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टिप्स और ट्रिक्स

Parali न जलाएं किसान, बायो वेस्ट डिकम्पोजर मिलेंगी फ्री l Farmers should not burn Parali, Free Bio Waste Decomposer

Farmers should not burn Parali, they will get free bio waste decomposer
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Parali News: कासगंज में कृषि विभाग की गोष्ठी में जागरूकता प्रचार प्रसार कराने के निर्देश दिये दिए। ये जनपद स्तरीय फसल अवशेष प्रबंधन कृषक की जागरूकता गोष्ठी कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुई। दो एकड से कम क्षेत्र के लिए रुपए 2500 अर्थदण्ड, दो से पांच एकड क्षेत्र के लिए रुपए 5000 अर्थदण्ड, पांच एकड से अधिक क्षेत्र के लिये रुपए 15000 तक पर्यावरण कम्पन्सेशन की वसूली के निर्देश है।

कासगंज, उत्तर प्रदेश

Parali News: कासगंज में कलक्ट्रेट के रूद्राक्ष सभागार में प्रमोशन ऑफ़ एग्रीकल्चरल मैकेनाजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेन्ट ऑफ क्राप रेज्ड्यू (Promotion of Agricultural Mechanization for In-Situ Management of Crop Residue) के तहत गोष्ठी हुई। जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी मेधा रूपम ने की। जिसमें कृषि विभाग के अधिकारियों ने संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। जिला स्तर पर जागरूकता अभियान, न्याय पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान, परमानेन्ट होर्डिग तहसील व विकास खण्ड स्तर पर किया जाये। फसल अवशेष (Parali News) का कम्पोस्ट बनाने के लिए कृषकों को बायो वेस्ट डिकम्पोजर का शीघ्र ही नि:शुल्क वितरण किया जायेगा। प्रचार वाहन पराली प्रभावित क्षेत्रों में, धान की कटाई के समय कम्बाइन हार्बेस्टर मशीन में सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम लगाया जायें।

गोष्ठी में कहा कि, कटाई के बाद फसल अवशेष प्रबन्धन के कृषि यंत्रों का प्रयोग में किया जाये। इसके साथ ही फसल को अन्य कार्यों जैसे पशु चारा, कम्पोस्ट खाद बनाने, बायों कोल आदि में उपयोग के लिए कृषकों को प्रेरित किया जाये। दो एकड से कम क्षेत्र के लिए रुपए 2500 अर्थदण्ड, दो से पांच एकड क्षेत्र के लिए रुपए 5000 अर्थदण्ड, पांच एकड से अधिक क्षेत्र के लिये रुपए 15000 तक पर्यावरण कम्पन्सेशन की वसूली के निर्देश है।

Farmers should not burn Parali, they will get free bio waste decomposer
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सरकार दे रही कृषि यंत्रों (agricultural equipment) में छूट

उपनिदेशक कृषि ने बताया कि, फॉर इन सीटू योजनान्तर्गत यंत्र वितरण भारत सरकार की ओर से संचालित फसल अवशेष प्रबन्धन की योजना के तहत एफपीओ, ग्राम पंचायत की ओर से 30 लाख तक लागत के फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए 80 प्रतिशत अनुदान देय है। इसके साथ ही व्यक्तिगत यन्त्रों पर 50 प्रतिशत अनुदान देय है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए हैपी सीडर, सुपर सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर, मल्चर, रोटरी स्लैसर, श्रेडर, श्रव मास्टर, हाइड्रोलिक रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड प्लाऊ, जीरो टिल सीड कम फर्टी लाइजर ड्रिल, बेलिंग मशीन, स्ट्रा रेक, रीपर, रीपर कम वाइण्डर, स्मार्ट सीडर समेत अन्य यन्त्र हैं।

किसानों को जागरुक करें (Make farmers aware)

