Electricity Privatisation in UP: यूपी में बिजली निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यही वजह है कि बिजली निजीकरण की प्रक्रिया रोक दें। बिजली निजीकरण के विरोध में उत्तर प्रदेश में प्रदेश व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी है।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश.
Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी है। 90 दिन से बिजली कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के निजीकरण पर दिए गए बयान से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने विधान परिषद में कहा कि बिजली विभाग में निजीकरण के बाद भी आरक्षण की व्यवस्था यथावत बनी रहेगी। जिससे कर्मचारियों के हित पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे।
बता दें कि जब से योगी सरकार ने प्रदेश में बिजली निजीकरण का ऐलान किया है। तभी से उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हर दिन बिजली कर्मचारी और अधिकारी प्रदेश में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मगर, अभी तक बिजली निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त नहीं की गई है। बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग है कि संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की मांग पर प्रभावी हस्तक्षेप करके निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त कराएं। जिससे कर्मचारी एकजुट होकर सीएम योगी के नेतृत्व में उप्र को देश में पहले नंबर पर लाकर दिखा देंगे।

Electricity Privatisation in UP: आगरा में बिजली बेंच कर 800 करोड़ रुपये का मुनाफा (Profit of Rs 800 crore by selling electricity in Agra)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि विकसित भारत के लिए बिजली का निजीकरण नहीं अपितु सार्वजनिक क्षेत्र में बिजली उद्योग को रखा जाना प्राथमिक आवश्यकता है। क्योंकि, निजी क्षेत्र के लिए बिजली एक व्यापार है। सार्वजनिक क्षेत्र के लिए बिजली एक सेवा है। आगरा में टोरेंट कंपनी का प्रयोग इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सदन में यह बताना चाहिए था कि टोरेंट को प्रति यूनिट बिजली किस रेट में प्राप्त हो रही है। कंपनी द्वारा पॉवर कॉर्पोरशन को प्रति यूनिट कितना राजस्व दिया जा रहा है? और विगत वर्ष 2023-24 में इस कारण हुए 275 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई कैसे की जाएगी? जबकि कम्पनी ने आगरा में बिजली बेंच कर 800 करोड़ रुपये का मुनाफा फिर कैसे कमाया? यदि निजीकरण के इस प्रयोग की सही समय पर समीक्षा होती तो एक साल में पॉवर कॉर्पोरशन को 1000 करोड़ का मुनाफा होता।
Electricity Privatisation in UP: दक्षिणांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि विगत 15 वर्षों में सिर्फ आगरा के निजीकरण से ही पॉवर कॉर्पोरशन को हजारों करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। सदन के वर्तमान सत्र में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार की मुक्तकंठ से प्रशंसा हर स्तर से हो रही है। भारत सरकार द्वारा जारी की गई। विद्युत वितरण कंपनियों की रेटिंग की रिपोर्ट में बताया गया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगातार सुधार हो रहा है। उत्तर प्रदेश में आरडीएसएस स्कीम के तहत विद्युत वितरण निगमों का नेटवर्क सुधारने के लिए हजारों करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इससे हो रहे सुधार और बिजली कर्मियों के परिश्रम का परिणाम है कि विद्युत वितरण निगम लगातार सुधार की ओर बढ़ रहे हैं फिर इन सब परिणामों के बावजूद निजीकरण क्यों?

Electricity Privatisation in UP: प्रति यूनिट बिजली विक्रय कर रु 04.47 प्रति यूनिट राजस्व वसूली
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने वर्ष 2023 – 24 में प्रति यूनिट बिजली विक्रय कर रु 04.47 प्रति यूनिट राजस्व वसूली की है। जो आगरा शहर में टोरेंट पॉवर कंपनी से मिलने वाले राजस्व रु0 4.36 प्रति यूनिट से अधिक है। इस बारे में ध्यान देने योग्य बात ये है कि आगरा एक औद्योगिक शहर है। आगरा में एशिया का सबसे बड़ा चमड़ा उद्योग है और आगरा में सबसे अधिक पांच सितारा होटल है। दूसरी और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत बुंदेलखंड और चंबल का क्षेत्र आता है और अनेक गांव आते हैं। इन स्थानों पर बिजली का राजस्व बहुत कम है। इसके बावजूद दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम से टोरेंट पावर कंपनी की तुलना में प्रति यूनिट अधिक राजस्व मिल रहा है।
Electricity Privatisation in UP: बिजली महापंचायत में शपथ दिलाई थी (Sworn in at the Electricity Mahapanchayat)
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे बताते हैं कि महाकुंभ में बिना सोए दिन रात बिजली कर्मी परिश्रम कर रहे हैं। संघर्ष समिति के पदाधिकारी कहते हैं कि प्रयागराज के बिजली कर्मचारियों को विगत 5 जनवरी को हुई। बिजली महापंचायत में शपथ दिलाई थी कि वे महाकुंभ में श्रेष्ठतम प्रदर्शन करेंगे। महाकुंभ में कार्यरत बिजली कर्मियों ने इसे सिद्ध कर दिया है। महाकुंभ की बिजली व्यवस्था ने सारे देश को चकित कर दिया है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार सुधार में लगे हैं। बिजली कर्मचारियों के प्रयासों को अनदेखा कर जिस प्रकार निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है। उससे बिजली कर्मचारियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में 90 दिन से बिजली कर्मियों का जिले और परियोजना मुख्यालयों पर विरोध सभा की।

Electricity Privatisation in UP: निजीकरण के बाद भी बिजली विभाग में यथावत रहेगा आरक्षण (Reservation will remain the same in the electricity department even after privatization)
विधान परिषद में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि बिजली विभाग में निजीकरण के बाद भी आरक्षण की व्यवस्था यथावत बनी रहेगी। कर्मचारियों के हित पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगीकरण में निजी बिजली कंपनी नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) का विशेष योगदान है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने प्रश्न प्रहर में सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा के निजीकरण के मुद्दे पर उठाए गए सवालों का जवाब दे रहे थे। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में निजीकरण सहित व्यापक रिफॉर्म करने पर सैद्धांतिक निर्णय लिया गया है। निर्बाध, सस्ती और गुणवत्तायुक्त बिजली देने के लिए काम किए जाएंगे। सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा ने कहा कि सरकार महंगी बिजली खरीदकर निजी कंपनियों को सस्ते में देने का काम कर रही है। बिजली मंत्री ने कहा कि विभाग में 86 हजार से ज्यादा संविदा कर्मी हैं।

Electricity Privatisation in UP: बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश (Huge resentment among electricity workers)
उप्र ने कहा है कि बिजली वितरण निगमों के काम में लगातार सुधार हो रहा है और महाकुंभ में बिजली कर्मियों ने श्रेष्ठतम प्रदर्शन कर पूरे देश को चकित कर दिया है । इसके बावजूद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री मा० श्री अरविंद कुमार शर्मा द्वारा आज पुनः विधान परिषद में बिजली के निजीकरण के पक्ष में दिया गया वक्तव्य दुर्भाग्यपूर्ण है। ऊर्जा मंत्री के इस वक्तव्य से बिजली व्यवस्था सुधार ने लगे बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।
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