Electricity Privatisation in UP: यूपी में बिजली निजीकरण के विरोध में कर्मचारी उतरे हुए हैं। बिजली कर्मचारियों का कहना है कि सरकार जल्द बिजली निजीकरण की प्रक्रिया रोके। निजीकरण के विरोध में अब देश में राष्ट्रव्यापी हड़ताल और रैलियां होंगी है।
लखनऊ/ नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश.
Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी आंदोलन कर रहे है। हर दिन बिजली कर्मचारी अलग अलग शहर में विरोध सभाएं हो रही हैं। सीएम योगी से मांग है कि बिजली निजीकरण (Electricity Privatisation in UP) की प्रक्रिया निरस्त की जाए। आक्रोशित कर्मचारियों ने विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। अब नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (National Coordination Committee of Electricity Employees and Engineers) ने बिजली के निजीकरण के विरोध में आगामी 26 जून को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इसके साथ ही निजीकरण के विरोध में होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए देश भर में सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। उप्र में बिजली निजीकरण के विरोध में मार्च में चार बड़ी रैली होंगी।

नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (National Coordination Committee of Electricity Employees and Engineers) की नागपुर में राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। आल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, सेक्रेटरी जनरल पी रत्नाकर राव, आल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज के मोहन शर्मा ,कृष्णा भोयूर, इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रशान्त चौधरी, सुभाष लांबा, ऑल इंडिया पावर मेन्स फेडरेशन के समर सिन्हा, भारतीय किसान मोर्चा के बीजू कृष्णा, कामगार एकता मंच के गिरीश भावे ने मुख्यतया सम्बोधित किया।

Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय पदाधिकारी चार रैली करेंगे
नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने बिजली के निजीकरण के विरोध में आगामी 26 जून को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। एनसीसीओईईई ने निर्णय लिया है कि राष्ट्रव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए अप्रैल और मई के माह में देश के सभी प्रांतों में बड़े सम्मेलन किए जाएंगे। इसके पूर्व उत्तर प्रदेश में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया के विरोध में एनसीसीओईईई के राष्ट्रीय पदाधिकारी चार रैली करेंगे। कॉर्डिनेशन कमेटी ने यह निर्णय भी लिया कि 26 जून को हड़ताल पर जाने से पहले आल इंडिया ट्रेड यूनियनों की मई में होने वाली हड़ताल के दिन भी देश के बिजली कर्मी हड़ताल करेंगे।
Electricity Privatisation in UP: उप्र में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया की जानकारी दी (Information given about the ongoing privatization process in UP)
एनसीसीओईईई (NCCOEE) के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रांतों के बिजली कर्मचारियों के श्रम संघों और सेवा संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी सम्मिलित हुए। उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर और उप्र बिजली कर्मचारी संघ के प्रमुख महासचिव महेन्द्र राय ने उप्र में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया और बिजली कर्मियों के आन्दोलन की जानकारी दी।

Electricity Privatisation in UP: टैरिफ बेस्ड प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग होगी (There will be tariff based competitive bidding)
NCCOEE की आमसभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि मुनाफे में चल रहे चंडीगढ़ के बिजली विभाग का जिस तरह निजीकरण किया गया। वह बेहद आपत्तिजनक है। उप्र में सरकार के अनुसार एक लाख 15 हजार करोड रुपए का बिजली राजस्व का बकाया है। एक लाख 10 हजार करोड रुपए का घाटा है। इस प्रकार स्पष्ट है कि राजस्व वसूल लिया जाय तो उप्र के विद्युत वितरण निगम मुनाफे में हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि टैरिफ बेस्ड प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग और असेट मोनीटाईजेशन के नाम पर ट्रांसमिशन सेक्टर का बड़े पैमाने पर निजीकरण किया जा रहा। जेनरेशन के क्षेत्र में निजीकरण का खामियाजा बेहद महंगी बिजली के रूप में आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
Electricity Privatisation in UP: मुम्बई में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 17 या 18 रुपए प्रति यूनिट (17 or 18 rupees per unit for domestic consumers in Mumbai)
प्रस्ताव में कहा गया है कि निजीकरण कर्मचारियों के हित में तो है ही नहीं। इसके साथ ही बिजली उपभोक्ताओं के लिए सबसे अधिक घातक है। निजी क्षेत्र में मुम्बई में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 17 या 18 रुपए प्रति यूनिट तक बिजली का टैरिफ है। निजी क्षेत्र में किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती है। निजीकरण न रोका गया तो महंगी बिजली आम उपभोक्ताओं की कमर तोड़ देगी। आम सभा में पारित प्रस्ताव में केन्द्र और राज्य सरकारों से मांग की गई है कि बिजली का निजीकरण तत्काल वापस लिया जाए अन्यथा बिजली कर्मी पूरी एकजुटता के साथ राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने हेतु विवश होंगे।

