Top Wheat Variety: गेंहू की किस्म पूसा मालवी से 55-60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार हो सकती है। ये गेंहू की सबसे खास वैरायटी है। जो 120 दिनों में 2 से 3 सिंचाई में पककर तैयार हो जाती है। गेंहू की पूसा मालवी किस्म का दलिया, सूजी और अन्य उत्पाद खूब डिमांड में रहते हैं। गेंहू की ये किस्म के कारण किसान जल्दी फसल काटकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
Top Wheat Variety: खरीफ (Kharif Crop) की फसल धान (Paddy) की कटाई के साथ ही किसान अब रबी फसल (Rabi Crop) में गेंहू की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। गेंहू (Wheat) की बुवाई से पहले गेंहू की उन्नत किस्म के बारे में पता करना बेहद जरूरी है। खेत की मिटटी और मृदा की जांच के बाद ही गेंहू (Top Wheat Variety) की बुवाई करें। आज हम गेंहू की एक ऐसी उन्नत किस्म के बारे में जानकारी लेकर आए हैं। जो कम सिंचाई में पककर तैयार हो जाती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं गेंहू की किस्म पूसा मालवी (Wheat Variety Pusa Malvi) यानी HD 4728 किस्म की। गेंहू की ये उन्नत किस्म (Wheat Variety) 2 से 3 सिंचाई में ही पक जाती है। आइए, गेंहू की किस्म पूसा मालवी (Pusa Malvi) की बुवाई, खाद (Fertilizer) , सिंचाई (Irrigation) और पैदावार (Yield) के बारे में जानते हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र इंदौर ने पूसा मालवी प्रजाति (Malvi Wheat Variety) भी विकसित की है। भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान ने इसकी खेती के लिए देश के मध्य क्षेत्र में आने वाले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान के कोटा व उदयपुर क्षेत्र के अलावा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सबसे अच्छे बताये हैं। इस प्रजाति की 20 से 30 अक्टूबर के बीच बोया जा सकता है।

पूसा मालवी की फसल दो से तीन सिंचाई में तैयार (Pusa Malvi crop is ready in two to three irrigations)
अमूमन गेहूं की हर किस्म में चार से पांच बार सिंचाई की जरूरत होती है। लेकिन गेहूं की किस्म पूसा मालवी की फसल दो से तीन सिंचाई में तैयार हो जाती है। कम पानी देने से इस किस्म की खेती में लागत भी कम आती है। HD 4728 यानी पूसा मालवी की बात करें तो इस किस्म के गेहूं के पौधे विपरीत परिस्थितियों में भी तेज़ी से बढ़ते हैं। इस गेहूं में भरपूर प्रोटीन के साथ आयरन 37.9 पीपीएम और जिंक 40.1 पीपीएम होगा।
Top Wheat Variety: बीज की मात्रा (Pusa Malvi Quantity of seeds)
गेंहू की बुवाई में बीज की सही मात्रा का भी उपयोग करना चाहिए। गेंहू बीज की मात्रा कम या अधिक नहीं रखनी चाहिए। गेंहू की किस्म पूसा मालवी की बुवाई में 40 किग्रा. प्रति एकड़ बीज की जरूरत होती है। गेंहू की बुवाई से पहले बीज शोधन जरूर करें।

गेंहू बीज का उपचार (Pusa Malvi Wheat seed treatment)
गेंहू की किस्म की बुवाई से पहले बीज को उपचारित जरूर करें। गेंहू के बीज की बुवाई से पहले उसे ट्राइकोडर्मा 4 ग्राम प्रति किग्रा. बीज की दर से उपचारित करके की बुवाई करें।
पूसा मालवी 120 दिनों में पक कर तैयार (Pusa Malvi ripens in 120 days)
गेंहू की किस्म एचडी-4728 (Pusa Malvi) की बुवाई उस क्षेत्र में करें, जहां पर सिंचाई की व्यवस्था हो। इस गेंहू के किस्म की मध्य भारत में अच्छी पैदावार ली जा सकती है। पूसा मालवी 120 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। पूसा मालवी का दाना बड़ा, चमकीला और उच्च गुणवत्ता का होता है। इस किस्म की औसत उत्पादन क्षमता 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। इस किस्म में तना व पत्ती के गेरुई रोग के लिए अधिक प्रतिरोधी क्षमता पाई जाती है।
पूसा मालवी गेंहू की किस्म में पोषक तत्वों की भरमार (Pusa Malvi wheat variety is full of nutrients)
पूसा मालवी (Pusa Malvi) गेहूं की खेती करने के लिए मृदा में सूक्ष्म पोषक तत्वों सही मात्रा में होने चाहिए। इस गेंहू की प्रजाति की बुवाई से पहले मृदा की जांच जरूर कराएं। मृदा की जांच (Soil Test) रिपोर्ट के आधार पर बुवाई में उर्वरक का उपयोग करें। जिससे खेती की लागत कम आएगी। पूसा मालवी गेहूँ में रोग प्रतिरोध क्षमता अधिक होने के कारण गेरूआ रोग फसल को हानि नहीं पहुंचाता है। इसके साथ ही पूसा मालवी गेहूं से प्रोटीन, विटामिन से भरपूर विभिन्न पोष्टिक व्यंजन, दलिया, बाटी, सूजी एवं पोषण प्रदान करने वाले अनेक व्यंजन बनाये जा सकते हैं।
यूं करें गेहूं की खेती (Pusa Malvi This is how to cultivate wheat)
Cultivate Wheat: गेहूं की बुवाई से पहले खेतों में गहरी जुताई करके मिट्टी भुरभुरा बना लें। इसके बाद गोबर की खाद और खरपतवार नाशी दवा (Weed Management in Wheat) भी मिट्टी में छिड़काव करें। इस फसल में खरपतवार की संभावना भी कम रहती है। पूसा तेजस के बीजों की बुवाई से पहले बीजों का उपचार करना चाहिए।