कृषकों के खेतों से पराली प्रबन्धन संग्रह कर निराश्रित गौशालाओं में लाने के लिए प्रेरित किया जाये। ग्राम स्तर पर खाद के गड्डो के माध्यम से पराली फसल प्रबन्धन के लिए वायु प्रदूषण को घटायें एवं कृषकों का जागरूक करें। फसल अवशेष न जलाये और मृदा में कार्बनित पदार्थ बढ़ाये। जिला स्तर पर अपर जिलाधिकारी (विरा) की अध्यक्षता में सेल का गठन किया जाता है। ये सेल फसल की कटाई से रबी की बुबाई तक आवश्यकता मानीटरिंग की कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। प्रत्येक विकास खण्ड तहसील स्तर पर संबंधित उपजिलाधिकारी के पर्यवेक्षण में सचल दस्ते का गठन किया जाता है। प्रत्येक विकास खण्ड स्तर पर खण्ड विकास अधिकारी की अध्यक्षता में सचल दस्ते का गठन किया जाता है। समस्त थाना प्रभारी अपने क्षेत्र में फसल अवशेष को जलने से रोकने के लिए प्रभावी कार्यवाही करें तथा किसी भी दशा में फसल को न जलने दें।

पराली नहीं जलने दें (Do not allow burning of stubble)

प्रत्येक गांव के ग्राम प्रधान एवं क्षेत्रीय लेखपाल की जिम्मेदारी होगी कि वे अपने क्षेत्र में फसल अवशेष जलने की घटनायें। अपनी ग्राम पंचायत में बि​ल्कुल पराली नहीं जलने दें। जो भी ऐसा करे तो उनके विरूद्ध कार्रवाई की जायेंगी। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार पटेल, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, उपकृषि निदेशक, कृषि विज्ञान केन्द्र मोहनपुरा, जिला गन्ना अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी जिला पंचायत राज अधिकारी, एलडीएम, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला सूचना अधिकारी और जिले के किसानों समेत अन्य लोग भी उपस्थित रहे।

पराली जलाने के नुकसान: पराली जलाने से कई तरह के नुकसान होते हैं। इसलिए पराली को नहीं जलाना चाहिए।

  • पराली जलाने से खेतों की उर्वरता कम होती है।
  • पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट होते हैं।
  • पराली जलाने से खेतों के फ़ायदेमंद जीवाणुओं की संख्या घट जाती है।
  • पराली जलाने से वायु में कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और अन्य जहरीली गैसें का स्तर बढ जाता है।
  • पराली जलाने से ये निकलने वाली हानिकारक गैसों से स्मॉग बनता है।
  • पराली जलाने से वायु की गुणवत्ता खबरा हो जाती है।
  • पराली जलाने से दिल्ली और एनसीआर में धुंध और प्रदूषण बढ़ जाता है।
  • पराली जलाने से कीटों की संख्या बढ़ती है। जिससे फ़सलों में रोग पैदा होते हैं।
  • पराली जलाने से प्रदूषण का स्तर खतरनाक होने से मृत्यु दर भी बढ़ती है।

ये पराली का सही इस्तेमाल: पराली जलाने के बजाय इसके लिए कई वैकल्पिक तरीके अपनाए जा सकते हैं। जिससे जहां वायु प्रदूषित नहीं होगी. इसके खेत की उर्वरा शक्ति बढेगी. इसके साथ ही इसे ईधन की तरह भी इस्तेमाल किया जाएगा।

  • पराली को मिट्टी में मिलाने से खेत की उर्वरा शक्ति बढती है।
  • पराली का इस्तेमाल बिजली संयंत्रों में ईंधन के रूप में किया जाए।
  • पराली का इस्तेमाल लुगदी और कागज़ उद्योगों में किया जा सकता है।
  • पराली का इस्तेमाल जैव ईंधन बनाने के लिए किया जा सकता है।
  • पराली का इस्तेमाल खाद और बायोचार बनाने के लिए किया जाए।
  • पराली का इस्तेमाल सीमेंट और ईंटों के उत्पादन में किया जा सकता है।

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