Top Wheat Variety: भारतीय गेहूं (Indian Wheat) की देश के साथ-साथ दुनिया के तमाम देशों में डिमांड है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत अन्य राज्यों में एक्सपोर्ट के लिए अच्छी क्वालिटी और पोषक तत्वों से भरपूर गेंहू की किस्मों की खेती हो रही है।
उन्नतशील गेंहू की किस्मों से खेती में लागत कम होने के साथ ही उपज बढ़ी रही है। जिससे किसान की आमदनी बढ़ गई है।
आज हम बात करेंगे गेहूं की किस्म जीडब्ल्यू 322 है।
Top Wheat Variety: रबी सीजन (Rabi Season 2024) की प्रमुख फसल में गेहूं की खेती (Wheat Cultivation) आती है। ये प्रमुख खाद्यान्न (Food Grain Crops) फसल है। देश के किसानों की आय बढ़ाने और कम लागत पर अधिक उपज (more yield at low cost) देने वाली गेंहू की किस्में विकसित करने में कृषि वैज्ञानिक लगे हैं। अभी रबी सीजन (Rabi Season)की फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। आज हम बात गेंहू की उन्नत किस्म गेहूं की किस्म जीडब्ल्यू-322 (GW-322 Wheat) करेंगे। जो गेंहू की बेहतर किस्म है। जिसकी पैदावार प्रति हेक्टेयर 60-70 क्विंटल तक मिल सकती है। आइए, गेंहू की किस्म GW-322 की किस्म की बुवाई का समय, फसल प्रबंधन और पैदावार के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Top Wheat Variety: गेहूं की जीडब्ल्यू-322 किस्म किसने बनाई (Who created the GW-322 variety of wheat)
गेहूं की जीडब्ल्यू-322 किस्म को लोकभारती ग्रामविद्यापीठ (Lokbharati Gram Vidyapeeth) ने विकसित किया था। यह एक अच्छी गेंहू की किस्म है। गेंहू की किस्म-322 की खेती मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के किसान करते हैं। इसमें करनाल वंट रोग (Symptoms of Karnal Vant disease) के लक्षण पाए गए थे। इस किस्म की बुवाई से कम मेहनत में बेहतर उत्पादन मिलता है। इसलिए किसानों (Farmers) को ये किस्म अच्छी लगती है। गेहूं की अन्य किस्मों की तरफ भी किसानों का रुझान है। लेकिन गेहूं की जीडब्ल्यू-322 किस्म के प्रति ज्यादा दिलचस्पी दिखाई जा रही है। GW-322 सूखे की स्थिति को सहन कर सकती है। इसे सिर्फ 3 से 4 बार सिंचाई की जरूरत होती है। यह किस्म भी कई आम बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है। गेंहू की ये किस्म 115 से 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
क्या है करनाल बंट रोग ? (What is Karnal Bunt disease?)
करनाल बंट रोग की वजह से गेहूं का दाना काला पड़कर सिकुड़ जाता है। इसके आटे से सड़ी मछली की तरह बदबू आती है। इसकी वजह से भूसा भी पशुओं के खाने योग्य नहीं रहता है। गेहूं की पूरी बाली में दाना नहीं बैठता है।

हर साल कम होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता (Disease resistance decreases every year)
गेहूं की जीडब्ल्यू 322 किस्म में करनाल वंट रोग मानव शरीर के लिए बीमारी का घर कहते हैं। ये मिट्टी के लिए भी हानिकारक है। यह किस्म लगभग 16 साल पहले प्रचलन में आई थी। जब इस किस्म में करनाल वंट मिला। तो किसानों को इसकी बुवाई न करने की सलाह दी गई। बता दें कि सीड सर्टिफिकेशन लेबोरेट्री के अलावा कृषि विश्वविद्यालयों की प्रयोगशाला में राज्यभर के सैंपल का परीक्षण कराया गया था।
GW-322 गेहू बीज (GW 322 Wheat Seeds)
- आटा उधोग में अधिक डिमांड
- 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