देश में शरबती गेहूं की किस्में। (Varieties of Sharbati wheat in the country)
भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार और अन्य राज्य में गेहूं की खेती होती है। देश में करीब 9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में शरबती गेहूं की खेती होती है। जिसकी अधिक डिमांड होती है। शरबती गेहूं की प्रमुख किस्में C-306, सुजाता (HI-617) JWS 17, अमर (HW 2004), अमृता (HI 1500), हर्षिता (HI 1531), HD 2987, JW – 3173 समेत अन्य गेंहू किस्म लोकप्रिय हैं। (C-306, Sujata (HI-617), JWS 17, Amar (HW 2004), Amrita (HI 1500), Harshita (HI 1531), HD 2987, JW – 3173)
ड्युरम गेहूं की किस्में। (Varieties of durum wheat)
देश की बात करें तो मध्य प्रदेश, यूपी और हरियाणा समेत अन्य राज्यों में ड्युरम गेहूं उगाया जा रहा है। ड्युरम गेहूं की किस्म में पूसा अनमोल (HI – 8737), पूसा मालवी (HD – 4728), पूसा तेजस (HI 8759), मालवश्री (HI – 8381), मालव शक्ति (HI- 8498), मालव रत्न (HD-4672), MP0 – 1215, पूसा मंगल (HI-8713), पूसा पोषण (HI 8663), JW-1255, JW- 1106 समेत प्रमुख किस्में लोकप्रिय हैं। (Pusa Anmol (HI – 8737), Pusa Malvi (HD – 4728), Pusa Tejas (HI 8759), Malvashri (HI – 8381), Malva Shakti (HI- 8498), Malva Ratna (HD-4672), MP0 – 1215, Pusa Mangal (HI-8713), Pusa Poshan (HI 8663), JW-1255, JW- 1106)
सामान्य गेहूं की किस्में। (Normal wheat varieties)
भारत में मध्य प्रदेश, यूपी और हरियाणा समेत अन्य राज्यों में सामान्य गेहूं (Normal Wheat) भी खूब उगाया जाता है। जिसमें लोक-1, जीडब्ल्यू – 322, जीडब्ल्यू – 273, जीडब्ल्यू – 366, जीडब्ल्यू – 173, एमपी – 1203, आरवीडब्ल्यू – 4106, जीडब्ल्यू – 451, जीडब्ल्यू 3288, जेडब्ल्यू – 3211, जीडब्ल्यू – 3382, जेडब्ल्यू – 1358 समेत प्रमुख किस्में लोकप्रिय हैं। (Lok-1, GW – 322, GW – 273, GW – 366, GW – 173, MP – 1203, RVW – 4106, GW – 451, GW 3288, JW – 3211, GW – 3382, JW – 1358) .
Q: गेहूं की फसल कितने दिन में पककर तैयार हो जाती है?
A: गेंहू की अधितक वैरायटी की फसल लगभग 145 दिनों में पककर तैयार होती हैं। इन गेंहू की किस्म की उपज सामान्य मृदा में 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तथा लवण प्रभावित क्षेत्रों में 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
Q: गेंहू की बुवाई में कितनी खाद का उपयोग करें ? (How much fertilizer should be used in wheat sowing?)
A: आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि गेंहू या किसी भी तरह की फसल करने से पहले मृदा की जांच कराएं। हर जिले में मृदा जांच की व्यवस्था रहती है। मृदा की जांच रिपोर्ट के आधार पर उर्वरक का उपयोग करें। जिससे जहां पौधे को भरपूर जरूरी पोषक तत्व मिलेंगे। खर्च भी कम आएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही गेंहू की बुवाई के दौरान नाइट्रोजन,पोटाश, फास्फोरस, जिंक का इस्तेमाल करें।
Q: बुवाई से पहले गेंहू बीज उपचारित कितना जरूरी है ? (How important is it to treat wheat seeds before sowing?)
A: आगरा के बिचपुरी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान बताते हैं कि बुवाई से पहले गेंहू के बीज को जीवाणु खाद से उपचारित करें। इससे रासायनिक खादों की मात्रा में कमी लाई जा सकती है। जीवाणु खाद से बीज उपचारित करने से पौधों को नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश भी सही मात्रा में मिलेगी।
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