Electricity Privatisation in UP: बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया (Record of electricity production made)
संघर्ष समिति उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे बताते हैं कि ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा भी समय समय पर ट्वीट करके बिजली व्यवस्था की उपलब्धियां गिनाते हैं। इसके बावजूद पता नहीं क्यों उन्होंने बिजली के निजीकरण की जिद पकड़ रखी है ? बजट में ये कहा गया है कि बिजली व्यवस्था में इतना ज्यादा सुधार हुआ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे 35 मिनट, तहसील में 22 घंटे 36 मिनट और सभी जनपदों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। प्रदेश में 4680 कृषि फीडरों को अलग किए जाने के लक्ष्य के सापेक्ष 3817 कृषि फीडर अलग किए जा चुके हैं। उत्पादन निगम ने 37056 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है। 1.88 लाख निजी नलकूपों को नए कनेक्शन दिए हैं। ये सब सर्वांगीण सफलता की कहानी बयां कर रहे हैं। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे का कहना है कि बिजली कर्मी इससे भी अधिक युगांतरकारी सुधार करने के लिए संकल्प बद्ध हैं। इसलिए, ऊर्जा मंत्री को निजीकरण की जिद छोड देनी चाहिए। उप्र में निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त करके बिजली कर्मचारियों का आक्रोश शांत किया जाए। जिससे बिजली कर्मी बिजली व्यवस्था के मामले में उप्रदेश को देश में पहले नंबर पर लाकर खड़ा करेंगे।

Electricity Privatisation in UP: बजट रहा ऊर्जा क्षेत्र के लिए निराशाजनक (Very disappointing budget for the energy sector)
ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे का कहना है कि हाल में यूपी सरकार ने बजट पेश किया। बजट में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा है कि कानून व्यवस्था और बिजली के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुआ है। मगर, खेद का विषय ये है कि बिजली के क्षेत्र में अभूतपुर सुधार के बावजूद बजट में बिजली के लिए आवंटन बेहद निराशाजनक है। योगी सरकार ने भारी भरकम बजट में बिजली के लिए की गई घोषणा उप्र की बिजली की जरूरतों को देखते हुए नगण्य है। अवस्थापना विकास के लिए सरकार ने 22%, शिक्षा के लिए सरकार ने 13%, कृषि के लिए 11% ,चिकित्सा के लिए 6%, सामाजिक सुरक्षा के लिए 4% और पूंजीगत परिव्यय 20.5% है। जबकि, इस बजट में अलग से ऊर्जा क्षेत्र के लिए कोई उल्लेख नहीं किया गया है। जो बेहद ही निराशाजनक बात है।
Electricity Privatisation in UP: परिणाम अच्छे, नई परियोजना नहीं (Results are good, no new project)
ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे बताते हैं कि प्रदेश में पंप स्टोरेज स्कीम के लिए 50 करोड रुपए, कोल इंडिया लिमिटेड के साथ संयुक्त उपक्रम में सोलर प्लांट के लिए 50 करोड रुपए और एनटीपीसी ग्रीन के साथ संयुक्त उपक्रम में सोलर प्लांट के लिए 80 करोड रुपए का आवंटन किया है। प्रदेश में लगातार बिजली की मांग अधिक हुई है। इसके सापेक्ष ये धनराशि कुछ भी नहीं है। उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम की प्रशंसा भले ही की गई है। मगर, उत्पादन निगम के तहत किसी नई परियोजना को लगाने की घोषणा नहीं की गई है। जो बेहद निराशाजनक है।
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