- 115 से 120 दिनों की फ़सल
- रोटी बनाने में ये गेंहू का आटा उत्तम है
- ये गेंहू की फसल 3 से 4 सिचाई की आवश्यकता
- मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में सर्वाधिक किसानो की पसंद
- इस गेंहू की बुवाई का समय अक्टूबर से नवंबर
- प्रोटीन की मात्रा 11% पायी जाती है
- भूरा गेरुआ और करनाल वंट रोगों की संभावना कम
देश में शरबती गेहूं की किस्में। (Varieties of Sharbati wheat in the country)
देश में मध्य प्रदेश के साथ अन्य राज्य में लगभग 9.00 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में शरबती गेहूं की खेती होती है। शरबती गेहूं की प्रमुख किस्में C-306, सुजाता (HI-617) JWS 17, अमर (HW 2004), अमृता (HI 1500), हर्षिता (HI 1531), HD 2987, JW – 3173 समेत अन्य गेंहू किस्म लोकप्रिय हैं। (C-306, Sujata (HI-617), JWS 17, Amar (HW 2004), Amrita (HI 1500), Harshita (HI 1531), HD 2987, JW – 3173)
ड्युरम गेहूं की किस्में। (Varieties of durum wheat)
मध्य प्रदेश, यूपी और हरियाणा समेत अन्य राज्यों में ड्युरम गेहूं उगाया जा रहा है। ड्युरम गेहूं की किस्म में पूसा अनमोल (HI – 8737), पूसा मालवी (HD – 4728), पूसा तेजस (HI 8759), मालवश्री (HI – 8381), मालव शक्ति (HI- 8498), मालव रत्न (HD-4672), MP0 – 1215, पूसा मंगल (HI-8713), पूसा पोषण (HI 8663), JW-1255, JW- 1106 समेत प्रमुख किस्में लोकप्रिय हैं। (Pusa Anmol (HI – 8737), Pusa Malvi (HD – 4728), Pusa Tejas (HI 8759), Malvashri (HI – 8381), Malva Shakti (HI- 8498), Malva Ratna (HD-4672), MP0 – 1215, Pusa Mangal (HI-8713), Pusa Poshan (HI 8663), JW-1255, JW- 1106)
सामान्य गेहूं की किस्में। (Normal wheat varieties)
मध्य प्रदेश, यूपी और हरियाणा समेत अन्य राज्यों में सामान्य गेहूं ((Normal Wheat) उगाया जा रहा है। लोक-1, जीडब्ल्यू – 322, जीडब्ल्यू – 273, जीडब्ल्यू – 366, जीडब्ल्यू – 173, एमपी – 1203, आरवीडब्ल्यू – 4106, जीडब्ल्यू – 451, जीडब्ल्यू 3288, जेडब्ल्यू – 3211, जीडब्ल्यू – 3382, जेडब्ल्यू – 1358 समेत प्रमुख किस्में लोकप्रिय हैं। (Lok-1, GW – 322, GW – 273, GW – 366, GW – 173, MP – 1203, RVW – 4106, GW – 451, GW 3288, JW – 3211, GW – 3382, JW – 1358) .
Q: गेहूं की फसल कितने दिन में पककर तैयार हो जाती है?
A: गेंहू की अधितक वैरायटी की फसल लगभग 145 दिनों में पककर तैयार होती हैं। इन गेंहू की किस्म की उपज सामान्य मृदा में 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तथा लवण प्रभावित क्षेत्रों में 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
- 322 Gehu ki kheti
- 322 Gehu ki kheti ki jankari hindi
- 322 gehu seeds
- 322 गेहूं का उत्पादन
- 322 गेहूं का रेट
- 322 गेहूं की जानकारी
- 322 गेहूं की बुवाई कब करें
- 322 गेहूं से भरपूर पैदावार
- gehu 322 kism
- gw 322 wheat variety
- GW 322 wheat variety in hindi
- gw 322 गेहूं किस्म विशेषता
- GW 322 गेहूं किस्म विशेषताओं
- Rabi Crops
- Top Wheat Variety
- Wheat Crop
- Wheat cultivation
- Wheat Farming
- Wheat Variety
- Wheat Variety GW 322
- उन्नतशील गेहूं बीज
- गेहूं की किस्म
- गेंहू की किस्म GW 322
- गेहूं की किस्म GW-322
- गेहूं की जीडब्ल्यू 322 किस्म
Leave a comment