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Electricity Privatisation in UP: 83 वें दिन विरोध प्रदर्शन जारी रहा, निजीकरण निरस्त की मांग #kisan

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(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: उप्र में बिजली निजीकरण को लेकर 83 वें दिन भी बिजली कर्मचारियों का विरोध जारी रहा। बिजली निजीकरण से यूपी में स्थाई और अस्थाई के 78489 पद खतरे में पड़ जाएंगे।

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश.

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Electricity Privatisation in UP: उत्तर प्रदेश में बिजली निजीकरण के विरोध (protest against electricity privatization) में कर्मचारी उतरे हुए हैं। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में कर्मचारी एकजुट हो गए हैं। अब राज्यपाल के अभिभाषण में विद्युत आपूर्ति में प्रभावी सुधार की बात के दृष्टिगत निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने की मांग की है. जिससे निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन जारी है.

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति (Vidyut Karamchari Joint Sangharsh Samiti, Uttar Pradesh) उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निवेदन किया है कि बिजली की आपूर्ति में किए गए प्रभावी सुधार के दृष्टिगत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की चल रही प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए। निजीकरण के विरोध में लगातार बिजली कर्मचारियों का प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी है।

Electricity Privatisation in UP: पॉवर फॉर ऑल का लक्ष्य तय किया (Power for All target set)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: पॉवर फॉर ऑल का लक्ष्य तय किया (Power for All target set)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि राज्यपाल की ओर से विधानसभा में दिए गए अभिभाषण में उत्तर प्रदेश में विद्युत आपूर्ति में प्रभावी सुधार की बात कही गई है। अभिभाषण में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटा 35 मिनट, तहसील स्तर पर 22 घंटा 36 मिनट और जनपदों में 24 घंटा निर्बाध विद्युत की आपूर्ति की जा रही है। पॉवर फॉर ऑल का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सन 2017 के बाद 24800 करोड रुपए खर्च कर ट्रांसमिशन के 193 विद्युत उपकेंद्र बनाए गए हैं।

Electricity Privatisation in UP: सुधार के बहाने निजीकरण का खेल (Game of privatization under the pretext of reform)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि प्रदेश में 9926 नए विद्युत वितरण ट्रांसफार्मर लगाए गए। 28602 विद्युत वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता में वृद्धि की गई है। इस साल 188000 निजी नलकूपों को विद्युत संयोजन दिया गया है। इस प्रकार प्रदेश में विद्युत आपूर्ति में प्रभावी सुधार का कार्य हो रहा है। अतः सुधार की आड़ में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाय।

Electricity Privatisation in UP: 42 जिलों में निजीकरण का विरोध (Opposition to privatization in 42 districts)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: 42 जिलों में निजीकरण का विरोध (Opposition to privatization in 42 districts)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन विद्युत व्यवस्था में कोई सुधार न होने का बहाना लेकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया चला रहा है। राज्यपाल के अभिभाषण में विद्युत आपूर्ति में प्रभावी सुधार की बात कही गई है। अतः स्पष्ट है कि पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन सुधार का बहाना लेकर उप्र के 42 जनपदों के विद्युत वितरण का निजीकरण करने जा रहा है। जिसके भारी दुष्परिणाम उपभोक्ताओं को भुगतने होंगे।

Electricity Privatisation in UP: बिजली कर्मी लगातार सुधार कर रहे (Electricity workers are constantly improving)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली कर्मी लगातार सुधार कर रहे हैं। सन 2017 में एटी एंड सी हानियां 41% थीं। जो वर्ष 2023 – 24 में 17% रह गई हैं। कहा कि निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय तो अगले एक वर्ष में बिजली कर्मी एटी एंड सी हानियों को राष्ट्रीय मानक 15% से नीचे ले आयेंगे।

Electricity Privatisation in UP: निजी कंपनी को देना प्रदेश हित में नहीं (Giving it to a private company is not in the interest of the state)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: निजी कंपनी को देना प्रदेश हित में नहीं (Giving it to a private company is not in the interest of the state)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि आरडीएसएस स्कीम के अंतर्गत प्रदेश में बिजली प्रणाली सुधारने के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। अब विद्युत प्रणाली सुदृढ़ होने के बाद इसे निजी कंपनी को देना किसी भी तरह प्रदेश के हित में नहीं है।

Electricity Privatisation in UP: इन जिलों में किया गया विरोध प्रदर्शन (Protests were held in these districts)

बिजली निजीकरण के विरोध में मंगलवार को वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, हरदुआगंज, पारीछा, ओबरा, पिपरी और अनपरा में विरोध प्रदर्शन किया गया।

Electricity Privatisation in UP: 66000 करोड़ रुपए का राजस्व बकाया (Revenue dues of Rs 66 thousand crores)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: 66000 करोड़ रुपए का राजस्व बकाया (Revenue dues of Rs 66 thousand crores)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम (Purvanchal Vidyut Vitran Nigam) में लगभग 41 हजार करोड़ रुपए का राजस्व बकाया है तो दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम (Dakshinchal Vidyut Vitran Nigam) की बात करें तो यहां पर लगभग 25 हजार करोड़ रुपए का राजस्व का बकाया है। आगरा में बिजली निजीकरण की कहानी दोहराई जाती है तो पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की धनराशि चली जाएगी। पॉवर कॉरपोरेशन को एक झटके में लगभग 66 हजार करोड़ रुपए की चोट लगेगी। दरअसल निजी कंपनियों की नजर इसी बकाए पर है। उप्र के अलावा अन्य प्रांतों में भी निजी कम्पनी ने बकाए की धनराशि हड़प ली है।

Electricity Privatisation in UP: निजीकरण से बिजली दरें महंगी होंगी (Electricity rates will become expensive)
(Photo Credit: Kisan Voice)
Electricity Privatisation in UP: निजीकरण से बिजली दरें महंगी होंगी (Electricity rates will become expensive)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि मुंबई में घरेलू बिजली की दरें 17-18 रुपए प्रति यूनिट हैं। जबकि, यूपी में अभी अधिकतम 6.50 रुपए प्रति यूनिट है। निजीकरण के बाद बिजली की दरें तीन गुना तक बढ़ेंगी। इससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया वापस नहीं ली गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

Electricity Privatisation in UP: निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाय (The decision of privatisation should be withdrawn immediately)

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने बताया कि बिजली कर्मी चालू वित्तीय वर्ष में अधिकतम राजस्व वसूली के संकल्प के साथ अपने काम में जुट हुए हैं किन्तु पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने निजीकरण का राग अलाप कर अनावश्यक तौर पर औद्योगिक अशांति का वातावरण बना दिया है। निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाय तो बिजली कर्मी रिकॉर्ड राजस्व वसूली करने में सक्षम हैं।

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