारी घोटाले के संकेत मिल रहे हैं। पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन निजीकरण को लेकर इतना उतावला है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 42 जनपदों की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन तक कराना जरूरी नहीं समझा गया। इसके बाद ट्रांजेक्शन कंसल्टेंट नियुक्त करने के आरएफपी डॉक्यूमेंट में परिवर्तन कर कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट के प्रावधान को ड्रॉप कर दिया गया। ये सब गतिविधियां बहुत संदेहास्पद हैं।

Electricity Privatisation in UP: सीएम योगी की जीरो टॉलरेंस की नीति (CM Yogi’s zero tolerance policy)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि उप्र के सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति है। बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया में लगातार जिस प्रकार के बदलाव किए जा रहे हैं। उससे भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही है। 05 अप्रैल 2018 और 06 अक्टूबर 2020 के समझौते का सम्मान करते हुए पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन को निजीकरण की जिद छोड़कर बिजली वितरण की मौजूदा व्यवस्था में ही बिजली कर्मचारियों को विश्वास में लेकर सुधार करना चाहिए। इसके साथ ही बिजली निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से निरस्त कर देनी चाहिए।
Electricity Privatisation in UP: इन जिलों में विरोध प्रदर्शन जारी (Protests continue in these districts)
बिजली निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचरियों का विरोध प्रदर्शन जारी है। बिजली कर्मचारियों ने शनिवार को लगातार 94वें दिन वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध प्रदर्शन किया गया था। अब तीन मार्च को उप्र में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

Electricity Privatisation in UP: ऊर्जा मंत्री ने दिए बयान (Statement given by the Energy Minister)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti, Uttar Pradesh) उत्तर प्रदेश के (Convener Shailendra Dubey) संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि ऊर्जा मंत्री को ये समझना चाहिए कि एक ही बात दो समझौतों में लिखी जा रही है तो उसका महत्व कितना बढ़ जाता है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के वक्तव्य कि “पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में निजीकरण सहित रिफॉर्म करने पर सरकार की सहमति बन गई है” ने सुधार में लगे बिजली कर्मचारियों को बहुत निराश किया है। इसी सरकार ने किए गए विगत दो समझौतों के उल्लंघन से बिजली कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है। बिजली कर्मचारी लगातार मांग कर रहे हैं कि सुधार में उनके द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर प्रबंधन और सरकार उनसे बातचीत करें। वार्ता के बाद उचित समझे जाने वाले सुझाव के बिंदुओं को सुधार हेतु लागू किया जाए। मौजूदा प्रबंधन ने सुधार पर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति से एक बार भी वार्ता नहीं की है। बावजूद इसके संघर्ष समिति के सुधार के आवाहन पर बिजली कर्मी लगातार सुधार में लगे हुए हैं। इसी का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश के विद्युत वितरण निगमन में 2017 में 41% ए टी एंड सी हानियां थी जिसे बिजली कर्मचारियों ने घटकर वर्ष 2023 24 में 17% कर दिया है कि निजीकरण का राग बंद किया जाए तो बिजली कर्मचारी अगले 1 वर्ष में राष्ट्रीय मानक 15% से नीचे एटी एंड सी हानियां लाकर दिखा देंगे।
Electricity Privatisation in UP: आगरा में 800 करोड़ रुपये का मुनाफा (Rs 800 crore profit by selling electricity in Agra)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि विकसित भारत के लिए बिजली निजीकरण नहीं अपितु सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली उद्योग को रखा जाए। ये प्राथमिक आवश्यकता है। निजी क्षेत्र के लिए बिजली एक व्यापार है। जबकि, सार्वजनिक क्षेत्र के लिए ये एक सेवा है। आगरा की ही बात करें तो टोरेंट कंपनी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। खुद ऊर्जा मंत्री एके शर्मा (Energy Minister AK Sharma) को सदन में बताना चाहिए था कि टोरेंट (Torrent Power) को प्रति यूनिट बिजली किस रेट में प्राप्त हो रही है। कंपनी पॉवर कॉर्पोरशन को प्रति यूनिट कितना राजस्व दे रही है? विगत वर्ष 2023-24 में इस कारण हुए 275 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई कैसे की जाएगी? जबकि कम्पनी ने आगरा में बिजली बेंच कर 800 करोड़ रुपये का मुनाफा फिर कैसे कमाया? यदि निजीकरण के इस प्रयोग की सही समय पर समीक्षा होती तो एक साल में पॉवर कॉर्पोरशन को 1000 करोड़ का मुनाफा हो सकता था।
Leave a comment